कैमरे का झूठ
कैमरे का झूठ
शहर के एक आलीशान और महंगे फ्लैट में आर्यन और रिया की ज़िंदगी बाहर से किसी परीकथा जैसी लगती है। उनके सोशल मीडिया पर लाखों चाहने वाले हैं, जो उनकी हर तस्वीर और वीडियो पर प्यार लुटाते हैं और उन्हें एक 'आइडियल कपल' मानते हैं। कमरे में महंगी रिंग लाइट जलती है, मोबाइल का कैमरा ऑन होता है और आर्यन बहुत ही प्यार से रिया को बांहों में भर लेता है। रिया के चेहरे पर दुनिया की सबसे खूबसूरत मुस्कान होती है। वो दोनों कैमरे के सामने एक-दूसरे की आँखों में ऐसे देखते हैं जैसे एक-दूसरे के बिना जी नहीं सकते। वीडियो रिकॉर्ड होता है, अपलोड होता है और कुछ ही मिनटों में हज़ारों लाइक्स और कमेंट्स की झड़ी लग जाती है। लेकिन असली कहानी तब शुरू होती है जब वो लाल रंग का 'रिकॉर्ड' बटन बंद होता है।
कैमरा बंद होते ही वो प्यार भरी मुस्कान झटके से गायब हो जाती है। आर्यन तुरंत रिया को छोड़कर सोफे के दूसरे कोने पर बैठ जाता है और अपने फोन में किसी और से चैटिंग करने में व्यस्त हो जाता है। रिया भी बिना एक शब्द कहे अपने कमरे में चली जाती है। उस आलीशान फ्लैट में सन्नाटा इतना गहरा है कि अपनी ही सांसों की आवाज़ डराने लगती है। उनके बीच अब पति-पत्नी वाला कोई रिश्ता नहीं बचा है, बस एक 'बिज़नेस डील' है। वो दोनों जानते हैं कि अगर वो अलग हुए, तो उनके लाखों फॉलोअर्स टूट जाएंगे, ब्रांड की स्पॉन्सरशिप खत्म हो जाएगी और उनका वो नकली रुतबा मिट्टी में मिल जाएगा। इसलिए वो रोज़ सुबह उठकर एक नकली प्यार का नकाब पहनते हैं। आर्यन अब अक्सर रात को घर नहीं लौटता, और जब लौटता है तो किसी और के परफ्यूम की महक साथ लाता है। रिया यह सब जानती है, घुटती है, रोती है, लेकिन अपने उसी फोन के कैमरे के सामने चुपचाप आंसू पोंछकर फिर से एक 'हैप्पी वाइफ' होने का ढोंग करती है। दोनों एक ही छत के नीचे रहते हुए भी मीलों दूर हैं। उन्होंने दुनिया की नज़र में खुद को आबाद करने के लिए, हकीकत में अपनी रूह को पूरी तरह से बर्बाद कर लिया है।
सुखविंदर की कलम से:
"आज की इस अंधी दौड़ में हमने 'दिखने' और 'होने' के बीच का फर्क ही मिटा दिया है। अजीब तमाशा है इस सोशल मीडिया का, जहाँ लोग अपने खोखले और मरे हुए रिश्तों को भी फिल्टर लगाकर ज़िंदा दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। याद रखना, जिस प्यार को साबित करने के लिए रोज़ कैमरे की ज़रूरत पड़े, वहां प्यार नहीं, सिर्फ एक समझौता होता है। आज के आर्यन और रिया ने चंद लाइक्स और झूठी तारीफों के लिए अपनी वफ़ादारी, अपनी इज़्ज़त और अपने घर के सुकून का ही सौदा कर दिया। उन्होंने बाहर की दुनिया को खुश करने के लिए अपने अंदर की दुनिया में आग लगा ली। मेरा यह पैगाम उन सब के लिए है जो दूसरों की चमचमाती डिजिटल ज़िंदगी देखकर अपने असली रिश्तों से नफरत करने लगते हैं—सच्चा प्यार मोबाइल की स्क्रीन पर नहीं, बल्कि बीमारी में सिरहाने बैठकर दबाए गए माथे में दिखता है। जो घर कैमरे की फ्लैशलाइट से रोशन हो, वो असल ज़िंदगी में अक्सर बहुत अंधेरा होता है। तरक्की ज़रूर करो, नाम कमाओ, लेकिन अपनी रूह और अपने ज़मीर को इस दिखावे की मंडी में नीलाम करके नहीं।"
