भूतिया रात और पाँच नमूने
भूतिया रात और पाँच नमूने
जून की वो रात किसी जलते हुए तंदूर जैसी थी, जिसमें हवा का एक झोंका भी झुलसा देने वाला था। आर्यन के घर की छत पर पाँचों दोस्त—आर्यन, रिया, बबलू, समीक्षा और लकी—ऐसे बेदम पड़े थे जैसे किसी ने उनकी सारी ताकत निचोड़ ली हो। अचानक, बिजली के खंभे पर एक ज़ोरदार धमाका हुआ और पूरे मोहल्ले की रोशनी एक झटके में लील ली गई। सन्नाटा ऐसा छा गया कि दिल की धड़कनें साफ़ सुनाई देने लगीं। लकी, जो पसीने से तर-बतर था, अंधेरे में अपना हाथ हवा में भांजते हुए चिड़चिड़ाकर बोला कि ओए ये बिजली वालों को मेरी खुशियों से क्या दुश्मनी है, जैसे ही नींद आने वाली होती है, ये अपनी मनमानी शुरू कर देते हैं। उसकी बात सुनकर समीक्षा ने एक ठंडी आह भरी और अपने दुपट्टे से पसीना पोंछते हुए कहा कि लकी, तू अपनी शादी के सपने बाद में देख लेना, पहले ये सोच कि अगर ये लाइट आधे घंटे और नहीं आई तो हम सब यहाँ पिघलकर मोमबत्ती बन जाएँगे। तभी बबलू ने अंधेरे में अपनी आँखें चमकाते हुए चुटकी ली कि समीक्षा, अगर तू पिघली तो हम तुझे किसी सुंदर सी बोतल में भर लेंगे, कम से कम सुबह तक तू 'लिक्विड समीक्षा' तो कहलाएगी। इस पर रिया ने उसे जोर से टोका और हँसते हुए कहा कि तू अपनी फ़िक्र कर बबलू, तू तो वैसे ही कोयले जैसा है, पिघलेगा तो सिर्फ काला धुआँ ही बचेगा। हंसी-मज़ाक के बीच अचानक आर्यन एकदम से सीधा होकर बैठ गया और उसकी आवाज़ में एक अजीब सा डर था जब उसने फुसफुसाकर कहा कि ओए... वो नीचे गली के कोने में क्या है? सबकी नज़रें उस तरफ जमीं जहाँ एक धुंधला सा सफेद साया दीवार के साथ सटकर खड़ा था। सन्नाटा इतना गहरा था कि दूर कहीं किसी कुत्ते के रोने की आवाज़ रूह कंपा रही थी। अचानक एक 'छन-छन' की आवाज़ सुनाई दी, जैसे कोई पायल पहनकर भारी कदमों से सीढ़ियों की तरफ बढ़ रहा हो। समीक्षा का चेहरा डर के मारे सफेद पड़ गया और उसने काँपते हाथों से लकी का हाथ थाम लिया। लकी जो खुद अंदर से बुरी तरह डर चुका था, हकलाते हुए बोला कि ड-डरो मत, वो कोई आवारा जानवर होगा, पर उसकी खुद की साँसें तेज़ चल रही थीं। बबलू ने माहौल को और डरावना बनाते हुए कहा कि लकी, जानवर पायल नहीं पहनते, ये वही 'अतृप्त आत्मा' है जिसके बारे में सुना था कि वो लाइट जाने पर ही अपने शिकार की तलाश में निकलती है। डर और पसीने का वो मिश्रण उन पाँचों के चेहरे पर साफ दिख रहा था, आँखें फटी की फटी रह गई थीं और सीढ़ियों से आती वो आवाज़ अब उनके बिल्कुल करीब पहुँच चुकी थी। तभी सीढ़ियों के दरवाजे पर एक तेज़ रोशनी चमकी और सब के सब एक साथ चीख पड़े, मानो यमराज सामने खड़ा हो। लकी तो इतना घबरा गया कि उसने अपनी आँखें जोर से बंद कर लीं और गिड़गिड़ाने लगा कि भूतनी जी, मैं बहुत पतला हूँ, मुझे मत ले जाओ, ये बबलू को देखो, ये पूरा एक हफ़्ते का राशन है! पर तभी रोशनी के पीछे से एक जानी-पहचानी हंसी गूँजी। वो कोई भूत नहीं, बल्कि आर्यन की छोटी बहन थी जो हाथ में घर की चाबियों का गुच्छा हिला रही थी जिससे वो 'छन-छन' हो रही थी। उसने सबको ताना मारते हुए कहा कि ओए डरपोक की टोली, मोहल्ले भर में शोर मचा रखा है, मम्मी कह रही हैं नीचे चलो, इन्वर्टर चल गया है और फ्रिज से ठंडा पानी पी लो। जैसे ही सबको हकीकत समझ आई, डर एक ही पल में ठहाकों में बदल गया। आर्यन और रिया लकी की उस 'सौदेबाजी' पर लोट-पोट होने लगे जहाँ उसने बबलू को भूतनी के हवाले कर दिया था। लकी खिसियाकर अपना पसीना पोंछने लगा और बोला कि मैं तो बस ये देख रहा था कि तुम लोगों में कितनी हिम्मत है। रात की वो तपती उमस अब एक मीठी याद बन चुकी थी, और वो पाँचों दोस्त एक-दूसरे का हाथ थामे, हंसते-हंसाते नीचे की ओर बढ़ चले, इस विश्वास के साथ कि उनकी ये अटूट दोस्ती हर अंधेरी रात को रोशन करने का दम रखती है। नेक्स्ट।
