भरोसे की राख: एक कड़वा सच
भरोसे की राख: एक कड़वा सच
रात का सन्नाटा और कमरे का वो एक कोना, जहाँ आर्यन अक्सर अपनी खामोशी के साथ बैठता था। आज उसकी आँखों में आँसू नहीं थे, बल्कि एक ऐसा खालीपन था जो किसी गहरे धोखे के बाद आता है। तभी रिया धीरे से दरवाजे के पास आई और आर्यन के कंधे पर हाथ रखकर बोली, "आखिर कब तक यूं अपनों के दिए हुए जख़्मों को कुरेदते रहोगे?" आर्यन ने एक ठंडी सांस ली और रिया की तरफ देखकर बोला, "रिया, घाव अपनों ने दिए हैं, इसीलिए तो इतने गहरे हैं। गैरों की क्या औकात थी जो हमें रुला पाते? सच तो ये है कि हम जिससे जितना ज्यादा दिल लगाते हैं, जो हमारे दिल के सबसे करीब होता है, वही इंसान हमें सबसे ज्यादा रुलाता है। क्योंकि उसे पता होता है कि हमारी ढाल कहाँ कमजोर है और हमें दर्द कहाँ होता है।" आर्यन को आज अपने बचपन की वो एक बात शिद्दत से याद आ रही थी जो उसके पिताजी ने उसे समझाई थी। उन्होंने बहुत साफ लफ्जों में कहा था कि बेटा, जिंदगी में चाहे कुछ भी कर लेना, लेकिन कभी किसी पर अंधा विश्वास मत करना। चाहे वो तुम्हारा अपना खून हो, तुम्हारा सगा भाई हो, या कोई अजनबी। आज के इस मतलबी दौर में किसी पर रत्ती भर भी, यानी 0% भरोसा भी नहीं किया जा सकता। आर्यन ने जिंदगी की ठोकरों से ये अच्छी तरह सीख लिया था कि आजकल के रिश्ते सिर्फ सहूलियत और मतलब के मोहताज हैं। जब तक आपका वक्त अच्छा है, तब तक आपकी गर्लफ्रेंड भी आपके साथ जीने-मरने की कसमें खाएगी और अपने भी प्यार लुटाएंगे। लेकिन जैसे ही वक्त करवट लेता है, वही लोग मुँह फेरने और अजनबी बनने में एक पल का भी वक्त नहीं लगाते। रिया खामोशी से आर्यन की बातें सुन रही थी, क्योंकि वो जानती थी कि आर्यन का हर एक लफ्ज़ कोरे सच से लिपटा है। आर्यन ने अपनी बात खत्म करते हुए कहा कि मैंने अब जिंदगी जीने का एक ही उसूल बना लिया है—रिश्ते बेशक सबसे रखो, लेकिन वो इतने कमजोर रखो कि टूटने पर आवाज न आए, और उम्मीद तो किसी से भूलकर भी मत रखो। उम्मीद ही वो जहर है जो इंसान को अंदर से खोखला कर देता है। सबसे हंसकर मिलो, बात करो, लेकिन अपने सुख-दुख की चाबी कभी किसी दूसरे इंसान के हाथ में मत सौंपो। क्योंकि जिस दिन तुमने किसी पर 0% से ज्यादा भरोसा किया, समझ लेना तुमने खुद अपने ही हाथों से अपनी बर्बादी का फरमान लिख दिया है। अब इस दुनिया में अगर कोई अपना है, तो वो सिर्फ इंसान खुद है। — सुखविंदर की कलम से
