लवी का नवाबी खौफ
लवी का नवाबी खौफ
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- दोपहर की कड़कड़ाती धूप थी और बाहर लू चल रही थी। आर्यन खेत से काम करके थका-हारा अपने कमरे में आया। उसका जी कर रहा था कि बस खाट पर गिर जाए और गहरी नींद सो जाए। पर जैसे ही वो कमरे में दाखिल हुआ, उसने देखा कि उसकी खाट के ठीक बीचों-बीच लवी साहिबा अपनी पूंछ फैलाए मजे से सो रही थीं। आर्यन ने थके हुए स्वर में उसे खिसकाने की कोशिश की, तो लवी ने बस अपनी एक आँख खोली और ऐसी तिरछी नजर से देखा जैसे कह रही हो— "ऐ बेवकूफ इंसान! तुझे तमीज नहीं है? देख नहीं रहा मैं बिजी हूँ? क्यों मुझे उठा रहा है? अपनी शक्ल देख और भाग यहाँ से!" आर्यन का पारा चढ़ गया, "अरे ओ 'गधी'! पाल मैं रहा हूँ, दूध का कटोरा मैं भरता हूँ और नखरे तेरे सातवें आसमान पर? ये खाट मेरी है, उतर यहाँ से!" लवी ने एक लंबी अंगड़ाई ली, अपने नुकीले पंजे आर्यन की तरफ ताने और मानो अपनी बिल्ली वाली अंग्रेजी में फुसफुसाई— "You idiot! I am the boss here. तू तो बस मेरा नौकर है, जा मेरे लिए ठंडा दूध ला, वर्ना हुलिया बिगाड़ दूँगी!" आर्यन ने अपना सिर पकड़ लिया, "कसम से, ये बिल्ली नहीं साक्षात आफत है। दिन भर सोती रहती है और जब मैं पास आऊं तो नाखून दिखाती है। बड़ी आई नवाबजादी!" शाम को जब धूप कम हुई, तो आर्यन गली के मोड़ पर खड़ा था। वहाँ पड़ोस के एक लड़के से उसकी किसी बात पर बहस हो गई। लड़का काफी गुस्से में था और आर्यन पर झपटने ही वाला था। आर्यन का दिल धक-धक कर रहा था, पर तभी अचानक कहीं से एक 'सफेद बिजली' कड़की! वो लवी थी! जो घर में आर्यन को 'बेवकूफ-बेवकूफ' कह कर दुत्कारती थी, वो आज काली नागिन बनकर उस लड़के के सामने खड़ी थी। जैसे ही उस लड़के ने आर्यन की तरफ हाथ बढ़ाया, लवी ने एक डरावनी दहाड़ मारी और हवा में उछलकर सीधे उस लड़के के चेहरे पर अपने 'खूनी नाखून' गड़ा दिए। वो लड़का "बचाओ! शेर आ गया!" चिल्लाता हुआ अपना मुँह पकड़कर वहाँ से दुम दबाकर भागा। आर्यन हक्का-बक्का खड़ा देखता रह गया। लवी ने बड़े गर्व से अपनी मूंछें सँवारीं, आर्यन की तरफ एक 'विजेता' वाली नजर डाली और मटकते हुए घर की तरफ चल दी। घर पहुँचते ही वो फिर से खाट पर जाकर पसर गई। आर्यन जब कमरे में आया, तो लवी ने फिर वही तेवर दिखाए— "देख लिया मेरा जलवा? अब चुपचाप दूध ला, और हाँ... अब डिस्टर्ब मत करना वर्ना अगला नंबर तेरा है, बेवकूफ इंसान!" आर्यन मुस्कुरा दिया और चुपचाप दूध का कटोरा ले आया। आखिर ये 'बेवकूफ गधी' ही तो उसकी सबसे पक्की दोस्त थी। — सुखविंदर की कलम से
