STORYMIRROR

sukhwinder Singh

Drama Inspirational

4  

sukhwinder Singh

Drama Inspirational

​अंधी दौलत

​अंधी दौलत

4 mins
14

शहर के सबसे आलीशान नीदौलत की धमक: जब करोड़ों की कलालामी घर 'एम्पायर ऑक्शन' की हवा में ही पैसे की बू थी। चारों तरफ महंगे परफ्यूम, हीरे-जवाहरात और रेशमी कपड़ों की सरसराहट थी। यहाँ शहर के वो लोग जमा थे जिनके पास इतना पैसा था कि वे चाहें तो आसमान से तारे तोड़ लाएँ, लेकिन अफ़सोस, उनमें से कितनों के पास उन तारों की चमक को समझने वाली आँखें नहीं थीं। ​नीलामी शुरू हुई। एक के बाद एक बेशकीमती पुरानी चीज़ें करोड़ों में बिक रही थीं। तभी मंच पर एक पेंटिंग लाई गई। यह कोई पुरानी कलाकृति नहीं थी, बल्कि एक युवा, गरीब कलाकार की बनाई हुई तस्वीर थी। पेंटिंग में एक माँ अपने बच्चे को फटे-पुराने कपड़ों में सीने से लगाए हुए थी, लेकिन उनकी आँखों में एक अजीब सा सुकून और आशा थी। कलाकार, जिसका नाम किशन था, मंच के एक कोने में खड़ा कांप रहा था। उसकी पत्नी अस्पताल में ज़िंदगी और मौत की जंग लड़ रही थी और इस पेंटिंग की बिक्री ही उसकी आखिरी उम्मीद थी। ​बोली शुरू हुई। पाँच लाख... दस लाख... पंद्रह लाख। अचानक एक कड़क और अहंकारी आवाज़ गूंजी— "एक करोड़!" ​सबकी नज़रें उस तरफ मुड़ीं। यह साहिल सिंघानिया था, शहर का सबसे अमीर और बिगड़ैल युवा अरबपति। वह अपनी महँगी घड़ी को सहलाते हुए कुटिलता से मुस्कुरा रहा था। उसे पेंटिंग से कोई मतलब नहीं था, उसे बस अपनी दौलत की ताकत दिखानी थी। ​किशन की आँखों में आंसू आ गए। उसे लगा कि उसकी पत्नी बच जाएगी। वह मंच पर दौड़कर गया और साहिल के सामने हाथ जोड़कर खड़ा हो गया। "साहब, आपका बहुत-बहुत शुक्रिया! आपने मेरी पत्नी की जान बचा ली। यह पेंटिंग अब आपकी है।" ​साहिल अपनी कुर्सी से उठा और किशन के पास गया। उसने किशन को ऊपर से नीचे तक देखा, जैसे वह कोई कचरा हो। फिर उसने जेब से चेकबुक निकाली और एक करोड़ का चेक लिखकर किशन के मुंह पर दे मारा। "पेंटिंग मेरी है, ठीक है। लेकिन मुझे यह कूड़ा अपने घर नहीं ले जाना।" ​साहिल ने पेंटिंग उठाई और सबके सामने उसे ज़मीन पर पटक दिया। फिर उसने अपने जूतों से उस माँ और बच्चे के चेहरे को कुचलना शुरू कर दिया। "मुझे बस यह दिखाना था कि मैं एक करोड़ रुपये को इस तरह बर्बाद कर सकता हूँ। मेरे पास इतना पैसा है कि मैं तुम्हारी कला, तुम्हारी उम्मीदों और तुम्हें भी खरीद कर बर्बाद कर सकता हूँ!" ​किशन सन्न रह गया। उसकी उम्मीदें, उसकी कला, उसकी पत्नी की जान... सब कुछ साहिल के जूतों के नीचे कुचला जा रहा था। पूरा हॉल खामोश था। अमीर लोग तमाशा देख रहे थे, कुछ मुस्कुरा रहे थे। उनके पास पैसा था, पर सही इस्तेमाल करने की अकल नहीं थी। ​तभी, भीड़ को चीरते हुए एक शांत लेकिन खौफनाक आवाज़ आई— "रुको।" ​यह आर्यन था। उसकी आँखों में आग थी, लेकिन उसका चेहरा बर्फ की तरह ठंडा था। वह धीरे-धीरे मंच की तरफ बढ़ा। उसके पीछे-पीछे रिया भी आ रही थी, उसकी आँखों में गुस्सा और गहरी करुणा थी। ​आर्यन साहिल के सामने आकर खड़ा हो गया। साहिल ने उसे घूरकर देखा। "तू कौन है बे? मेरी महफिल में फटेहाल मसीहा बनने आया है?" ​आर्यन ने कुछ नहीं कहा। वह बस नीचे झुका और उसने उस कुचली हुई पेंटिंग को उठाया। उसने माँ और बच्चे के चेहरे से धूल साफ़ की। फिर उसने किशन की तरफ देखा, जिसकी आँखों में अब डर की जगह थोड़ी उम्मीद थी। ​आर्यन ने साहिल की तरफ मुड़कर कहा, "तुम्हारे पास एक करोड़ रुपये हैं, साहिल। लेकिन तुम्हारे पास वो आँखें नहीं हैं जो इस पेंटिंग में छुपे प्यार को देख सकें। तुम्हारे पास वो दिल नहीं है जो इस कलाकार की मजबूरी को समझ सके। दौलत ने तुम्हें अंधा नहीं, अपाहिज बना दिया है।" ​"मेरी हैसियत!" साहिल चिल्लाया और उसने आर्यन का कॉलर पकड़ने के लिए हाथ बढ़ाया। ​लेकिन आर्यन ने पलक झपकते ही साहिल का हाथ मरोड़ कर उसे उसी कुचली हुई पेंटिंग पर घुटनों के बल ला दिया। पूरा हॉल सन्न रह गया। साहिल दर्द से कराह रहा था। ​रिया ने आगे बढ़कर साहिल की आँखों में देखते हुए कहा, "साहिल, पैसा कमाना आसान है, लेकिन इंसानियत कमाना बहुत मुश्किल। तुमने इस कलाकार की मजबूरी को खरीदने की कोशिश की, लेकिन याद रखना... ज़मीर बाज़ार में नहीं बिकता। तुमने पेंटिंग को कुचला है, लेकिन आर्यन ने तुम्हें आज इस पूरे शहर के सामने कुचल दिया है।" ​आर्यन ने साहिल को छोड़ दिया। साहिल बेइज्जती से कांप रहा था। आर्यन ने अपनी जेब से एक चेक निकाला और किशन को दे दिया। "यह मेरी तरफ से है। तुम्हारी पेंटिंग मैं खरीद रहा हूँ, और इसे मैं उस अस्पताल में लगाऊँगा जहाँ तुम्हारी पत्नी का इलाज हो रहा है।" ​किशन आर्यन के गले लगकर फूट-फूट कर रोने लगा। रिया ने उसकी आँखों में आंसू पोंछे। साहिल वहां से बेइज्जत होकर भाग गया। लेकिन जाते-जाते, उसकी आँखों में नफरत और इंतकाम की आग साफ दिख रही थी। ​भीड़ अब आर्यन और रिया की तरफ देख रही थी, कुछ सम्मान से, कुछ ईर्ष्या से। वे समझ गए थे कि दौलत भले ही साहिल के पास हो, लेकिन असल ताकत आर्यन और रिया के पास थी—इंसानियत और सच्चाई की ताकत। ​नेक्स्ट


Rate this content
Log in

Similar hindi story from Drama