STORYMIRROR

Kalpesh Patel

Comedy

4.5  

Kalpesh Patel

Comedy

"जूते वाला शायर"

"जूते वाला शायर"

2 mins
53

 "जूते वाला शायर"

एक शाम की बात है…
जहाँ महफ़िल जमी थी शायरी की…
लोग जिगर लेकर नहीं, जूते कसकर आते थे,
और जाते समय अक्सर इज़्ज़त और जूते बेबाक छोड़ जाते थे।

अब हमारे नायक, श्री पिंटू शर्मा —
शायरी की दुनिया में एक अविश्वसनीय सुपरस्टार।
उन्हें लगता था, ग़ालिब तो सिर्फ "इंट्रो" थे…
असल "मेगा एपिसोड" तो वो खुद हैं।

उस दिन, एक अल्ट्रा-लिटरेरी-प्रीमियम महफ़िल में पहुंचे —
बाल संवारकर, शेर तराशकर, और EMI पर ब्रांड न्यू जूते पहनकर।

पहला शेर दागा:

"दिल से दिल की राह निकली नहीं,
शायद श्रोताजन के दिमाग का GPS में नेटवर्क नहीं…मिल रहाथा "

तालियाँ नहीं बजीं।
सामने वाले ने अचानक छींक मारी।
पिंटू जी ने इसे ही अपनी वाहवाही मान लिया। सेल्फ गोल हो चूका था , और क्या ?
हौसला बढ़ा।

दूसरा शेर मारा:

"तेरी आँखों की नमी बता रही है,
कि मच्छर काट के चला गया है।"

अब तो लोगों ने कान पकड़ लिए…मानने
और दादी जीने  फटी पुराणी चप्पल उतार ली।

और स्टेज की और घा करदी , दादी को देख दूसरी दो चार छूट  मुत  जूतों की बारिस चालू हो चुकी थी।


लेकिन अपने पिंटू जी, शेर जो थे ,बेखौफ, ऐसे वैसे हार थोडी मानने वाले थे ?
हथियार डालने के बजाय, तीसरा शेर जोश के साथ झोंक दिया:

"महफ़िल में हमारे जूते खो गए,
तो हम घर कैसे जाएंगे?"

पीछे से आवाज़ आई:

"आप शायरी तो पूरी कीजिए,
इतने जूते पड़ेंगे कि गिन नहीं पाएंगे!"

पूरा हॉल गूंज उठा हँसी से…
पिंटू जी ने, अब इनके  चमचमाते, EMI वाले जूतों की चिंता छोड़ दी…
बस मुस्कुरा दिए।

श्यारी का दौर यु ही चलता रहा .  

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती…
महफ़िल के बाद पिंटू जी अपने नए जूते खोजने निकले।
मगर वहाँ सिर्फअब दो  जूते पड़े थे, दोनों ही लेफ्ट वाले थे ।
(कोई जूते चोरी कर गया और बदले में चाय के कप में आधा चबाया हुआ  गुलाबजामुन छोड़ गया था ।)

अब पिंटू जी ने हार तो हरगिज नहि मानी , लेकिन ये फैसला जरूर किया कि अगली बार…
वो शोमे नंगे पैर ही आएंगे।
और महफ़िल में  बैनर लटकाएँगे :

"शायरी सुनने से पहले जूते टिकट बारी पे जमा कर लीजिए , वापस शो खतम होने पे गुलाब जैबुन के साथ वापिस मिलेंगे!"

बैनर देख लोगो ने शोर मचाया. 

जब किसी ने पूछा:

"शर्माजी इतनी हूटिंग सुनकर दुख नहीं होता?"

तो पिंटू जी मुस्कुराए:

"शायर हूँ जनाब, दर्द में ही तो मज़ा है…"
"बस जूते की साइज नंबर ९  होनी चाहिए , बाकी सब चलता  रहेगा !" 😜🤣

अंत भला तो जूते भले!

---

अब शर्माजीके शो में  स्जेज भी खाली  , और टिकिट बारीपे  गुलाब जाबुनभी खाली .  😜🤣


Rate this content
Log in

Similar hindi story from Comedy