जिंदगी की कहानी
जिंदगी की कहानी
जिंदगी का हर मोड़ ऐसा आया कभी सोचा भी ना था। अपना मानकर साथ निभाने का वादा किया था कभी वह कुछ महीने में बेगाना हो गया। घर में तो जगह मिली पर दिलों में जगह ना कर पाई। कोशिशें...... कोशिशें तो बहुत की सबका दिल जीतने की सबको अपना मान खुश रखने की पर बस सबको मुझ में कमी ही नज़र आई।
एक पगली लड़की सी मुस्कान के साथ घर प्रवेश करने चली थी सास की डांट तो घर की चोखट भी पार नहीं की थी और बक्षित में मिल गई थी। नई नवेली दुल्हन ने मजाक समझ ताल डाला दुल्हन ने सोचा अपने प्यार से सबको अपना बना देगी पर ऐसा कुछ नहीं हुआ।
घर में सबके होते वो खुद को अकेला और तन्हा महेसुस करने लगी जिसके साथ कदम से कदम मिलाकर चलने का वादा किया था वो अपने फ्रेंड्स और मोबाइल की दुनिया में मशगुल रहेने लगे एक छत के नीचे होते भी दो अजनबी के जैसे रहने लगें। ना बातचीत कुछ नहीं बाहर गुमकर मोबाइल में आधी रात तक घुसे रहने लगे। वो नई दुल्हन को अपने पार्टनर के साथ थोड़ा टाइम बिताना था थोड़ी हसी मस्ती बहुत सारे अरमानों बस आंसू की धारा में बह रहे थे।
वो अपने दिल की बात किसे कहती उसके पास न कोई साथी था ना कोई सखी बस अंदर ही अंदर घुटन महसूस कर रही थी। वो पूरी रात करवटें बदलती रहती थी वो अपने दिल की बात मायके वालों को कहके परेशान या चिंता में नहीं डालना चाहती थी।
दुल्हन के शादी के चार महीने बीत गए लेकिन उसकी परेशानी का अंत नहीं आया। छोटी छोटी बातों में तू तू मैं मैं होने लगी थी। धीरे धीरे दोनों ने एक दूजे से बातचीत करना बन कर लिया था। कभी दुल्हन बात करती पर वो मुंह बिगाड़ कर गुस्से में जवाब दिया करता और कभी लाख पूछने पर भी कुछ नहीं बोलता था।
उसके पार्टनर ने तो पहले दिन से कह दिया था की मेरे से कोई उम्मीद मत रखना पर वो पगली सी लड़की ने मजाक समझ कर टाल दिया था। हर ख्वाब बस ख्वाब बन कर रह गया था। उसकी जिंदगी घर के काम और चार दिवालों में कैद सी हो गई है। जिंदा थी पर जिंदगी जीना भूल गई होठों पे जूठी मुस्कान सजाई फिर रही है।
दिमाग में बहुत सारे सवालों और बहुत चिंता थी लेकिन कुछ नही कर सकती थी वो g
मायके से कभी अकेली घर से बाहर निकली ही नहीं थी बाहर की दुनिया कैसी होती है दुनिया के लोग कैसे होते हैं कुछ भी नही पता था। उसने सोचा सब उसके जैसे सीधे सादे भोले भाले होगे। बस उसे धन दौलत या बड़े बड़े बंगले नहीं चाहीए थे बस उसे तो अपने लाइफ पार्टनर का साथ प्यार और सम्मान भरे बोल चाहिए थे जिसके कंधे पर सर रखकर अपने दिल की सारी बात कर सकते ऐसा अपने पार्टनर में एक दोस्त की तलाश थी।
छोटी से छोटी बात अपने दिल की उनके साथ बाटना चाहती थी हाथों में हाथ थामे दुनिया फिरना चाहती थी। होठों पर हसी सजाए हर लम्हें को यादगार बनाना चाहती थी। अपने ससुराल में अपना होने एहसास चाहती थी। प्यार के रंगों से रंगना चाहती थी। सासु को अपनी सखी सहेली बनाकर हर बात कहना चाहती थी मा की तरह वो हर वार त्यौहार में सजाती थी बहु नहीं बेटी बन रिश्ता निभाती रहती थी। कभी सास छोड़ मां बन कर एक बार सर पर हाथ रखकर बेटी कहके पुकार देते ए भी तो कमी होती हैं।
पापा पापा कहके फिरती हूं ससुर से बहुत प्यार अपनापन मिटा है मां की तरह दुलाल मिला है । पापा कैसे होते हैं नहीं पता था पर ससुर के रूप में पापा मिल गए थे लेकिन हर बात पर अपने बेटे का ही पक्ष लेते थे ए कमी खनकती रहती थी। कभी बेटी मान कर अपने बेटे को समझा लेते तो आज ए दिन नहीं आता कभी वक्त का एहसास बेटे को करा देते, आधी रात को आने वाले बेटे को समय का मूल्य समझाया होता। कभी तो बहु को बेटी बनाकर रखा होता।
खिल खिलाती हसी की कुंज के साथ घर आई थी करोड़ों अरमानों को अपने जहन में बसाया था। अपने पार्टनर के साथ बहुत सारी बातें बहुत अच्छी यादें कभी रूठेगे को कभी मनाएंगे कभी छोटी सी छोटी बातों को समझेंगे कभी समझ ना आए तो साथ बैठकर प्यार से समझाएंगे ए सारी कमी जीवन में होती है।
बस इतना ही कहना चाहती हू बस एक औरत को अपने पार्टनर का प्यार चाहिए होता है। सुख दुःख का साथ की खोज होती हैं। प्यार दोगे उसे तो जान लुटाएगी हमारा कहकर संबोधोगें तो अपना समझकर हर वक्त को बेस्ट बनाएगी। पार्टनर में कभी तेरा मेरा नही होना चाहिए जो है हमारा है ऐसा मान चलोगे तो खुशियां ही खुशियां होगी और जीने का मजा आयेगा।
