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Priyanka Gupta

Inspirational

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Priyanka Gupta

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जिंदादिल डे -3 सनशाइन

जिंदादिल डे -3 सनशाइन

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मेजर सिया अपने गांव में छुट्टियां बिताने आई हुई थीं। सिया हमेशा खुश रहने वाली एक जिंदादिल लड़की थी । उनकी यूनिट में तो उन्हें लोग सनशाइन गर्ल कहते थे । सिया सकारात्मकता से ओतप्रोत लड़की थी । वह हर व्यक्ति और स्थिति में सकारात्मकता ही देखती थी ।सिया जब आर्मी एग्जाम की तैयारी कर रही थी ;तब उसका एक्सीडेंट हो गया और पैर में फ्रैक्चर हो गया था । डॉक्टर ने प्लास्टर कर दिया था और सिया को कुछ दिन के लिए आराम करने की हिदायत दे दी गयी थी । 

"अच्छा ही हुआ ;अब पूरा समय अच्छे से पढ़ पाऊंगी । अगर पैर ठीक होता तो पढ़ाई छोड़कर इधर -उधर भी भवंडी मारने जा सकती थी ।",बिस्तर पर पड़ी हुई सिया मुस्कुराते हुए सबसे यही कहती थी । 

अपने करीबी व्यक्तियों के गुणों को पहचानती थी और जब तब उनकी प्रशंसा करती रहती थी । मेजर सिया को ग्राम पंचायत द्वारा "स्वतंत्रता दिवस समारोह" में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया । जब वह समारोह समाप्ति के बाद अपने घर लौट रही थी, तो उसने सरपंचजी को एक तरफ जीप रोकने के लिए कहा।वहाँ पास में ही खेतों में मजदूर लोग काम कर रहे थे । 

मेजर सिया ने खेत में जाकर ,वहाँ काम कर रहे मजदूरों को सलाम किया। मेजर सिया के इस व्यवहार को देखकर सरपंचजी आश्चर्य चकित रह गए।

"सिया बेटा ,आप लोग तो देश के रक्षक हो । आपको हम सब को सलाम ठोकना चाहिए । आप कहाँ इन मजदूरों को सलाम करने चली गयी थी । ",सरपंचजी ने सिया को कहा । 

सिया ने सरपंचजी को समझाते हुए कहा , "आप ठीक कह रहे हो । हम सैनिक हमारे तिरंगे के केसरिया रंग का प्रतिनिधित्व करतेहैं;हम अपने शौर्य और बहादुरी से देश की रक्षा करते हैं । हमारी तरह ये मजदूर हमारे तिरंगे के हरे रंग का प्रतिनिधित्व करते हैं। वे हमारे देश की समृद्धि के वाहक हैं। बुद्धिजीवी, शोधकर्ता आदि हमारे तिरंगे के सफेद रंग का प्रतिनिधित्व करते हैं। जिस प्रकार तीन विविध रंगों से हमारा तिरंगा बनता है , उसी प्रकार हर भारतीय हमारे भारत के निर्माण में अपना -अपना योगदान देता है। हर भारतीय के प्रयास को पहचाना जाना चाहिए और उसके प्रयासों सम्मान किया जाना चाहिए।"

सिया की बात सुनकर सरपंचजी के हाथ भी खुद बा खुद मजदूरों की सलामी में उठ गए थे । सिया की बातों से आह्लादित मजदूरों ने भी अपने हाथ सलामी में उठा दिए थे । आज मजदूरों को भी अपने कार्य पर गर्व हो उठा था । सिया ने उन्हें भी स्वयं पर फख्र करना सिखा दिया था । 


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