झिलमिलाती जगमगाती शाम
झिलमिलाती जगमगाती शाम
जिंदगी में बहुत से झिलमिलाते पल आते है जो जिंदगी को झिलमिलाती जगमगाती शाम सुनहरी यादों में जुड़ जाती है जुड़कर के प्यारी याद बन जाती है। ऐसा हमारे साथ हूवा। बहुत दिनों से घर में भेदी गतिविधियां चल रही थी। कभी बिटिया बोलती मेरे क्लास से मैं जा रही हूं। कभी बेटा बोलता अभी मेरी क्लास है, मैं जा रहा हूं।
फोन पर यह लोग धीरे-धीरे बात करते ,पता नहीं किस से बात करते रहते हैं।
मुझे लग रहा था कि कुछ खिचड़ी पक रही है। पर समझ में कुछ नहीं आ रहा था। कि क्या हो रहा है। क्योंकि मेरे बच्चे कभी मेरे से बिना बोले कहीं नहीं जाते।
इसलिए मन में कोई भी शंका और ऐसा कुछ नहीं था ,कि यह कुछ गलत करने वाले हैं।
इसलिए मैंने भी इतना ध्यान नहीं दिया।
ऐसे करके 25 जून आ गई। उस दिन सुबह बच्चों ने हमें दिन के शो के दो टिकट पकड़ा दिए और बोले पापा मम्मी आप कभी पिक्चर देखने नहीं जाते हो, आज पिक्चर देखकर आओ।
हमने कहा हम दिन के शो में पिक्चर देखने नहीं जाएंगे। पर वह लोग नहीं माने तो, बच्चों को खुश रखने के लिए हम को पिक्चर देखने जाना पड़ा। पिक्चर देख करके हम अपने कंस्ट्रक्शन साइड में चले गए, हमारा मकान बन रहा था तो वहां चले गए। शाम को 6/07 बजे होगी।
मैंने बोला खाने के लिए लेट हो रहा है, तो फोन कर देती हूं। बोलते हैं तो खाना पार्सल करवाते हुए ले जाते हैं।
मगर बच्चों ने मना कर दिया। बोले आप जल्दी से घर आ जाओ ,अपन साथ में मिलकर खाएंगे।
हमने सोचा ठीक है बच्चे घर पर हैं ,तो बनाया होगा कुछ।
और हम लोग घर गए, वहां जाकर देखा बहुत सारी गाड़ियां बाहर खड़ी थी। और आवाजें आ रही थी।बहुत
ज्यादा लोगों कीहसने की
हम एकदम सकते में आ गए।
यह क्या हुआ इतने लोग क्यों आए हैं। फिर सोचा अब इतने लोग आए हैं, सब लोग आए हैं, तो क्या बात है। कोई बात नहीं सब मिलने आए हैं, तो खाना बाहर से ऑर्डर कर देते हैं।
हम लोग घर में गए जाकर देखा, सब लोग हमको मिले और जोर जोर से गाना गाने लगे।
शादी की 25वीं सालगिरह की मुबारकबाद देने लगे। हम एकदम से बहुत खुश हुए। इन्होंने हमको सर प्राइस दिया है बच्चों ने। हम ने बच्चों को अंदर ले जाकर बोला, अब इतने लोग आए हैं तो घर में ना नाश्ता है, ना खाना इतने लोगों का , तो चलो बाहर से ऑर्डर कर देते हैं।
तो वह दोनों जने जोर जोर से हंसने लगे। बोले आप लोग तैयार हो जाओ।
मेरे लिए एक नई साड़ी लेकर आये थे। मैं वह पहन कर के तैयार हो गई और किसी काम से मैं अंदर रूम में गई, और फिर स्टोर में गई तो देखा, वहां बहुत सारा खाना बना हुआ था। और कैटरिंग का सामान प्लेट्स वगैरह सब रखी हुई थी।
। मैं तो एकदम शॉक रह गई। इतनी तैयारी ,कब करी होगी, फिर सब ने बताया कि इन बच्चों ने ही हमको आमंत्रण दिया था। और बोला था मम्मी पापा को मत बताना।
और आपको यह 25 मी शादी की सालगिरह की सरप्राइज पार्टी प्लान करीउन्होंने,
उनके साथ में हमारे एक मित्र भी थे डॉ मेहता साहब और उनके वाइफ उन्होंने भी उनके साथ में। बहुत मदद करी ,और वह सारा खाना इन लोगों ने घर पर तैयार करा था। करीब 40, 50 जने हो गए थे उनका खाना बच्चों ने घर पर बनाया। और सारा अपने पास में जमा किए हुए पैसे से काम किया, और सब को खिलाया बहुत अच्छा खाना था।
वह हम लोगों के लिए एक बहुत बड़ा यादगार लम्हा था। जिसको हम जिंदगी में कभी भूल नहीं सकते हैं। वह एक यादगार पल जो बच्चों ने हमारे लिए यादगार बनाया।
और हम अपने आप को इतना खुशनसीब मानते हैं, कि बच्चे हमारी इतनी चिंता करते हैं।
और उन्होंने हमारे लिए यह पल यादगार बनाया। यह पल हमेशा हमें याद आएंगे और याद आते हैं।
