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जब बेटी सुरक्षित रहेगी

जब बेटी सुरक्षित रहेगी

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आज कल के हालत इतने ख़राब हो गये है, कि समझ में ही नहीं आता, कि अख़बार देखें या ना देखें ! हर दिन हमारी बेटियों और बहनों के साथ बुरा ही हो रहा है , आख़िर इतनी हैवानियत हमारे समाज में कहाँ से आ गई है, जो औरों की बहन और बेटियों की परवाह नहीं करते है! आख़िर समाज में नारियों को भी तो जीने का अधिकार है, आख़िर क्यों महिलाएं डर कर रह रही है, क्यों माँ अपनी बेटी को अकेले घर से बाहर नहीं जाने दे सकती? क्यों जब एक बेटी सुबह घर से ऑफ़िस के लिए निकले तो घर वाले पूरा दिन डर कर रहते है, क्योंकि उनमें एक डर रहता है, कि कहीं उनकी बेटी के साथ कुछ ग़लत हो ना जाए, इसलिए जब तक उनकी बेटी शाम तक वापस घर नहीं आ जाती, तब तक उनका मन अशांत सा रहता है !

आख़िर क्यों ? क्या इस सवाल का जवाब हमारे समाज के पास नहीं है, आख़िर कब तक हमें रोज़ अखबारों, टेलीविज़न, और सोशल मीडिया पर महिलाओ के साथ हो रहे ज़ुल्म और बलात्कार की ख़बरें पढ़ने और देखने को मिलेंगी, कब तक हमारी महिलाओं को इस डर के साथ रहना पड़ेगा, कि कहीं कभी उनके साथ कुछ इस तरह की बात ना हो जाये! समझ में नहीं आता, क्यों हमारी सरकार इस गंभीर मुद्दे को लेकर अब तक ख़ामोश है ! क्यों कोई ऐसा क़ानून लागू नहीं करती, जिससे कोई पुरुष किसी महिला के साथ दुष्कर्म करने से पहले दस बार सोचें, और उसकी रूह कांप जाए कुछ ग़लत करने से पहले, आख़िर कब तक महिलाओं का शोषण होता रहेगा !

कुछ समय पहले ही मैंने अभी पढ़ा था, कि किसी ने 3 माह की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया था, अगर सोचा जाये तो क्या होती है, ३ माह की बच्ची, जिसे अभी इस दुनिया के बारे में भी कुछ भी नहीं पता, यहाँ तक उसे अभी यह भी मालूम नहीं होता है, कि कौन उसकी माँ है, और कौन उसका पिता ! कोई कैसे इतना निर्दय हो सकता है, कि उसे बच्ची के रोने पर भी तरस तक नहीं आया, क्या वह इंसान इतना हैवान था, कि उसे अपनी हैवनियत के सिवाए कुछ और नज़र नहीं आया!

शर्म आती है, जब भारत जैसे विशाल देश में हमारी महिलाएं और छोटी बच्चियाँ सुरक्षित नहीं है ! आख़िर क्यों महिलाओं को खुलकर साँस लेने में डर लग रहा है ! जहाँ एक तरफ़ तो हमारी सरकार " बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ" का नारा लगाती है, वही दूसरी तरफ़ हमारी बेटियाँ शोषण का शिकार हो रही है, तो क्या लगता है कब तक बेटियाँ बचेगी ! क्योंकि जो आज कल के हालात है, उसे तो रोज़ ही ना जानें कितनी बच्चियों और महिलाओं के साथ शोषण हो रहा है, हम तो उतना ही जान पा रहे है, जितना हमें अख़बार और टेलीविज़न वाले दिखा रहे है, कुछ ज़ुल्म तो शायद खामोशियों में ही दम तोड़ जाते होंगे !

मेरा मानना तो यही है, कि सरकार बेटियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी ले, और जो कोई हमारी बेटियों के साथ कुछ ग़लत करे, उसे सीधा फाँसी दे, या उसी समय उस अपराधी को कोई सज़ा सुना दे, ताकि आगे से कोई भी किसी महिला की आबरू के साथ खेलने से पहले हज़ार बार सोचें, कि उसका नतीज़ा क्या होगा ! इसलिए जरुरी है की सरकार एक और नारा लगाएजब बेटी सुरक्षित रहेगी , तभी तो पढ़ेगी बेटी....


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