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अमूल्य वस्तु

अमूल्य वस्तु

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राजप्रासाद बहुत ही लालची आदमी था, हर चीज पर उसकी नजर चील की तरह रहती थी ! राजप्रासाद के बड़े बेटे राहुल की शादी पूजा से हुई थी , पूजा बहुत ही संस्कारी लड़की थी , कभी किसी के आगे एक शब्द भी ऊंची आवाज में नहीं बोलती थी ! पर राजप्रासाद तो राजप्रासाद ही था , वह अपनी आदतों से बज नहीं आया , या यूं कहिये , कि वह इतना लालची था कि बहू के घर से उसके पिता ने जो भी सामना अपनी बेटी के लिये भेजा था । वह उसने सब छिपकर रख लिया था । अपनी बहू को उसने कुछ भी देना जरूर नही समझ । बहू बेचारी क्या कहती , या कहती भी तो क्या कहती , वह सिर्फ खामोश रही और चुपचाप अपनी नए रिश्तों में व्यस्त हो गई , क्योंकि उसको पता था , कि नए रिश्तों में शांत रहना ही ठीक रहेगा ! समय चलता रहा और कुछ समय बाद राजप्रासाद की बेटी की भी शादी होने वाली थी , वह खूब जोर शोर से तैयारियों में लग गया । वह हर एक चीज महंगी से महंगी ले रहा था , ताकि कोई कमी न रहे जाये। इसलिए उसने अपनी बेटी को देने के लिए हर एक चीज को बहुत अच्छे संजोग कर रखा था , ताकि शादी के बाद उसकी बेटी को किसी भी वस्तु की कमी ना हो। कुछ समय बाद राजप्रासाद की बेटी की शादी खूब धूम - धाम से हुई । और राजप्रासाद ने अपनी बेटी के साथ वह सारी वस्तुए दी, जो उसके अरमान थे, अपनी बेटी को देने के लिए , ताकि उसकी बेटी देखकर बहुत खुश हो। पर वह हो न सका , और उसकी बेटी के ससुराल वालों ने उसकी बेटी को उसके घर से आया एक भी समान देना तो दूर दिखाया तक नहीं। आज राजप्रासाद की बेटी की भी वही हाल है, जो कुछ समय पहले उसकी भाभी का था ।







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