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H.D kumhar

Inspirational Children

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H.D kumhar

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जैसी सोच वैसे आप

जैसी सोच वैसे आप

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सारांश आठवी कक्षा में पढ़ता था। स्कूल से आते ही वो अपने दादा के पास बगीचे में जाता है। दादा बगीचे में बैठे थे। दादा के पास जाते ही सारांश कहता है, “दादाजी आपको पता है टीचरने आज हमें होमवर्क में एक निबंध लिखने दिया है। दादाने पूछा, “वो क्या है?” सारांश्ने जवाब दिया, “ निबंध का विषय है ‘क्या होता है गरीब’ है। दादाजी गरीब इंसान कैसा होता है?” न समझते हुए हुए सारांशने पूछ लिया।

दादाजी सारांश की ओर मुस्कुराए और बोले, “अगर गरीब की परिभाषा को समझे तो गरीब वो होता है जिनके पास खाने को खाना, रहने को घर और पहनने को कपडा न हो। पर आज की परिभाषा बदल सी गई है। आज के युग की बात करें तो मेरे पास तीस रुपया है और तुम्हारे पास पचास है तो तुम पैसेवाले हुए। मैं तुम्हारी बराबरी नहीं कर सकता इसलिए लोग इन्हे गरीब समझते है।

लिखते हुए सारांश रुक जाता है। “लेकिन दादाजी लोग ऐसा क्यों सोचते है? और आपमें और मुझ में ज्यादा अंतर भी तो नहीं है!”  

दादाने सारांश की पीठ पर हाथ घुमाते हुए बोला, “तुम इतना तो जानते ही हो कि गरीब और अमीर दोनो इंसान ही है और दोनो के पास दिमाग है मगर उन दोनो की सोच में भी बहुत अंतर होता है। इंसान जो कुछ भी बनता है वो सोच की वजह से ही बनता है। अमीर सोचता है मुझे इससे भी ज्यादा पैसे कमाने है। मुझे कुछ बड़ा करना होगा तभी मैं पचास से पांचसो तक पहुंच पाउंगा। मुझे अपने गोल तक पहुंचना है। बात कि जाए गरीब की तो उनकी सोच साधारण सी होती है। उनका कोई गोल नहीं होता। पैसे को इंवेस्ट करने से डरता है। वह जितना कमात है, उसी में ही संतोष पा लेता है। ”

“मतलब गरीब इंसान चाहे तो अमीर बन सकता है!” सारांशने दादाजी की ओर देखकर कहा। “बिल्कुल बन सकता है मगर वो कुछ बडा करना ही नहीं चाहता। कोई भी इंसान मनसे गरीब नहीं होता, हा उनका जन्म गरीब परिवार में हुआ हो मगर वो भी चाहे तो अमीर बन सकता है। ”

“लेकिन दादाजी अमीर इंसान बनते कैसे है?” सारांश ने किताब में लिखते हुए पूछ लिया। दादाजी सारांश की ओर मुस्कुराए और बोले, “क्या तुम्हे भी अमीर बनना है?”

सारांशने हंसते हुए कहा, “हा दादाजी मैं पढ़-लिखकर बहुत बडा आदमी बनना चाहता हूँ। बडा आदमी बनकर खूब पैसे कमाउंगा और अमीर बनुंगा। ”

दादाजी ने कहा, “तुम्हारी तरह हर कोई अमीर बनना चाहता है। कोई ऐसा नहीं कहेंगा कि मुझे गरीब बनना है। अमीर बनने के लिए पहले अपनी सोच बदलनी चाहिए। आप गरीबी जैसी सोच रखेंगे तो गरीब बनेगे और अमीरी जैसी सोच रखेगे तो अमीर बनेगे। ”

दादाजी की बात खत्म होते ही सारांश खडा होकर कहता है, “दादाजी मैं समझ गया, हमें अपनी सोच बदलनी चाहिए तभी तो हम बडा कर पाएंगे। ” दादाजी सारांश की ओर मुस्कुराते है।


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