डर को हराकर जीत जाओ
डर को हराकर जीत जाओ
यह एक ऐसे छात्र की कहानी है जो हमेशा डरता रहता है। वह बाकी बच्चों की तरह नहीं है। सब लोग उनका मजाक उड़ाते है। उनकी सोक को टीचर बदल देते है और वह हमेशा के लिए डर को भूल जाता हे।
7बज चुकें थे, नवीं कक्षा में पढ़ता लिओन स्कूल के लिए निकल जाता है। पीछे से उनकी माँ आवाज देती है लेकिन वह नहीं सुनता। “लिओन रुको तुम अकेले मत जाओ! मैं तुम्हारे साथ आती हूँ। ” दरवाजे के पास पहुंची रमिला वापस कमरे में चली जाती है।
लिओन स्कूल गेट के पास पहुंचता है तब तीन लड़के उसे चिढ़ाते हुए वहां से गुजरते है।
“देखो, डरपोक लिओन आ गया। ”
“आज तुम अकेले ही आ गए। ” वह हंसता है।
“तुम्हारी मम्मी तुम्हें छोड़ने नहीं आई?”
एक छात्र का ध्यान सामने की ओर जाता है। “देखो, वो रही उनकी मम्मी। तुम डरपोक हो इसलिए तुम्हारी मम्मी तुम्हें छोडने आती है। ”
“तुम इतने बडे हो फिर भी अकेले नहीं आ सकते। ” वे हंसते हुए चले जाते है। लिओन उसे देखता रहता है लेकिन कुछ बोल नहीं पाता। रमिला जल्दी से उनके पास पहुंची। “लिओन तुम अकेले क्यों आ गए? मैंने तुम्हें कितनी बार कहा है तुम इस तरह अकेले मत आओ। ”
“आप मेरे साथ आती फिर भी क्या होता! क्या मैं अकेला नहीं आ सकता? आप हमेशा मेरे आगे पीछे क्यों घूमती रहती हो?” लिओन कांपती हुई आवाज में बोला।
“मैं तुम्हें अकेला नहीं छोड़ सकती क्योंकि मुझे पता है सभी बच्चे तुम्हें चिढ़ाते है। तुम्हारी रक्षा के लिए मुझे आना पड़ता है। ”
“आपकी वजह से सभी मुझे चिढ़ाते है। कहते है तुम इतने बड़े होकर भी अकेले नहीं आ सकते! वे मुझे डरपोक कहकर पुकारते है। आपकी वजह से आज मेरा कोई दोस्त नहीं है। ”
रमिला गुस्सेल औरत थी। अगर उनके सामने कोई तेज आवाज में बोले तो वह गुस्सा हो जाती। वह अभिमानी और गुस्सेल औरत थी। लिओन जब तेज आवाज में बोला तो उन से रहा नहीं गया। “तुम कमजोर हो इसलिए तुम्हारे दोस्त नहीं है! तुम बाकी बच्चो की तरह क्यों नहीं हो! सभी इंसान ही है फिर भी तुम सब से डरते रहते हो। ”
तभी स्कूल की घंटी बजती है। “मम्मी मुझे नहीं पढ़ना। मुझे अपने साथ घर ले जाओ। ”
“तुम नवी कक्षा में पढ़ते हो फिर भी छोटे बच्चे जैसा व्यवहार क्यों करते हो? जाओ तुम्हारी क्लास शुरु हो जाएंगी। ”
लिओन को ना चाहते हुए भी स्कूल के अंदर जाना पड़ता है। वह क्लास में जाकर लास्ट बेंच पर बैठ जाता है। उनका शरीर न जाने क्यों कांप रहा था। सभी छात्र उन्हें देख हंस रहे थे। उनकी बाते उन्हें ओर डरा रही थी।
टीचर क्लास में आते है। सभी बच्चे उन्हें प्रणाम करते है। उसके बाद वह पढ़ाना शुरु करती है। पढ़ाते वक्त उनका ध्यान लिओन पर जाता है। लिओन उनके सामने बैठा तो था लेकिन उन्हें देख लग रहा था कि वह कोई सोच में डूबा हुआ है। जब वह प्रश्न पूछ्ना शुरु करती है तब सभी बच्चे जवाब देते है लेकिन जब लिओन की बारी आती है तो वह कुछ बोल ही नहीं पाता। उन्हें ऐसा करते देख बाकी बच्चे हंसते है। अपना मजाक होते देख वह ओर भी डर जाता है और बिना कुछ बोले क्लास के बाहिर निकल जाता है।
दूसरे दीन वह अपनी माँ के साथ टीचर की केबीन में बैठा था। टीचर रमिला को समझा रही थी कि लिओन ऐसा क्यों है। वह बाकी बच्चे की तरह क्यों नहीं है।
“बताए न टीचर लिओन क्यों डरता रहता है? इतना बडा होकर भी वह छोटे बच्चे की तरह डरता है। इस तरह व्यवहार करेगा तो हर कोई उसे डरपोक ही बोलेगा। ”
“पहले तो आप उन्हें डरपोक बोलना बंद किजिए। लिओन आपकी वजह से ऐसा बन गया है। लिओन के बचपन से आप उनकी ढाल बनकर आई है इसलिए आज यह समस्या उत्पन्न हुई है। ”
“मतलब? मैं कुछ समझी नहीं!”
“मैं आपको आसान शब्दों में समझाती हूँ। आपको पता है चिड़िया अपने बच्चों का खयाल तब तक रखती है जब तक वह उड़ना न सिख जाए। चिड़िया उन्हें अपनी तरह बना देती है और जब वह खुद उड़ना सिख जाते है तो उन्हें आजाद कर देती है। यानी अपने हाल पर छोड़ देती है। वे खुद जिते है और मुसीबत का सामना खुद करते है। क्या होता अगर चिड़िया ने उन्हें उड़ना नहीं सिखाया होता! हर पल उनके साथ रही होती तो क्या वह कभी अकेले उड़ सकते? ऊँचाई से उन्हें भी डर लगा होगा फिर भी चिड़िया ने उन्हें उड़ना सिखाया। क्योंकि अगर वह ऐसा नहीं करती तो चिड़िया के बच्चे कभी डर का सामना नहीं कर पाते। आप भी अपने बच्चे को डराकर मत रखिए। उन्हें हौसला दे। आप सिर्फ रास्ता दिखाए, उनके साथ चलने की कोई जरुरत नहीं है। अगर आप उनके साथ चलती रहेगी तो वह कभी अकेला चल ही नहीं पाएगा। “
रमिला गहरी साँस लेती है फिर बोलती है, “टीचर मैं समझ गई। आपकी बातों ने मुझे मेरी भूल समझा दी। लिओन बेटा देर से ही सही पर मुझे समझ आ गया। अब से मैं तुम्हें अकेले चलने का मार्ग दिखाऊंगी। देखना एक दीन तुम डर को हराकर जित जाओगे। जो लोग तुम्हें डरपोक, कमजोर बोल रहे है वही लोग तुम्हारी तारिफ करेंगे। ”
“हां लिओन, तुम्हारी माँ ने बिलकुल ठीक कहा। लोग तुम्हारे बारे में क्या बोलते है उससे तुम्हें फर्क नहीं पड़ना चाहिए। तुम सिर्फ अपने पर ध्यान दो। जब समय आएंगा तब बोलना और दिखा देना तुम भी किसी से कम नहीं हो। पहले तुम अपने आप से बोलो मै नीडर हूँ, डर से मेरा कोई वासता नहीं। मै डर को कभी जितने नहीं दूँगा। मैं हार कर भी जीतूंगा। ”
लिओन उनके शब्दों को दोहराता है। जब तक उनके दिमाग में न बैठ जाए तब तक टीचर उसे वही वाक्य बुलवाते है। तकरीबन एक घंटे तक वह टिचर के शब्दों को दोहराता रहा। आखिर कार उनके दिमाग में बैठ गया और जोशिली आवाज में वह बोला, “टीचर मैं बार-बार गिरूंगा फिर भी उठूँगा और चलकर दिखाऊंगा। ”
टीचर और रमिला दोनों खुश होते है। टीचर उन्हें समझाती है कि एक दीन में तुम अपनी सोच को नहीं बदल सकते इसलिए तुम्हें हर रोज ऐसा बोलना है।
