हेलेन केलर की life Inspired Story
हेलेन केलर की life Inspired Story
शायद हममें से कोई नहीं कर सकता ऐसा एक ऐसी बच्ची ने कर दिखाया जो नाही सुन सकती थी, ना ही देख सकती थी और नाही ठीक तरह से बोल पाती थी। हेलर केलर जिसका नाम एतिहास के पन्नो में सुवर्ण अक्षरों में लिखा गया है।
आज हम इस कहानी में एक ऐसी बच्ची के बारे में जानेगे जो दुनिया के लिए प्रेरित बन गई। कहा जाता है अगर आपको सच्चा गुरु मिल जाए तो आपका पूरा जीवन बदल जाता है। ऐसी ही कहानी हेलेन केलर की है जिन्हें राह दिखाने वाले गुरु मिले जिन्होंने उनका पूरा जीवन ही बदल दिया। बिना देखे, सुने और बोले उन्होंने कॉलेज भी पास कर लिया। हेलेन केलर का बचपन कैसा था? कैसे वह दुनिया के हर एक लिए प्रेरणा बन गई? उनके जीवन की Inspired कहानी पढ़िए
हेलेन केलर का जन्म 27 जून सन् 1880 में दक्षिणी यु।एस।ए के छोटे शहर अल्बामा में हुआ था। अठारह महिने की छोटी उम्र में हेलेन केलर बोलना सीख ही रही थी कि अचानक वह बहुत बीमार हो गई। बमुश्किल से वह बच पाई। जब वह ठीक हुई तो पूरी तरह से अंधी और बहरी हो चूकी थी। इतनी कम उम्र के छोटे बच्चे को बोलना और समझना बहुत मुश्किल होता है। आम तौर पर सभी छोटे बच्चे दूसरो को सुनकर ही बाते करना सीख लेते है लेकिन यहां हेलेन केलर न तो देख पाती थी और नाही सुन पाती थी। उनके लिए समझना और समझाना बहुत मुश्किल था। उन्हें कुछ ही शब्द याद थे जो बीमार होने से पहले सुने थे। जैसे कि पानी यानि water को वह वा, वा कहती थी।
जब हेलेन केलर को मना करना होता था तब वह अपना सिर नकार में हिलाती और जब उसे कुछ चाहिए तो वह अपना सिर हकार में हिलाती थी। उन्हें किसी को बुलाना होता तो वह उसका हाथ पकड लेती थी। धक्का देने का मतलब हेलेन केलर उन्हें जाने को बोलती थी। इस तरह से हेलेन केलर दूसरो पर निर्भर हो गई थी लेकिन फिर भी उनकी बुद्धी और दिमाग आम बच्चो की तुलना में काफि तेज था। वह हर बच्चे की तरह कुछ करना चाहती थी।
छोटी सी बच्ची हेलेन केलर को तब ज्यादा गुस्सा आ जाता था जब वह अपनी बात किसी को समझा नहीं पाती थी। जब हेलेन केलर सात साल की हुई तो उन्हें पढ़ाने और उनकी देखभाल के लिए ऐनी सुलवन आइ। इस चतुर और बुद्धि मान महिलाने हेलेन केलर की जिंदगी बदल दि।
ऐनी सुलवन जो खुद भी अंधी थी और उन्होंने नेत्रहिन स्कूल से पढाई की थी। वही से ऐनी सुलवन ने फिंगर मेथड यानि उँगलियों से बात करना और लिखना सीखा था। उन्हें पता था अगर यह मेथड हेलेन को सीखा दि जाए तो आसानी से पता चल जाएगा वह क्या कहना चाहती है। वह शब्दो को हेलेन की हथेली में लिख देती थी जिससे हेलेन को पता चल सके की वह उससे क्या कहना चाहती है। हेलेन चीजो को छुककर महसूस करने में बहुत माहिर थी।
उनकी गुरु ऐनी सेलवन ने एक दिन हेलेन को एक डोल दि और उनकी हथेली में लिखा, Doll यानि उसे महसूस कराया यह डोल है। इस तरह उन्होंने दूसरे शब्द भी सीखाए जैसे कि,Cake, Mug लेकिन इन सब के मतलब से अंजान हेलेन को कुछ समझ नहीं आता था। इस तरह करते हुए वह निराश और बहुत उब गई थी जिसके बाद हेलेन ने कोशिश करना छोड़ दिया।
उनका हौसला कैसे बढाया जाए यह सोच रही हेनी सेलवन एक दिन हेलेन को पानी के पास ले गई और उनके हाथ एक मग थमा दिया। जैसे ही मग पानी से भर गया, हेलेन की हथेली में पानी महसूस हुआ। उन्होंने हेलेन की हथेली में लिखकर समझाया यह Water है। उनका चहेरा खुशी से झुम उठा क्योँकि उन्हें समझ आ गया इसे Water कहते है। उसके बाद उनकी छोटी बहन को छूकर बताया यह Baby है। धीरे-धीरे उनकी उत्सुकता बढती गई जिससे वह बहुत जल्दी से चीजे याद रखना और समझना सीख गई। उसके बाद हेलेन ने फ्रेम में लिखना भी शुरु कर दिया। लिखने की प्रेक्टिस के लिए उसने टाइपिंग करना भी सीख लिया।
इतना सब सीख ने के बाद हेलेन को बाते करना सीखना था। उनकी शिक्षिका ऐनी सेलवन ने उन्हें बाते करने का तरिका समझाया जैसे, होठ और जीभ को कैसे हिलाना है, इसका मतलब क्या होता है। लगातार प्रयासो से हेलेन ने बोलना भी सीख लिया।
बीस साल की हेलेन ने विश्वसविद्यालय जाकर डिग्री भी लि।
यह सब उनके प्रयास और शिक्षिका की मेहनत से हो पाया। एक छोटी बच्ची जिन्होंने सुनने, बोलने और देखने की शक्ति को गवाया था उसने लंबे प्रयास और लगन के साथ आम बच्चो की तरह लिखना, पढना भी सीख लिया। हेलेन ने सिर्फ अंग्रेजी को ही नहीं सीखा बल्कि फेंच और जर्मनी भाषा भी सीख लि।
हेलेन ने अपना सारा जीवन खुशी और दूसरे अंधे लोगो की मदद में बिताया। उन्होंने पूरी दुनिया की यात्रा भी कि। हेलेन करीब 88साल तक जीवित रही। अगर हेलेन कर सकती है तो हम क्यों नहीं कर सकते! उन्होंने असंभव को भी संभव कर दिया। उनके जीवन की यही कहानी हमें inspired करती है।
