माँ तेरे जैसा कोई नहीं....
माँ तेरे जैसा कोई नहीं....
यह स्टोरी माँ के बलिदान के बारे में दर्शाती है. पहले बेटी, फिर पत्नी उसके बाद माँ...... दुनिया का पहला रिश्ता अगर कोई है तो वह, माँ और बच्चो का है बच्चा जब माँ के गर्भ में होता है तभी रिश्ता जुड जाता है. वो जिदंगीभर खुद से वादा करती,
है, ‘मै तुम्हें कभी अकेला नहीं छोडूंगी....
किसी ने क्या खूब कहा है,
‘मेरी तकदीर में एक भी
गम ना होता...
अगर तकदीर लिखने का
हक मेरी माँ को होता....’
खैर अब बढ़ते है कहानी तरफ,
ज्यादा कुछ नहीं..... यह कहानी माँ और बच्चे की है. हालाँकि इस में कोई हिरो- हिराइन नहीं है फिर भी ये अंत तक आपको जोडे रखेगी....यहां पर माँ नायक है तो बेटा खलनायक है.....
आगे बढ़ने से पहले आपको बता दूं,
साइकोलॉजी के अनुसार,
बच्चे के जन्म यानि- (0 से 10साल- तक उन्हें खूब प्यार करना चाहिए...
11 से 15साल की उम्र में उसे उसकी गलती पर ध्यान केंद्रित कराना चाहिए...
16 से 18साल....इस पडाव में बच्चो के मानसिक और शारिरीक कई बदलाव आते है. इस किशोरावस्था में उसके साथ एक मित्र की तरह व्यवहार करना चाहिए...
19 के बाद बेटा- बाप की और बेटी- माँ की परछाई बन जाते है....इसलिए उन्हें दोस्त की तरह सपोर्ट करना चाहिए.
इस कहानी के भी यही खंड है,
खंड (1) बचपन का बचपना
खंड(2) किशोरावस्था की गलत संगत
खंड(3) जवानी का जोश...
खंड(4) जिम्मेदारी का बोज..
खंड(5) अपनो की सही पहचान...
स्टोरी ऑवरव्यू...
कमलेश: दर्दभरे लफ्जो में... “माँ जिंदगीभर लोगो ने मुझे कोसा ही है, सब ने अकेला छोड़़ दिया पापा, भाई, भाभी, यहां तक की मेरी खुद की पत्नी भी मुझे छोडकर चली गई.
माँ: रोते हुए.... “मै हूँ न. तुम अपने आपको अकेला क्यों समझते हो..! जब तुम मेरी कोख में थे तब मैने खुद से
ये वादा किया था कि मै आखरी सांस तक मेरे बच्चे के साथ रहूंगी…..! मै बस उसी वादे को निभा रही हूँ.”
कमलेश: दर्दनाक रोते हुए….. “अम्मा.... मैने जिदंगीभर आपसे नफरत कि.... आपको गलत समझा....फिर भी आपने मुँह मोडा नहीं......”
माँ: रोते हुए आह भर…. “मेरे बच्चे.... माँ कभी अपने बच्चो से मुँह नहीं मोडती... उनके हदय से हमेशा ममतामय झरना बेहता है...”
कमलेश: रोते हुए माँ के गले लग जाता है…. “अम्मा... आज मुझे समझ आया माँ से बडा रिश्ता दुनिया में बना ही नहीं…..! मेरी जिंदगी में रिश्ते बनते गए और टूटते गए लेकिन आखरी रिश्ता बचा तो वह है माँ और बेटे का.. सच में अम्मा…….. ‘आप जैसा कोई नहीं....!”
विशेष नोट: इस कहानी के किरदारो का किसी भी टिवी, सीरियल, सामाजिक से कोई लेना देना नहीं है. हालाँकि यह पूर्णरुप से काल्पनिक है लेकिन इससे जुडे कुछ अंश हमारे जिवन को जोडने का कार्य अवश्य करते है. इस कहानी के मेइन केरेंटर कमलेश के पूरे जिवन को यहां दर्शाया गया है.
