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H.D kumhar

Children Stories Inspirational

4  

H.D kumhar

Children Stories Inspirational

अत्मविश्वास हो तो ऐसा

अत्मविश्वास हो तो ऐसा

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4

सर्दी का मौसम था इसलिए विश्वविद्यालय में कैंपिंग का आयोजन किया गया था. उसमें बीस लोगो की चार टूकडी बनाई गई थी. सब की टूकडी में पांच सदस्य थे और एक लीडर था. उनके नाम इस तरह रखे गए थे, पहली टुकडी, सरदार पटेल, दूसरी बहादूर शास्त्री, तीसरी, चाचा नहेरु, चौथी सरोजिनी नायडू और पांचवी महात्मा गांधी. यह पांचो टूकडी को पडाव दिया गया था जिसे आज ही पूरा करना था. अगर इसमें से कोई भी टूकडी सभी पडावो को पार कर लेती है तो उसे बडा इनाम और सम्मान के साथ पुरस्कार भी मिलने वाला था.

कडकडाती ठंड में चारो टूकडी निकल पडती है. शुरुआती में सभी के चेहरे पर मुस्कान छाई हुई थी. सुबह की ठंड ताजगी मेहसूस करा रही थी. इन सबको करीब साठ किलोमीटर में आनेवाली मुसीबतो का सामना कर पडाव पार करने की चुनौती दि गई थी. अब धीरे-धीरे ठंड की मात्रा कम होते जा रही थी और धुप की मात्रा बढ रही थी. सभी अपनी-अपनी टुकडीओ के साथ चले जा रहे थे. कोई आगे था तो कोई पीछे.

बारह बज चुके थे. अब तक सभी ने करिब 20 किलोमीटर का अंतर काट लिया था. अभी उसे 40 किलोमीटर का अंतर काटना बाकी था. अब तक रास्ता सिधा था इसलिए इतना अंतर काट लिया लेकिन आनेवाला रास्ता चुनौतीओ से भरा हो सकता है.

वे आगे जाते है. वहां से उसे बडे-बडे पथ्थरो के बीच से गुजरना था कोई आगे था तो कोई पीछे. सरदार पटेल की टूकडी वहां पर थोडी देर चलती है फिर थक जाती है. टीम लीडर अपनी टूकडी को चलने के लिए बोलता है लेकिन सभी काफि थक चुके थे इसलिए उन्होंने आगे जाने से मना कर दिया.

अब तीन टूकडी आगे चली जा रही थी. 5कीमी अंतर काट लेने के बाद आगे जाकर जंगल आता है. सबसे पहले सरोजिनी नायडू की टूकडी वहां पर पहुंचती है. वन्य रक्षक उस टूकडी को चेतावनी देता है कि अगर जंगल से गुजरना है तो बहुत सावधानी रखनी होगी वरना जानवरो के हाथ से बच नहीं पाओगे. सरोजिनी नायडू की टूकडी में तीन लडकिया और दो लड़के थे. लडकिया जाने से मना करती है और लडके आगे जाने को बोलते है. थोडी देर चर्चा करने के बाद उसने आगे न जाने का फेसला लिया.

वे लोग एक-दूसरे को कॉन्टेक्ट भी नहीं कर सकते थे क्योंकि वहां नेटवर्क प्रॉब्लम था. उसके बाद बहदुर शास्त्री टूकडी आती है. उसे भी वन्य रक्षक वही चेतावनी देता है लेकिन टूकडी में काफि जोश था इसलिए वे आगे जाने का फेसला लेते है. फिर महात्मा गांधी टूकडी आती है वो भी आगे जाने का फेसला लेती है.

अब सिर्फ दो ही टुकड़ी बची हुई थी. जैसे तैसे वे जंगल का रास्ता काट लेते है लेकिन आगे जाकर एक गुफा आती है. आगे जाने का सिर्फ वही रास्ता होता है. बहादुर शास्त्री की टूकडी मेप में देखती है. गुफा करीब दो 2कीमी अंतर की होती है इसलिए उनके सदस्य कोई खतरा लेना नहीं चाहते थे क्योँकि अंधकार भरी गुफा में कुछ भी हो सकता था. वे गुफा के अंदर जाकर देखते है. गुफा का रास्ता काफी छोटा था और सिर्फ एक ही इंसान आगे चल सकता था बाकी के लोगोको उसके पीछे चलना था. वे बाहिर आ जाते है और आगे न जाने का फेसला लेते है.

करीब 1कीमी उसके पीछे चली आ रही महात्मा गांधी टूकडी जब गुफा के पास पहुंचती है तो वे अंदर तो जाते है लेकिन उनके सदस्य आगे जाकर हार मान लेते है क्योंकि गुफा में काफि अंधकार था और कुछ भी नजर नहीं आ रहा था. उनकी टूकडी बाहिर निकल जाती है. उनकी टूकडी में दो लडकिया और तीन लडके थे. दोनो लडकिया आगे जाने से मना करती है लेकिन लडके आगे जाने को बोलते है. थोडी देर चर्चा करने के बाद वे नहीं जाने का फेसला लेते है तब टीम लीडर समझता है,

“हम यहां तक आ गए है और यही से लौट जाएंगे तो अब तक हमने जितना अंतर काटा वो सब बेकार में चला जाएंगा. हमे धीरे-धीरे करके अपनी मंजिल तक पहुंचना है. हम अंधकार को देखकर पीछे हट जाएंगे तो कभी रोशनी का दिपक नहीं जला पाएंगे! आप अपने आपको अकेला मत समझो क्योँकि आप के अंदर आत्मविश्वास है और जब तक आप के अंदर आत्मविश्वास है आपको किसी से डरना नहीं है. अब आपको तय करना है आप कायरो की तरह भागना चाहते है या फिर कोशिश करके अपने आपको साबित करना चाहते हो!”

 लीडर की यह बात सुनकर सभी में जोश आ जाता है और वे आगे जाने का फेसला लेते है. जैसे तैसे वे गुफा का रास्ता काट लेते है. वहां से आगे चलने लगते है. थोडी देर चलने पर काफि अंधेरा हो जाता है इसलिए वे एक जगह रुक जाते है.

   सुबह के चार बजे फिर से चलना शुरु करते है. 2किमी अंतर काट लेने के बाद आगे जाकर बर्फीले पहाड आते है. एक आदमी टूकडी को बोलता है कि आप यहां से नहीं जा पाओंगे क्योंकि बर्फीले पहाड़ पर थोडी देर चलने पर ही आपका खून थीज जाएंगा. वहां जाना खतरो से खाली नहीं है! अगर आप जाओगे तो वापस आना मुश्किल है. इतना बोलकर वह आदमी चला जाता है.  

बर्फीले पहाड देख और उस आदमी की बात सुन तीन सदस्य आगे जाने से मना करते है. दो जाने के लिए तैयार थे और तीन मना कर रहे थे. कुछ समय चर्चा करने के बाद वे नहीं जाने का फेसला लेते है. उनका टीम लीडर फिर से समझता है.

“अब हमारी मंजिल ज्यादा दूर नहीं है! अगर आप बर्फिले पहाड देखकर वापस लौट जाएंगे तो कभी आगे का रास्ता मालूम नहीं कर पाएंगे. अब तक हमने कितनी बडी चुनौतिओ का सामना किया है इसलिए हम यहां तक पहुंचे है अगर हमारे अंदर वो आत्मविश्वास नहीं होता तो क्या हम यहां तक पहुंच पाते! यह सुनकर दूसरे ने कहा, “वो तो सच है लेकिन अभी 3किमी अंतर काटना बाकी है!” फिर एक लडकी बोली, “अगर आगे जाकर हम फस गए तो! बीच में ही हम अटक जाएंगे. ”

टीम लीडर बोलता है, “हमारी टीम का नाम महात्मा गांधी है अगर महात्मा गांधी अकेले ही देश के लिए नहीं लडे होते तो क्या हम आज आजाद होते! दांडी यात्रा में कडी धूप में पैदल चलकर नमक आंदोलन किया, क्या वो सिर्फ गांधी बापु के लिए था! क्या सिर्फ उसे ही नकम खाना था बाकि को नहीं खाना था! सब के अधिकार के लिए महात्मा गांधीने अपना सारा जीवन भलाई करने में बिता दिया. अगर वे आंदोलन करने से पहले आनेवाली मुसीबत के बारे में सोचते तो क्या आज हम आजाद होते? हमें तो सिर्फ 3किमी का अंतर काटना है अगर यहां से लौट गए तो हमरा 57किमी का काटा हुआ अंतर बेकार चला जाएंगा. अब आप बताए क्या करना है?”

टीम लीडर की बात सुनकर फिर से सबके अंदर जोश आ जाता है. वे चलने लगते है. थोडी दूरी पर चलते ही सब सवाल पूछने लगते है कि अब कितना दूर है और लीडर बोलता रहता अब हम पहुंचने ही वाले है. 2किमी अंतर काट लेने के बाद तीन सदस्य गिर जाते है. अब उसके अंदर आगे जाने की हिमत नहीं थी फिर भी टीम लीडर जैसे तैसे उसे समझाते हुए आगे चलाए जा रहा था. 

आखिरकार वे अपनी मंजिल तक पहुंच जाते है. वहां पर उसके सम्मान के लिए विश्वविद्यालय के सभी लोग खडे थे. बडे सम्मान के साथ उनका आदर किया जाता है. महात्मा गांधी के सदस्य बताते है कि हम यहां तक पहुंचे उसका सारा श्रेय हमारे लीडर को जाता है क्योंकि उनका आत्मविश्वास बुलंदी नहीं होता तो हमने बीच में ही हार मान लि होती. उनकी कोशिश ने हमे यहां तक पहुँचाया है. जब लीडर का सम्मान किया जाता है तो वह गिर जाता है क्योँकि उनके एक पैर में काफी खून बेह रहा था और दूसरे पैर में छाले भी पड गए थे फिर भी सब को हौसला दे रहा था. 

यह देख सब दंग रह गए और बोल उठे, “आत्मविश्वास हो तो ऐसा. ”  

                      

अगर आप कुछ करना चाहते है और अगर आप में आत्मविश्वास है तो आपको कोई नहीं रोक सकता. दूसरे वो काम नहीं कर सके इसलिए हम भी नहीं कर सकेंगे ऐसा सोचना मतलब आप अपने आपको कमजोर बता रहे है. आप ऐसा भी कर सकते है शायद आज तक कोई न कर पाया हो और आप के अंदर वो करने की ताकत है लेकिन जब तक आप कोशिश नहीं करते तब तक कुछ नहीं हो सकता. यह कहानी भी बिल्कुल ऐसी है.



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