इस रिश्ते का नाम ? ( भाग चार )
इस रिश्ते का नाम ? ( भाग चार )
समय अपनी गति से चल रहा था, मेरी बीएससी की पढ़ाई समाप्त हो गई थी। मेरे घर में शादी के लिए लड़के देखने की चर्चा छायी हुई थी, लेकिन कहीं बात नहीं बन पा रही थी। और मैं जवानी की देहलीज पर उसी तरह खड़ी थी जैसे कोई सावन की बारिश में प्यासा खड़ा हो ।
कमरे की खिड़की के बहार देखते हुए मैं कभी कभी सोचती थी ," क्या हकीकत में हमारी पहचान शब्दों में छुपी होती है? क्या हम अपनी आत्मा को शब्दों के माध्यम से प्रकट कर सकते हैं?" व्यक्ति जो हाड़ मांस का हैं उसे कुछ शब्दों में व्यक्त कर दिया जाता हैं। फिर मुझे लगता था ," ठीक ही हैं, हाड़ मांस का शरीर तो एक दिन ख़त्म हो जाएगा। सिर्फ कुछ शब्द ही जो हमारा नाम हे इस हाड़ मांस के शरीर को जिन्दा रखें गे। "
बचपन में मेने एक कहानी पढ़ी थी और मुझे बहुत बाहियात कहानी लगी थी ।उस कहानी में घने जंगलो के बीच एक पहाड़ी पर किसी ने एक छोटा सा गुलाब का बगीचा लगा दिया था या अपने आप हो गया था । गुलाब का छोटा सा बगीचा वहाँ के संवेदनशीलता को चुनौती देने के बावजूद बढ़ गया था।
बगीचे में गुलाब के फूल उगते थे और मुरझा कर गिर जाते थे ।उसे इन फूलो की कोई उपयोगिता ही समझ में नहीं आती थी ।फूल की सार्थकता तब ही हैं जब बह किसी स्त्री के बालों में लगाया जाए। किसी प्रेमी द्वारा प्रेमिका को दिया जाए। किसी मंदिर में, किसी शहीद के कफ़न पर चढ़े या किसी की शादी या किसी फंक्शन में काम आये। लेकिन इन गुलाब के फूलों के साथ ऐसा कुछ नहीं हो रहा हैं। मैं इन गुलाब के फूलों के जीवन की सार्थकता को समझ नहीं पाती थी ।
ये गुलाब किसी स्त्री के बालों में सजते हैं, तो वह उनकी सुंदरता को और बढ़ाते हैं। प्रेमिका को प्रेम का संकेत देने के लिए ये फूल उपयुक्त होते हैं। शहीद के कफ़न पर ये फूल चढ़ाना उनकी शहादत की महत्वकथा को दर्शाता है। और शादी या खुशी के अवसर पर इन फूलों का उपयोग काम आता है, जिससे वह अवसर और भी रमणीय बन जाता है।लेकिन इन गुलाब के फूलों के साथ ऐसा कुछ नहीं हो रहा हैं। बह इन गुलाब के फूलों के जीवन की सार्थकता को समझ नहीं पाती हैं।
बचपन में जब बह बहुत छोटी थी उसकी दादी परियों की एक कहानी सुनाती थी।उस कहानी में , एक छोटे से गाँव में परियों की दुनिया की राजकुमारी पैदा हो जाती है। उसका रूप और बुद्धि सबसे प्रखर होती है। लेकिन वह पुरुष नहीं मिलता जो उसे समझे, जो उसका साथ दे, जो उसके दिल को छू जाए। उसको प्यार करने बाला, उसको गले लगाने बाला, उसे किस करने वाला उसको सीने से चिपटाने बाला, उसको छूने वाला कोई पुरुष नहीं मिलता हैं और बह परी एक दिन मर जाती हैं। उस समय तो बह इस कहानी का अर्थ समझ नहीं पाई। आज बह महसूस करती हे कि उस परी, इन फूलों और उसकी किस्मत एक ही भगवान द्वारा लिखी गयी हैं।
मुझे भी लगता था की मैं भी बिना प्यार के इस दुनिया से चली जाउंगी उन गुलाब के फूलो के तरह ,उस परी की तरह जिन्हे प्यार करने बाला कोई नहीं मिला हैं। गुलाब तथा परी इस दुनिया में आने की अपनी सार्थकता को समझ नहीं पायी हैं।गुलाब का फूल जिसे अपनी सुंदरता पर गर्व था, अकेला महसूस करता था। हर रोज़ अपनी सार्थकता को खोजता था। परी जो चाहती थी कि उसे कोई प्यार करने वाला मिले, कोई उसको चाहने वाला मिले, और कोई उसके रंग-रूप की तारीफ करने वाला मिले। पर जैसा वह चाहती थी, ऐसा कभी नहीं हुआ था।

