" इन्डिया कौलिंग"
" इन्डिया कौलिंग"
'क्या देख रही हैं माँ लगातार अपलक विंडो से बाहर ? '
'वो उन्हें देखो ना वे रोज मिलती हैं मुझे सुबह-शाम वाक पर '
' अच्छा वो ! वो तो कोमला आंटी हैं। अच्छी और सभ्रान्त महिला हैं 'दिन के करीब एक बजे रोज की तरह उस दिन भी जया की नारी सुलभ जिज्ञासा उन मंझोले कद, श्याम वर्ण की पैंट-शर्ट पहनी हुई महिला को धीरे-धीरे चल कर आती देख जोर मारने लगी है।
' अच्छा... तो कोमला आंटी हैं ये '।
सुनकर खुश हो गई जया कि परदेश में कोई तो मिला बतियाने को वे गेट खोल कर बाहर निकल पड़ीं।
कोमला भी खुश हुईं उन्हें अपनी ओर आते देख कर उसने ,
' हैलो, गुड आफ्टरनून' जया की ओर हाथ बढ़ा दिए।
कोरोना का डर अभी हावी है लिहाजा --जया ने
' नमस्कार ' कहते हुए संकोचवश दोनों हाथ जोड़ दिए।
इसे अनुभवी आंखों से भांपती हुई कोमला हँस पड़ी,
' हे ... आर यू... शिप्रा' स मॉम ?
शी टोल्ड मी अर्लीयर दैट यू आर कमिंग टू हर फॉर समर ब्रेक'
' ओ या! आई एम '
' नमस्कार ' बहुत खुशी हुई। आप कुछ दिन रुकेंगी ?
'हाँ , अभी तो हूँ '
'फिर ... आओ शाम में चाय पर कुछ बातें -शातें करेंगे'
अगर आप चाहें तो मेरे साथ यहाँ के मंदिर भी चल सकती हैं '
'अब यहाँ बच्चों को इतनी फुर्सत कहाँ कि आपको मंदिर ले जाएं '
अगले दिन शाम में जया बन-ठन कर एक बड़े से गुलदस्ते के साथ अकेली ही पहुँच गयी।
दरवाजे पर सुनहरे अक्षरों वाले नेमप्लेट पर लिखा है,
' मिस्टर ऐन्ड मिसेज, डॉ .जैन -अय्यर '
कोमला दरवाजे पर ही खड़ी दिखी।
मुझे देख कर सीढ़ियों से नीचे उतर पड़ी,
' कमॉन जया, वेलकम टू माई होम ... स्वीट होम '
कोमला पेस्टल पिंक कलर की बाँह कटी टॉप और निकर में झकास लग रही थी। जया ने चौड़े पार की पोचमपल्ली साड़ी पहन रखी है जिसे देख कर कर वह झेंप गयी लेकिन फिर तुरंत ही संभल कर बोली ,
' लुकिंग सो प्रिटी '
जया की नजर चारो ओर घूमती हुई साइड टेबल पर रखी हुई कोमला और उसके पति के पेयर फोटो पर जा टिकी।
' ही इज माई हसबेंड '
' ओ हाउ स्वीट, कितनी सुन्दर जोड़ी है तुम दोनों की पर वो है कहाँ ? '
मेरा इतना पूछना था कि उसकी आँखें भक्क से जल कर बुत गयीं,
' वो डैमफूल, पागल हो गया है।
उसकी मत पूछो इस उम्र में मुझको यहाँ छोड़ कर इन्डिया चला गया है।
हुँह... देशभक्ति की लगन लगी है '
'कहता था,
पाश्चाताप की अग्नि में जल रहा हूँ मेरा देश, मेरी मिट्टी बुला रही है।
' यू नो जया, वो तो मुझे भी ले जाना चाहता था।
लेकिन मैं कोई उस जैसी पागल थोड़ी ही ना हूँ ? कि चली जाती बस एक दिन गुस्से में आ कर मैंने कह दिया ,
'तुम्हें जाना है तो चले जाओ, मैं नहीं जाने वाली कहीं भी बस उसकी तो जैसे जान में जान आ गई '
एक मैं ही उसके राह की बाधा बनी हुई थी, अब उसे भी खुद ही हटा दिया मैंने '
उसने अगले महीने ही सरकारी नौकरी से वी.आर.एस ले कर अपनी अरबों की सम्पत्ति बेच कर वापस इन्डिया चला गया।
सुना है सुदूर गाँव में कहीं मुफ्त का अस्पताल और एन.जी.ओ चला रहा है।
कहते हुए उसकी सांस फूल गयी थी।
झट से टेबल पर पहले से ही निकाल कर रखी हुई वाइन के ग्लास को उठा कर गटागट पी गयी।
जया , आपने वो गीत सुना है ? ,
' सैंया बिना घर सूना-सूना ' कोमला शायद अपनी इसी हताशा को मिटाना चाह रही थी।
उसे थपथपाते हुई जया ने पास ही रखी हुई इजीचेयर पर बिठा दिया।
वो थोड़ी देर चुप रही मानों खुद को आत्मसात करने की कोशिश कर रही हो फिर बोली ,
' जानती हैं जया ,
हमने एक साथ ही मेडिकल कॉलेज में पढ़ते हुए अन्तर्जातिए प्रेम विवाह किया था।
'नेमि' ऐब्रौड नहीं आना चाहता था। लेकिन डैडी की इच्छा से मेरे प्रेम में पड़ा वो खिंच हुआ चला आया।
लेकिन आखिर कब तक ?धीरे-धीरे प्रेम की डोर हल्की और
'माँ की ममता की' पुकार मजबूत होती चली गईं '
'बेबकूफ कहीं का वहाँ बिना सुविधा के जहाँ बिजली भी मात्र घंटे दो घंटे के लिए आती है सड़ रहा होगा '
' हुँह ... सड़ने दो,
मेरा क्या मैं तो सुख-चैन से हूँ '
' तो आप कभी नहीं जाती उसके पास ? मैं हैरान पूछ पड़ी ,
आपकी तो लव मैरिज है या सिर्फ़ एक तरफा प्यार था ? '
' दिमाग खराब हुआ है ? क्या मेरा जो उन नंगे-भूखे मरीजों के बीच अपनी जिन्दगी बिताऊँ '।
' तो मतलब आपने पागल डॉक्टर से प्यार किया था ? '
भौंचक रह गई कोमला ,
' ये क्या कह रही हैं जया ?'
'वही जो आप सुन कर भी सुनना नहीं चाह रहीं हैं।
'माटी की पुकार ' ... बुदबुदाती हुई जया।
कुछ देर बाद चाय पी कर वहाँ से निकल आई, थोड़ा आगे जा कर उसने पलट कर देखा, कोमला बड़े प्यार से नेमप्लेट को सहला रही है।
