हत्यारे----

हत्यारे----

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डाक्टर साहब तुम हत्यारे होतुमने

मेरे बाप को मारा है, अस्पताल में डाक्टर के चेम्बर के सामने हजारों भिखारियों की भीड़ में एक लड़का जोर

जोर से चिल्ला रहा था,साथ में उसकी मां

बिलख बिलख कर रो रही थी।

डाक्टर साहब अपनी सफाई में खड़े होकर चिल्ला कर बोला रहे थे

मैनें किसी को नहीं मारा तुम मुजफर झूठा आरोप लगा रहे हो। पुलिस को खबर कर दी गई ,दनादन पुलिस आ गई,

अनवरत डाक्टर्स भी आ गये। पर भीड़ चिल्ला रही थी डाक्टर हत्यारा है ,हत्यारा‌ है हत्यार है हत्यारे को हम

नहीं छोड़ेंगे।

अरे मैनैं नहीं मारा, मैं बेगुनाह हूं।

पुलिस ने लड़के से पूछा किस सबूत के आधार पे तुम इन्हें "हत्यारा" कह रहे हो लड़के ने एक कागज का टुकड़ा दे दिया जिस पर लिखा था डाक्टर "हत्यारा" है ,इसे कभी माफ ना करना।

‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌डाक्टर के सामने सारी घटना चित्रपट के समान एक एक कर आ गई।

वो खामोश हो गए वो भिखारी जो भूखा था कह रहा था साहब कुछ दे दो।

मेरे बच्चे भूख प्यास से तड़प रहे हैं। पर डालकर ने उसे धक्का दे दिया था पर अचानक उनका स्वार्थ जाग उठा था और उन्होंने भिखारी को 100 रुपए देकर कहा था "अरे तू तो करोडो़ का आदमी है" सुन भिखारी हक्का बक्का हो बोला "कैसे साहब" तब वे बोले देख मैं जैसा कहूं कर तेरा परिवार भी तेरा अहसान मानेगा, बस भिखारी की आंखे चमक उठी थी पूछा कैसे ? सुन एक सेठ के बेटे को "किडनी" चाहिए तू दे दे बदले में 20 लाख मिलेंगे, 10 मेरे 10 तेरे। भिखारी ने सोचा, बीवी बिहार, बच्चे भूखे एक किडनी तो रहेगी राजी हो गया, मान गया। भिखारी का घर खुशहाल हो गया, सबको घर पे बता दिया लाटरी लग गई। इधर डालकर को भिखारी तो अब "अलादीन का चिराग" लगने लगा किडनी के बाद 10 लाख में एक आंख भिखारी की अब जाति में सांख जम गई।

अब वह "नथ्थू सेठ" हो गए।

डाक्टर साहब का स्वार्थ ,लालच अब और बढ़ा एक दिन अचानक नथ्थू के घर पहुंचे बोले इस बार आखिरी वह लम्बा हाथ मारना है बस "अपना दिल दे दो" सब न्यारै वाले हो जायेंगे।

नथ्थू शून्य में देखने लगा डाक्टर बोले किडनी नहीं, आंख नहीं, दांत है नहीं अब अपना "दिल" रख कर क्या तुम करोगे ? अंगदान महादान नथ्थू

‌‌‌‌‌‌‌जीवन से हार मान चुके नथ्थू ने कहा हां तुमने सही कहा डाक्टर "अब दिल ही बचा है इसे भी निकाल लो।"

पर पहले 10करोड़ मेरे परिवार को दे दो। डाक्टर ने रुपए दे दिए। ‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌परिवार को अलविदा कर एक कागज लिफाफे में रख वो यह कह कि जब मैं आऊं तब यह खोलना।

‌"दिल" निकालने के पहले डाक्टर ने नथ्थू से "आखरी इच्छा " पूछी उसने एक लिफाफा पकड़ा कहा" मेरे जाने " के बाद पढ़ना। आपरेशन सफल रहा डाक्टर खुशी से झूम उठा। नथ्थू की मृत देह को नमस्कार किया।

‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌ लिफाफा खोला पढा़ "मेरी अंतिम इच्छा तुझ जैसा लालची, स्वार्थ से भरा डाक्टर ना हो, तुम मेरे हत्यारे हो, मेरी गरीबी और भावनाओं का तुमने खून किया है मैं तिल तिल रोज मरा इससे तो अच्छा था तुम मेरा कत्ल कर देते। अपने स्वार्थ के पीछे मेरी मजबूरी की स्त्रियां की तुम डाक्टर के नाम पर कलंक हो

जीवनदान नहीं मुत्युदान करते हो। डाक्टर आत्मग्लानी से भर चुका था आत्मसमर्पण कर दिया।


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