आ बैल मुझे मार

आ बैल मुझे मार

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कभी कभी व्यक्ति समस्याओं को आंमत्रित करता है, मुसीबतें आते जाती है पर जानबूझ कर अपने को मुसीबत में डालें तो यह लोकोक्ति उस समय

"आ बैल मुझे मार " कहावत बिल्कुल ऐसे बेवकूफों पर सही बैठती है।

और यही बेवकूफी एक दिन हम कर बैठे सोच कर अपने पे हँसी भी आती है और उस परमात्मा को भी धन्यवाद देने को दिल चाहता है कि उस दिन हम बच गए ही गए अन्यथा समाज में व शहर में हमारी। प्रतिष्ठा। को जो धब्बा लगता वो लाख कोशिशों के बाद भी नहीं धुलता।

बात कुछ यूं हुई कि, दोपहर का समय था,घर में मैं शांति से बैठी थी और टीवी देख रही थी अचानक डोरबेल बजी , मैं दरवाजे पर गई सामने तीन पुलिस वाले एक महिला पुलिस इंस्पेक्टर के साथ खड़े थे मुझे देख बोले "मैडम आपके नाम कम्पैलेन्ट है" क्या---? मेरे हाथ पैर कांपने लगे, मेरे होश उड़ गए।

साथ में मेरी पुरानी‌ नौकरानी जोर जोर से चिल्ला रही थी। एक साल पहले नौकरानी ने मेरे घर चोरी की थी सो मैंने उसे निकाल दिया था,अचानक 5,6 महीने बाद उसकी बेटी मेरे पास रोते हुए आई और बोली "मैडम मुझे अपने यहां काम पे रख लो।" मैंने कहा कि "तेरी माँ यदि मेरे से लड़ी तो?"

वह बोली --"नहीं मैडम मैं बहुत दुखी हूं, मुझे माँ बाप मारते हैं मेरा बाप सौतेला है शराब पी कर मेरे साथ गंदी हरकतें करता है, मैं मर जाऊंगी मुझे बचा लो।" बस हमारी समाजसेवा की भावना वो कार्य ने हमारे मन को उसे बचाने को तैयार कर दिया उससे वायदा कर लिया, पर कुछ दिन बाद आने को कहा कारण दो दिन के लिए मुझे बाहर जाना था। अचानक सामने पुलिस को देख मैं हैरत में थी मेरे पति वकील साहब कोर्ट गए थे, मैं अकेले सकते में आ गई क्या करूं क्या ना करूं कुछ समझ नहीं आ रहा था, मैंने कहा "मेरा इतना बड़ा घर है आप देख लीजिए यदि मैंने किसी को जबरन छुपा रखा हो जैसा नौकरानी कह रही है तो।" पुलिस वालों ने पूरा घर छान मारा पर कहीं उसकी बेटी नहीं मिली। इतने में उस नौकरानी की बेटी अपनी माँ को आवाज़ देती आ गई, मैंने कहा "यह रही बेटी जिसके लिये आप लोग मुझे आरोपित कर रहे है।" अब नौकरानी की शक्ल देखने लायक थी, बेटी से पूछताछ करी पता चला की वह चार दिन से मौसी के यहां थी अभी आई घर पे माँ नहीं थी तो ढूंढ रही थी, मेरे लिए उससे पूछा तो कहा उसने "मैंने माँ बाप की शिकायत मैडम से की थी, मेरे लिए मैडम बहुत अच्छी है मेरी माँ झूठ बोलती है मेरे माँ बाप का यही काम है।"

अब पुलिस वालों ने नौकरानी व उसके पति को आड़े हाथ लिया वहीं मारना शुरू किया और मुझसे भी माफ़ी मांगी बोले "मैडम ऐसे लोगों पर दया आपको भारी पड़ जावेगी, ऐसी समाज सेवा की भावना आगे मत दिल में लाना आज इस लड़की से इन लोगों की नीयत पता नहीं चलती‌ तो आप गई थी ना अंदर और कल के अखबारों में आता एक "समाजसेवी महिला के कारनामे"

मैं सोते से जागी, इस प्रकार की भावना ही इस कहावत को सिद्ध करती है "आ बैल मुझे मार"

तब से हाथ जोड़ लिये..



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