हीरो
हीरो
बसस्टैंड नेहा अकेली खड़ी बस का इंतजार कर रही हैं। तभी चार लड़के आते हैं। और उसे छेड़ने लगते हैं। उस पर गंदी गंदी टिप्पणी करते हैं।
एक बाइक पर सवार लड़का उतरता है और लड़की के हाथ पकड़ लेता है
तभी एक जोरदार थप्पड़ उस लड़के के गाल पर पड़ता हैं। थप्पड़ इतना जोड़दार होता है कि वह लड़का गिर जाता हैं। यह थप्प्पड रवि ने मारा होता है। वो हीरो की तरह आता है और लड़की को बचाता है। तभी बाइक पर सवार व्यक्ति भी रवि से लड़ने लगते हैं। रवि बड़ी बहादुरी से से उनसे लड़ता है। लेकिन उनकी संख्या चार होने के कारण चारों लड़के रवि पड़ भारी पड़ते हैं। नेहा यह सब देख मदद के लिए लोगों को आवाज लगती हैं। भीड़ इकट्ठा देख चारों लड़के बाइक से भागते हैं। चारों लड़कों की पिटाई से रवि को काफी चोट आती है। (आपको लग रहा होगा कैसा हीरो हैं जो पिट रहा है।)
नेहा रवि को लेकर अस्पताल जाती हैं रास्ते में दोनों उसके बाद पुलिस थाना जाकर एफआईआर करने का सुनिश्चित करते हैं। रवि और नेहा अस्पताल पहुंचते है। डॉक्टर साहब रवि की मरहम पट्टी करते हैं। रवि इस दौरान दर्द के मारे चीखता है। उसकी चीख सुन नेहा बोलती हैं किसने कहा तुमसे हीरो बनने। रवि बोलता है हीरो नहीं बन रहा था मेरे घर मैं भी बहन है इसलिए बचाने की कोशिश की थी।
तभी रवि को फोन आता है वह फोन पर गंभीरतापूर्वक बाते सुनता है।
कुछ देर रवि नेहा के साथ पुलिस थाना के लिए निकल जाता है।
अस्पताल से निकल कर दोनो पुलिस थाना के लिए ऑटो करते हैं। रास्ते में नेहा को पता चलता है कि ऑटो पुलिस थाना नहीं जा रहा है तो वह रवि से पूछती हैं हम कहा जा रहे हैं। रवि लेकिन नेहा को कुछ नहीं बोलता है। कुछ देर बाद ऑटो एक घर के पास रुकता है।
यह नीरज का घर था( वह लड़का जिसने नेहा का हाथ पकड़ा था)
रवि नेहा को घर के बारे मैं बताता है। नेहा को रवि की बात समझ में नहीं आती की रवि उसे यहां लेकर क्यों आया है।
दोनों घर के अंदर जाते हैं अंदर नीरज की मां और उसकी बहन घर का काम कर रहे होते है। रवि उनसे पूछता है कि यह नीरज का घर हैं ना तो उसकी सिर हिलाकर हां बोलती हैं। रवि उनसे बिट्टू, गुड्डू, धीरज के घर वालों को बुलाने को कहता है । ( अन्य तीन लड़कों के नाम) नीरज के बहन मां यह सुनकर घबरा जाते हैं और पूछते हैं क्या हुआ सब ठीक तो हैं ना। रवि उन्हें शांत करता है और कहता है आप उनके परिवार को बुला दीजिए। तीनों लड़के की मां और बाप आते है। तब रवि जो कहता है उससे नेहा आश्चर्य मैं पड़ जाती हैं।
रवि कहता है हम दोनों यहां पर आपके चारों लड़कों का धन्यवाद कहने आए हैं। और बताता है कि सुबह कुछ लड़के यह जो लड़की खड़ी है को छेड़ रहे थे। मैं रवि ने इस लड़की को बचाने की कोशिश करी लेकिन वह संख्या में ज्यादा थे तभी आपके चारों लड़के आए और इन्होंने मुझे इन लड़कों से पीटने से बचाया और नेहा की भी रक्षा की। तभी नीरज अपने चारों दोस्तों के साथ घर पहुंचता है। नेहा, रवि और सभी के माता पिता को देख उन्हें लगता हैं की उनका भेद खुल गया। और चारों सिर नीचा कर खड़े हो जाते हैं।
तभी नीरज की बहन आती है और उससे कहती भैया मुझे आप पर गर्व है
और ऐसा कह कर रोने लगती हैं। और कहती है भैया जब मैं कॉलेज जाती हूं तो मुझे भी लड़कों ने छेड़ा है मैं बड़ी मुश्किल से अपनी रक्षा की। भईया काश हर लड़का तुम्हारे जैसा होता तो कितना अच्छा होता। यह सुन नीरज रोने वाला होता है की रवि नीरज को गले लगा कर बोलता है मित्र धन्यवाद हम दोनों की रक्षा करने। और नेहा से चलने को कहता है।
नेहा और रवि घर से बाहर निकलते हैं। तभी नीरज की आवाज आती हैं रवि! रवि पीछे देखता है तो देखता की चारों लड़के रवि और नेहा के पैर पर होते हैं और आपने किए पर माफी माँगते है। और फूट फूट कर रोने लगते है। रवि कहता है यदि नेहा तुम्हें माफ कर देगी तो में भी कर दूंगा।
चारों लड़के नेहा से माफी माँगते है और कहते वह आगे से किसी लड़की नहीं छेड़ेंगे और सभी महिलाओं का सम्मान करेंगे । नेहा भी उनमें आए बदलाव देख उसे माफ कर देती हैं।
नेहा और रवि नीरज के घर से निकल जाते है
रास्ते में नेहा रवि से पूछती हैं हम वैसे एफआईआर कराने पुलिसथाना क्यों नहीं गए।
तब रवि कहता है की अस्पताल में मेरे दोस्त का फोन आया था जो उस समय घटनास्थल पर मौजूद था। उसने मुझे बताया कि चारों अच्छे घर से है। इसलिए मैंने सोचा इनको इस तरह से सुधार कर देखता हूं।
नेहा अच्छा बोलती है और कहती है अगर यह अच्छे परिवार से नहीं होते तो रवि बोलता है फिर पुलिसथाना ही जाते
यह सुन नेहा कहती हीरों तो हो तुम..
