कारखाने की सफलता
कारखाने की सफलता
कारखाना आज सफल हो गया है । उसने अपनी सफलता के लिए एक पार्टी का आयोजन किया है। जिसमे कारखाने से जुडे सभी लोग जैसे संचालक, मशीन, मजदूर, जमीन पार्टी मैं आए है। इस पार्टी का सबसे बड़ा सवाल है कि कारखाना अपनी सफलता का श्रेय किसे देगा। इसी सिलसिले में कारखाने का संचालक बोलता है कारखाना अपनी सफलता का श्रेय मुझे ही देगा आखिर इस कारखाने के सभी निर्णय ने मैने लिए है इसका सफलतापूर्वक प्रबंध मैं कर रहा हू इसलिए इसकी सफलता का श्रेय मुझको मिलना चाहिए। तभी मशीन बोलती हैं नही श्रेय तो मुझे मिलना चाहिए क्योंकि उत्पाद बनाने का काम तो मैं करती हूं। बड़े दक्षता से अच्छे अच्छे उत्पाद बनाती हूं। इसलिए श्रेय तो मुझे मिलना चाहिए। तभी मजदूर बोलते है कारखाने की सफलता का श्रेय तो हमे मिलना चाहिए आखिर सबसे मेहनती है। कड़ा परिश्रम करते हैं हम सामान को इधर ले जाना। कच्चे मॉल को मशीन तक पहुंचना। 8-10 कड़ी मेहनत की हमने इस कारखाने के लिए। इस प्रकार तीनों अपना श्रेय कारखाने की सफलता मैं बताते हैं। और तीनो ही उपहास से कहते हैं कि श्रेय मिले न मिले पर इस जमीन को श्रेय नही मिलेगा आखिर करती क्या है पड़ी ही तो रहती हैं। और तीनों जमीन पर हंसने लगते हैं। तभी कारखाना आता है और जब वह अपनी सफलता के लिए नाम लेता है तो सब चौक जाते हैं क्योंकि वह जमीन का नाम लेता है। संचालक, मशीन और तीन एक स्वर में बोलते है। जमीन, आखिर इसमें ऐसा क्या किया जो कारखाने ने इसका नाम लिए तब कारखाना बोलता है निश्चित रूप से आप तीनों ने मेरी सफलता मैं महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। लेकिन जो इसका योगदान है उसकी कोई कल्पना ही नहीं कर सकता । जमीन जो अनाज उपजाने का कार्य करती हैं। जिसकी अपनी पहचान होती हैं। लेकिन वह कारखाने के लिए अपनी पहचान खो देती हैं। कारखाने की पहचान मैं अपनी पहचान स्थापित करती हूं। और अपनी पहचान का त्याग मैं सबसे बड़ा योगदान मानता हूं। इसके अलावा यह मुझे आधार प्रदान कर मजबूती देती है। हूं अगर मैं खड़ा तोह इसका कारण जमीन है।आप तीनों भी कार्य कर सके इसलिए चुप चाप दर्द सहन करती हैं। इस प्रकार यह हम सबकी सफलता मैं योगदान देती हैं इसलिए मैं अपनी सफलता का श्रेय इस जमीन को देता हूं।
