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Preeti Sharma "ASEEM"

Abstract

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Preeti Sharma "ASEEM"

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गजनी

गजनी

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सारा दिन घर के कामकाज में अगर कोई घर के किसी काम में भूल कर दी तो उसी बात को लेकर घर में सासू मां और पतिदेव महीनों तक चर्चा चलाते रहते.....कि ध्यान पता नहीं कहां रहता है बस काम किया और फोन..... बस काम किया......और फोन।

अभी से कुछ याद नहीं रहता। हमारी उम्र में पता नहीं क्या हाल होगा।सारा दिन घर का सारा काम करने के बाद अगर फोन लेकर भी बैठो तो यही चर्चा चलती है कि सारा दिन फोन जैसे काम तो कोई जादू की छड़ी कर गई। ऊपर से सासुमाँ के ताने अलग..... अब तो काम ही नहीं रहे जो हमारे जमाने में थे।सारे काम खुद करते थे अब तो बहुत फैसिलिटीज है.......मशीनें हैं।

 सुबह जब जैसे ही नाश्ते के लिए पराठे बनाने लगी संगीता ने देखा कि रिफाइंड खत्म हो गया है। उसे लग रहा था कि उसने रखा हुआ है लेकिन शायद वह आखरी पैक था और अब इतनी सुबह दुकान भी नहीं खुली और आज इन्होंने जाना भी जल्दी है। एक घंटे तक खुलेगी चलो देखती हूं संगीता मन में सोच कर दूसरे काम करने लगी।

अमित को बोलूगी तबतक और काम कर लेती हूँ।लेकिन डर भी था कि एक बार सामान मंगवाने के बाद जैसे ही उसने शाम को बोला कि यह रह गया है तो कितनी बातें सुनने को मिली थी कि एक बार में याद नहीं रहता। कभी कुछ खत्म हो गया कभी कुछ खत्म हो गया। संगीता को समझ नहीं आ रही थी कि इसमें इतना चिल्लाने की कौन सी बात है खत्म हो गया तो पास की दुकान से आ जाएगा।कौन -सा सात समुंदर पार से लाना है लेकिन इतना कहने पर इतना बवाल मच जाता है यह कह दिया.........तो।फिर मन में डर भी था लेकिन जरूरी है अब क्या करूं।थोड़ी रोशनी हो गई थी अब तक दुकानें खुल गई होंगी 7:00 बज गए हैं यह सोचकर उसने अमित को बोला कि रिफाइंड ला दो बस इतना सुनने की बात थी गुस्से में बोला......बस खत्म हुआ रहता है सब कुछ और नहाने चला गया।

संगीता को ऐसे ही उत्तर की उम्मीद थी। उसके दिमाग में बात आई अगर सरसों के तेल को जलाकर उसके पराठे बना देती हूं फिर तेल में से स्मेल भी नहीं आएगी।उसने सरसों के तेल को गर्म किया लेकिन अमित की बात उसके दिमाग में ही चल रही थी। सुबहा- सुबहा कितने गुस्से में जवाब दिया। रिफाइंड मिल सकता था। दो मिनट उसने बाहर ही तो जाना था घर के पास ही तो दुकान थी।अगर मेरे दिमाग से निकल गया सारा दिन इतने काम होते हैं।भूल जाना भी मेरा ही कसूर है। पर.... सुना देते हैं कि तुम्हें कोई चिंता नहीं है।संगीता को बुरा लग रहा था। उसमें तेल को गर्म किया और जैसे ही बर्तन में डालने लगी अमित के शब्दों को याद कर परेशानी में तेल उसकी उंगलियों पर गिर गया।उफ्फ़......एक जल्दी जाना था और ऊपर से हाथों पर..........बड़ी मुश्किल से उसने पराठे बना कर पैक किए और किसी को नहीं बताया कि उसके हाथ जल गये है। किसी ने गौर भी नहीं किया। मन पर शब्दों की जलन इतनी थी की हाथ की जलन को संगीता भूल गई।

अमित टिफिन लेकर ऑफिस चला गया और संगीता दिन भर काम करते हुए भी उसी के शब्दों को याद करती रही।शाम को मम्मी के पास ही बैठ गया चाय पानी लेकर गई उसे सुबह की कोई बात याद नहीं थी लेकिन संगीता सारा दिन उसी के शब्दों में मन को अपने हाथ के जलन को लेकर पिसती रही कि ऐसा क्या कह दिया था।लोग तो आसमान से चांद -तारे तोड़ने की बात करते हैं मैंने तो घर के पास की दुकान से रिफाइंड लाने को बोला था और यह............जवाब।चाय देने के बाद फिर काम पर लग गई रात को खाने के समय खाना पूछने गई तो अमित ने फिल्म लगाई हुई थी.......गजनी।जैसे वो रोटी देने के लिए आई....।...।..।तो हंसते हुए बोला वह देखो......आ जाओ गजनी फिल्म देख लो।आमिर खान ने अपनी पूरी बॉडी पर लिखवाया हुआ है इसको भी तुम्हारी तरह भूलने की आदत है।संगीता उसकी बात सुनकर रोटी रखकर जाने लगी पीछे मां और बेटा दोनों हंसने लगे।हां यह भी दस काम शुरू कर लेती है और भूल जाती है।यह आईडिया सही है......संगीता गजनी वाला। संगीता अपने जले हुए हाथ और शब्दों से कभी ना भूलने वाले दर्द को मन में दबा कर फिर से रसोई घर में चली गई।


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