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सतविन्द्र कुमार राणा 'बाल'

Abstract Drama Others

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सतविन्द्र कुमार राणा 'बाल'

Abstract Drama Others

एक दृश्य

एक दृश्य

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सांझ का समय था। वह चौंक पर पहुंचा ही था कि बस भी आ कर रुकी। वह चढ़ा तो संयोगवश उसे एक ही खाली सीट दिखी, जिसे उसने झट-से लपक लिया। वह सीट बस के दरवाजे से बहुत कम दूरी पर थी और गली की ओर ही थी। वहां से चलने के बाद अगले चौंक पर रुकी, वहां से कई सवारी चढ़ीं। चूंकि कोई सवारी उतरी नहीं थी तो कुछ भीड़ बढ़ना स्वाभाविक था। उससे अगले स्टॉप पर भी सवारियां केवल बस के अंदर ही आईं। अधिकतर सवारियां रोज आने-जाने वाली प्रतीत हो रही थीं। जो अपनी-अपनी कर्मस्थली से अपने आशियानों की तरफ लौट रही थीं। किसी को तीस किलोमीटर जाना था, किसी को सौ -सवा सौ किलोमीटर भी। इन्हीं सवारियों में लगभग तीस साल की एक स्त्री भी थी। कुछ देर बाद उसे महसूस हुआ कि वह महिला कुछ कह रही है। वह बेमन से अपनी सीट से उठते हुए बोला, " बहन जी, आप यहां बैठ जा..." इससे पहले कि वह अपनी बात पूरी कर पाता उसे टोकते हुए वह महिला बोली, " आप बैठे रहिए, मुझे सीट नहीं चाहिए। मैं कह रही थी कि बैठे हुए लोग बस थोड़ा ठीक होकर बैठ जाएं।" वह सीट पर सिमट गया।


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