दुर्व्यवहार
दुर्व्यवहार
किशोर जी अजीबो आदमी थे। जब भी ऑफिस में फ्री होते बस अपनी पत्नी की बुराईयों करना शुरू कर देते। और सभी को कहते अपनी पत्नियों से अब अपनी पत्नियों से डरने के दिन गये। अरे हम मर्द है, हम जैसा चाहे वैसा व्यवहार अपनी घर वाली के साथ कर सकते हैं। है तो वह अपने पैरों की जूती। ऑफिस में साथ में काम करने वालों ने किशोर जी को टोक दिया, " क्या आप भी यहाँ फिजूल बात कर रहे हैं, पत्नियां तो मकान को घर बनाती है।
देखो भूल कर भी आप सभी कभी अपनी पत्नियों के साथ दुर्व्यवहार मत करना। शोर कुछ नहींं बोला। मन ही मन सोचने लगा, मैंने कोई गलती तो नहींं की। पर क्या मैं तो मर्द हूँ, कुछ भी कर सकता हूँ। लोग न जाने क्यों मर्द को बदनाम करते हैं, की उसका मर्द उस औरत को मारता है पीटता है।
शोर ऑफिस से घर गया और अपनी पत्नी पर रौब जाडने लगा। अपनी पत्नी के साथ अभद्र व्यवहार करने लगा। खाना खाकर पत्नी से हाथ पैर दबवाने को कहा। उसकी पत्नी गंवार, अनपढ़ नहींं थी, पर अपने पति के सामने बोलना उसका नहींं आता था। सहनशीलता का दूसरा नाम थी। पर वह कब तक यह सहन करती। लोग कहते हैं ना की पाप का घड़ा एक न एक दिन अवश्य फूटता है। एक औसत के मौन व्यवहार को किशोर समझ नहींं पाया था। और एक दिन किशोर की पत्नी घर छोड़ कर चली गई। तब किशोर को समझ में आया कि मैं ही इन परिस्थितियों के लिए जिम्मेदार हूँ। मैंने ही आमंत्रित की इस स्थिति को।
उसने अपने ही हाथों अपने घर को तहस-नहस करने का बंदोबस्त कर डाला।
यहां तो यही बात हुई ना आ बैल मुझे मार। पर अब क्या सब कुछ खत्म हो गया। डॉराजमती पोखरना सुराना भीलवाड़ा राजस्थान मुझे तो डाउट इस मुई रमिया पर भी हो रहा है। कल जब मैने उससे कहा कि तेरा पति हर-रोज दारू पीकर आता है, तुझे पीटता है… तुम उसे छोड़ क्यों नहीं देती, …तो कहने लगी, अरे बीबी जी रोज पीकर आना, गाली-गलौज करना, मारना-पीटना यही तो असली मर्दानगी है। मेरा पति जिस रोज़ पीकर गाली-गलौज नहीं करता और न ही मार-पीट करता, मुझे नींद तक नहीं आती। अरे बीबी जी वो मर्द ही क्या जो बीबी को मारे-पीटे नहीं, गाली-गलौज न करे। कर लो बात यह भी कोई बात हुई। दिल में किया कि कह दूँ जाहिल…गंवार लेकिन नारी सहनशीलता की दाद देकर रह गई। एक महिला ने समस्त महिलाओं के पिट जाने का बंदोबस्त कर डाला। ये तो वही बात हुई आ बैल मुझे मार…
