Dr Jogender Singh(jogi)

Inspirational


4.7  

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दुग्गल सर

दुग्गल सर

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"दो का पहाड़ा सुनाओ ।" दुग्गल सर ने मेरी तरफ़ इशारा किया । 

"जी सर" , मेरे मुँह से एक धीमी सी आवाज़ निकली जो बमुश्किल पास बैठे बच्चे को सुनाई दी । पूरी क्लास मेरे ख़ामोश हिलते होंठों को देख कर हँस पड़ी 

“शोर नहीं ” दुग्गल सर की स्पष्ट आवाज़ से पूरी क्लास चुप हो गयी ।

” सर , इसके मुँह से आवाज़ नहीं निकलती ।” नरेंद्र खड़े हो कर बोला । यह गूँगा बना रहता है । देवेंद्र मैडम इसको रोज़ डाँटती और मारती थी , फिर भी यह बोलता नहीं । नरेंद्र पहली क्लास में प्रथम आया था , जगमोहन सेकंड और मदन थर्ड आया था । मेरा दाख़िला दूसरी क्लास में इस स्कूल में हुआ था , दस महीने पहले । 

देवेंद्र कौर मैडम औसत क़द की साफ़ रंग की औरत थी , उनके बाल हलके भूरे थे । चौड़े फ़्रेम का चश्मा लगाती थी । स्कूल के पहले दिन जब उन्होंने मुझ से गिनती पूछी तो घबराहट के मारे मैं दस तक भी नहीं सुना पाया । एक ज़ोरदार चाँटा मेरे बायें गाल पर पड़ा था । पूरा गाल सुन्न हो गया था । बस उस दिन से स्कूल मेरे लिए एक डरावनी जगह बन गया , जहाँ मेरी पिटाई अक्सर हुआ करती थी । मेरी बड़ी बहन मुझ से दो क्लास आगे उसी स्कूल में पढ़ती थी ।वो अपनी क्लास में हमेशा फ़र्स्ट आती थी ।बहन फ़र्स्ट आती थी और मैं नालायक घोषित हो चुका था । देवेंद्र कौर मैडम के क्लास में आते ही मेरे पूरे बदन में एक सिहरन सी दौड़ जाती , डर के मारे । उनको रोज़ मुझसे कुछ न कुछ पूछना होता था , मेरे जवाब न देने पर या तो मार पड़ती या कान मरोड़ा जाता । बहुत ज़ोर से कान मरोड़ती थी ।

मेरा मन दिन ब दिन पढ़ने से उचाट हो रहा था । घर में चाचा जी कुछ न कुछ पढ़ा देते ! घर पर में उनको सब याद करके सुना भी देता । पर स्कूल में मेरे मुँह से आवाज़ ही नहीं निकलती । सुबह स्कूल जाते समय एक अजीब सा नजारा होता । बड़ी बहन को देर हो रही होती और मैं स्कूल जाने से मना करता रहता । माँ मुझे समझा बुझा कर दीदी के साथ भेजती ,मैं थोड़ी दूर जाकर धीरे / धीरे चलने लगता । देर से पहुँचने पर दीदी को क्लास के बाहर खड़ा होना पड़ता , इसी खीज में दीदी मुझे हाथ पकड़ कर घसीटने लगती । आख़िर दीदी भी तो एक छोटी बच्ची थी , क्लास में फ़र्स्ट आने वाली । 

वो दस महीने एक बुरे सपने की तरह आज भी मेरे जेहन में बसे हुए हैं । उन दिनों मास्टर / मास्टरनियों द्वारा बच्चों की पिटाई का विरोध कोई नहीं करता था । गलती पिटने वाले बच्चे की ही मान ली जाती । इस तरह से सहपाठियों , दीदी , माँ और देवेंद्र कौर मैडम की नज़रों में मैं एक घोषित नालायक हो गया । 

“ अगले महीने से वार्षिक परीक्षा है , यह फेल होगा पक्का ”।मेरी भी बेइज़्ज़ती करवायेगा । दीदी ने एक दिन माँ से बोला ।

” अरे नहीं , मेरा जोगेंदेर फेल नहीं होगा । मेरी अनपड़ माँ ने अधूरे मन से बोला ।

"पक्का फेल होगा ।" दीदी मानो उसी दिन परिणाम घोषित करने पर तुली थी ।

"यह आराम से पास हो जायेगा , चाचा जी की आवाज़ सुन कर मैं दौड़ कर उनसे चिपक गया । “ सब आता है इसको ” चाचा जी ने प्यार से मेरे सिर पर हाथ फेरा ।

उस दिन जब देवेंद्र मैडम की जगह दुग्गल सर क्लास में आ कर हाज़िरी लेने लगे ,तो डर के मारे मेरा बुरा हाल हो गया । दुग्गल सर पचास के पार , आधे गंजे , लम्बे क़द के थे । 

तुम चुप रहो , जब मैं बोलने को कहूँ तभी बोलना । बैठ जाओ । दुग्गल सर ने प्यार से नरेंद्र को डाँटा । फिर धीरे से मेरे पास आए, मेरी पीठ पर प्यार से हाथ फेरा “ अब सुनाओ दो का पहाड़ा ” । मैंने धीमी और स्पष्ट आवाज़ में उनको दो का पहाड़ा सुनाया । बढ़िया , तुम्हें तो पूरा आता है , वेरी गुड ।मुझे विश्वास नहीं हो रहा था । अगले एक महीने दीदी को स्कूल जाते हुये मुझे घसीट कर नहीं ले जाना पड़ा । दुग्गल सर की वजह से स्कूल मुझे डरावना लगना बंद हो गया ।

फिर आया रिज़ल्ट का दिन इकतीस मार्च । सारी कक्षाओं के बच्चे स्कूल ग्राउंड में बैठे थे । सबसे पहले पहली कक्षा का रिज़ल्ट घोषित हुआ । पास होने वाले बच्चों का नाम लिया जा रहा था । जिस बच्चे का नाम लिया जाता , वो खड़ा होता सब ताली बजाते । आख़िर में फ़र्स्ट , सेकंड और थर्ड आने वाले बच्चों का नाम फिर से लिया जाता । 

दूसरी क्लास का रिज़ल्ट बोला जाने लगा , आशीष , भीम , देवकी ————- जोगेंदेर सब ताली बजा रहे थे , मैं खड़ा था , विश्वास नहीं हो रहा था । फिर फ़र्स्ट जगमोहन , सेकंड जोगेंदेर मेरे साथ के बच्चे मुझे उठने के लिए कह रहे थे ,पर मैं उठ ही नहीं रहा था । लोगों ने खींच कर मुझे उठा दिया । तालियाँ बज रही थी । दीदी का मुझे स्कूल तक खींच कर लाने से दोस्तों द्वारा खींच कर उठने तक का यह सफ़र सिर्फ़ एक महीने में तय हो गया । देवेंद्र कौर के तबादले से और दुग्गल सर के आने से । दीगर बात यह रही की तब से लेकर हाई स्कूल तक मेरे लिए हर साल दो बार तालियाँ बजी । यानि मैं प्रथम तीन स्थानों में लगातार बना रहा । थैंक यू दीदी , थैंक यू चाचा जी !धन्यवाद दुग्गल सर!!



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