दिल तो बच्चा है जी
दिल तो बच्चा है जी
रामलाल जी शाम को जैसे घर पहुंचे, घर का वातावरण देखकर थोड़ा संकित हुए। वह कहते हैं ना तूफान से पहले की शांति बड़ी ही भयावह होती है। उन्होंने देखा उनकी धर्मपत्नी आंगन के बीचो-बीच मोढ़े पर विराजमान हैं, नातिन गुंजा चुपचाप अपनी किताबों में खोई है और बहू रसोई में बड़ी शांति से लगी है बेटा भी ऑफिस से आ चुका है लेकिन आज मां के पास ना बैठकर वह भी अपने कमरे में बैठा है।
रामलाल जी दबे पांव अंदर आने का प्रयास कर ही रहे थे कि धर्मपत्नी जी की धारदार ,तिरछी नजर पड़ी गई ,वह मुसकराते हुई आई ..."ए जी आ गए ? बहुत देर लगा दी।आज पिछले 40 सालों में सारी कमाई देकर भी रामलाल जी पत्नी को इतना खुश कभी नहीं देखे जितना कि वह आज थी।उनके मन में शंका के बादल घुमड़ने लगे वह समझ गए कि आज कोई बड़ा विस्फोट होने वाला है। आश्चर्य की बात थी आज श्रीमती जी ने बहु की एक भी शिकायत नहीं की और अपने हाथों से मेरे लिए चाय बना कर लाई।
वाह !चाय पीकर आनंद आ गया, जब से बहू आई तरस गया था श्रीमती जी के हाथों की चाय पीने के लिए जैसे ही चाय खत्म हुई श्रीमती जी नजदीक आकर बोली एक एक बात बताएं....
रामलाल सावधान ...पर कैसे कहते, नहीं रहने दो। वह बोले "हां हां क्यों नहीं ? एक क्यों 2-4 हो तो भी बताओ।
मारे खुशी के श्रीमती जी ने अपना पल्लू होठों से दबाया और मुस्कुराती हुई भीतर कमरे की ओर गई इससे पहले मैं कुछ सोचता श्रीमती जी एक बड़ा सा बैग लेकर हाजिर हुए। आज उनके कदमों में गजब कीफुर्ती थी , गठिया का तो कहीं अता पता ना था। अब तक बहू और नातिन भी आ गई। श्रीमती जी ने बैग खोला और उसमें रखा सारा सामान मेरे सामने एक-एक कर निकाल कर रख दिया। मैं सामान देखकर चकरा गया और उनकी तरफ प्रश्नवाचक दृष्टि से देखा।
तब वह स्वयं बोली "जी बहू को कुछ मत कहो यह सब हमारा है"
अब मेरे दिल को झटका सा लगा मुझे लगा कि मेरी पत्नी, मेरी जीवनसंगिनी को किसी हवा ने तो नहीं पकड़ लिया। एक लिपस्टिक में 1 साल बिताने वाली मेरी पत्नी आज पूरा डब्बा लाई थी, यही नहीं सिंगार के सभी सामान जो आजकल नवब्याहता प्रयोग करती थी वह सब था।
वह बड़े प्यार से एक-एक सामान दिखाती जा रहीथी और शरमाती भी जा रही थी।
"ए जी ! पहले तो घर गृहस्थी और बच्चों के चलते कभी शौक श्रृगार का समय ना मिला पर अब हम बन ठन के रहेंगे , बिल्कुल रानी के जैसे। एक डिब्बी को खोल कर दिखाते हुए बोली "देखो जी ! यह क्रीम हमारा चेहरा पहले के जैसा कर देगी। बहु सब जानती है वह हमारी मदद करेगी उसने हमसे कहा है।"
रामलाल जी ने बहू की तरफ देखा तो उसने विवशता पूर्व क ना में सिर हिलाया।
रामलाल जी समझ गए कि श्रीमती जी के सर पर सुंदर दिखने का भूत सवार हो गया है।
वे बोले "अरे भगवान ! अब तुम्हारी उम्र कहां है यह सब बनाव सिंगार करने की ,बुढ़ापा आ गया हमारा।"
वह जरा तुनकते हुए बोली "चुप रहो जी ! बुड्ढे हो तुम ...अभी मेरी उम्र ही क्या है अभी तो मै जवान हूं पर तुम क्या जानो" कहते हुए अपना सामान समेटने लगी।रामलाल जी सिर पकड़ कर बैठ गए किसी में इतनी हिम्मत नहीं थी जो उन्हें ऐसा करने से रोक पाता शायद इसीलिए कहते हैं बच्चे और बूढ़े एक जैसे होते हैं।
