Shailaja Bhattad

Inspirational


5.0  

Shailaja Bhattad

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दीये

दीये

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"मां, सिर्फ 10 दिन बचे हैं मिट्टी के दीये नहीं आए अभी तक, उन्हें सजाना भी तो है" शीतल ने पूछा। मां ने बताया इस बार पूरा बाजार छान लिया कहीं भी मिट्टी के कच्चे दीये नहीं मिले। सिर्फ़ सजावटी दीये हैं या फिर मोम के दीये।

इस बार इन्हे ही लाना होगा लेकिन शीतल ने कहा नहीं मुझे मिट्टी के दीये ही चाहिए और मैं खुद उन्हें सजाना चाहती हूं इतना कहकर, शीतल बाहर चली गई और अपने आस-पड़ोस के मित्रों से इस बारे में बातचीत की सभी का यही जवाब था अतः सभी बच्चों ने बाजार जाकर पता किया और वाकई वहां कोई भी कच्चे दीये का ठेला या दुकान दिखाई न दी।

तब बच्चे आसपास से दीये बनाने वालों का पता लेकर उनके घर पहुंच गए।

उनसे बात करने पर पता चला कि उन्होंने इस साल से दीए बनाना बंद कर दिया है क्योंकि सबकी दिवाली में चार चांद लगाने में उनके दीये असफल रहे। उनके दीये साधारण होते हैं जो कोई भी पसंद नहीं करता।

 एक कोने में पड़े पिछले साल के 90% बिन बीके दीये उन्होंने दिखाएं और कहा दिन-रात की मेहनत भी पिछली दिवाली उनके घर में दीये नहीं जलवा पाई इसलिए अब उन्होंने दीये बनाना छोड़ दिया है।

 शीतल और बाकी बच्चों ने उनसे वादा किया कि इस दिवाली उनके सारे दीये बिक जाएंगे और वह भी ज्यादा कीमत में।

 यह सब वे उनके साथ मिलकर करेंगे I सभी ने दीयों को सजाकर आकर्षित बनाया और उन्हें फिर से दुकान लगाने के लिए कहा।

इस बार कुम्हारों के घर में न सिर्फ दीये जले वरन् मिठाइयां भी बँटी। उनके सपनों की दुनिया हकीकत बन गई। उनकी खुशियों में चार चांद लग गए।


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