डरावना सत्य
डरावना सत्य
क्या मंजर है आजकल
लगता है जैसे इंसानियत मर गयी
ना ख़ौफ़ ना डर किसी का।
सुबह सुबह जैसे ही समाचार पत्र हाथ में लो तो सबसे पहले समाचार यही दिखाई देता है या तो बलात्कार या शादी का झांसा देकर शोषण।
यह प्रतिदिन के समाचार है। जितने कानून बन रहे हैं उतने ही घटनाएं बढ़ रही हैं।
आज समाचार पत्र जैसे ही हाथ में आया फिर एक कॉलेज की छात्रा की आत्महत्या का समाचार छपा था क्योंकि पहले उसका शारीरिक शोषण हुआ और वह गर्भवती हो गई थी।
इस घटना के साथ ही मेरे स्मृति पटल पर बहुत पुरानी घटना ने दस्तक दी।
मेरी सहेली कविता जो 10 वीं की छात्रा थी । वह अपने मां-बाप की इकलौती संतान थी। अच्छे परिवार की थी ।कक्षा में सीधी सी रहने वाली लड़की ।हम सबका ग्रुप था । हम जबरदस्ती उसके मस्ती करते पर वह कभी प्रतिउत्तर नहीं देती। वह हमारी शैतानियां में भी शामिल नहीं हो पाती थी।
कुछ दिन से कविता बहुत सुस्त रहती थी। हम सब उसे बार-बार पूछते पर वह चुपचाप पीछे बैठ जाती थी। हम सब लोग उस समय बहुत खेलकूद और मस्ती करते थे क्योंकि जब मनोरंजन के लिए कोई टीवी नहीं होता था ।लड़कियों को कोई स्वतंत्रता नहीं थी ।
एक दिन कॉलेज में हम सब पहुंचे तो एक छात्रा बहुत खूब चर्चा हो रही थी कि की 10वीं की छात्रा कविता ने चूहे मारने की दवा खा ली।
यह सूचना हम सब सहेलियों को अंदर तक हिला गई ।हम सब बहुत परेशान हो गए सब हिम्मत करके उसके घर पहुंची । वहां महिलाएं धीरे-धीरे बात कर रही थी कि उसकी सगी मौसी के लड़के ने उसका शारीरिक शोषण किया और उसको इतना डरा दिया कि वह किसी से कुछ नहीं कर पाई और गर्भवती हो गई। जब मां को यह पता चला तो उन्होंने कविता को बहुत प्रताड़ित किया और बहुत सुनाया । उस समय लोग बदनामी से बहुत डरते थे। नतीजा यह हुआ कि उसने मौत को गले लगा लिया। हम सब यह सहेलियां के सामने इतना भयावह और डरावना सत्य था जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती थी।
आज 48 साल बाद भी मैं इस घटना को भुला नहीं पायी। जब भी मैं ऐसी घटना देखती या सुनती हूं तो बस कविता की याद आ जाती है।
क्यों लोग अपनी कुंठित इच्छा दूषित मानसिकता के कारण दूसरों का जीवन बर्बाद कर देते है।
