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Piyush Goel

Inspirational


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Piyush Goel

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डॉक्टर अनिशा

डॉक्टर अनिशा

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वाइट वारियर्स यह उपाधि हमारे स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए है। आज मैं यह एकांकी यह दिखाने के लिए लिख रहा हु की कैसे कुछ लोग इन वाइट वारियर्स का सम्मान नही करते फिर भी यह वाइट वारियर्स इंसान को बचाने के लिए अपनी जान तक कि परवाह नही करते।

पात्र परिचय

सुनीता : माता

अमित : सुनीता का पति / पिता

रजत : बच्चा

डॉक्टर अनिशा : सुनीता की किरायदारणी

पूरे देश मे कोरोना वायरस फैल चुका था ओर हमारे स्वास्थ्यकर्मी लोगो को बचाने के लिए जी जान से जुट गए। उन्ही स्वास्थ्य कर्मियों में से एक थी अनिशा जो कि सुनीता के घर मे किराए पर रहती थी तब एक बार सुनीता ओर अमित दोनों घर थे तब वहां सुनीता कहती है

सुनीता : आज कल यह कोरोना वायरस फैला हुआ है और डॉक्टर इन्हें बचाने में लगे पड़े है इसलिए खतरा डॉक्टरों को है।

अमित : हाँ ! तुम्हारी बात तो सही है पर तुम आज मुझे यह सब क्यो बता रही हो ?

सुनीता : क्योंकि हमारी किरायदारणी भी तो डॉक्टर है। और वो हमारी ही बिल्डिंग में रहती है।

अमित : तो तुम क्या कहना चाह रही हो ?

सुनीता : मैं कह रही हूँ की हमे अनिशा को निकाल देना चाहिए क्योंकि पता नही संक्रमण लेकर घूम रही हो।

तब सुनीता ओर अमित दोनों अनिशा के घर आ गए   वहाँपर

अनिशा : आइए ! मैं आपके लिए पानी ला देती हूं।

सुनीता : न बहन ! पानी पिलाकर मारेगी क्या ?

अनिशा : ऐसा क्यों कहती हो भाभी जी ?

सुनीता : और क्या कह सकती हो ? अब तुम्हारा क्या भरोसा की तुम्हें बीमारी हो।

अनिशा : नही भाभी जी ! मैं अच्छे से अपना ख्याल रखती हूं।

सुनीता : यह सब तो कहने की बातें है बहन। वरना आज कल तुम अपना क्या ख्याल रखोगी। तुम्हारे घर का पानी भी जहर है।

अनिशा : ऐसा न कहो भाभीजी। हम सब यही पानी पीते है।

सुनीता : तो तुम्हारे तो घर् में तो डॉक्टर है। हमारे घर मे थोड़ी न डॉक्टर है।

अनिशा : ऐसा क्यों कहती हो भाभी जी ?

सुनीता : देख बहन ! तुझे संक्रमण हो सकता है और तू हमे भी कर देगी इसलिए तू हमारा मकान खाली कर ओर यहां से चली जा।

अनिशा : भाभी जी ऐसा मत करिए।

अनिशा के बार बार कहने पर भी सुनीता नही मानी और उसने अनिशा को घर से बहार निकाल दिया ।

एक दिन सुनीता, अमित और रजत एक साथ बैठे हुए थे तब रजत को ख़ासी आने लगी तब रजत को हॉस्पिटल लेकर गए वहाँ पर उसका कोरोना टेस्ट पॉजिटिव आया तब सबको चिंता हो उठी तब अनिशा ने ही रजत का इलाज करा। और तब सुनीता को अपनी ग़लती का पता चला।



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