दान
दान
रवि: "राहुल का आज अमेरिका से फोन आया था।"
विनोद: "क्या कह रहा था?"
रवि: "यही कि वह दान करना चाहता है, लेकिन कहां करें इसका सुझाव मुझसे मांग रहा था।"
विनोद: "फिर तुमने क्या कहा।"
रवि: "कहा सोच कर बताता हूं। इस बाबत तुम्हारी क्या सोच है विनोद?"
विनोद: "देखो रवि दान मंदिर, विद्यालय, अस्पताल, अनाथालय कहीं भी किया जा सकता है या फिर खुद का विद्यालय भी खोला जा सकता है।"
रवि: "लेकिन पहले से ही इतने विद्यालय हैं। कई में न तो शिक्षा की अच्छी व्यवस्था है न साजो- सामान , भवन मात्र बनकर रह गए हैं।"
विनोद: "फिर ऐसे ही विद्यालयों में से किसी एक का पुनरुद्धार भी तो किया जा सकता है न ।"
रवि : "अच्छा सुझाव है, क्योंकि नया विद्यालय बनाना प्रकृति का दोहन करने से अधिक कुछ भी नहीं होगा। बस एक और कुकुरमुत्ता ही उगेगा। क्यों न हम हमारे ही दम तोड़ते, जर्जर विद्यालय का जीर्णोद्धार करें।" विनोद: "हाँ, सही है। दान पैसे के रूप में न देकर वहां शिक्षक और सुविधाएं जुटाकर, बाट जोहते विद्यार्थियों के चेहरों पर खुशियां लेकर आएंगे।"
रवि: "खेल के मैदान का भी तो अतिक्रमण हो चुका है। कितनी यादें जुड़ी हुई है इससे हमारी, लेकिन देखो न अब इस पर शॉपिंग कॉन्प्लेक्स बनने जा रहा है।"
विनोद : "जड़ें बहुत कमजोर हो चुकी हैं, उन्हीं पर काम करना होगा।"
रवि : "मैं राहुल से उसकी दान की राशि कितनी है? इस बाबत बात करता हूँ ।"
विनोद : "ठीक है, तब तक मैं भी अपने दूसरे सहपाठियों व एनजीओ से बात करके फंड बढ़ाता हूं, ताकि जिस बदलाव के बारे में हम सोच रहे हैं वह हकीकत बन सके।
