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Dr. Chanchal Chauhan

Action Inspirational Children

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Dr. Chanchal Chauhan

Action Inspirational Children

दान भाव

दान भाव

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एक साधु संत ने एक द्वार पर दस्तक दी और आवाज लगाई- कुछ दे दो संत दरवाजे पर आया है।

एक छोटी बच्ची बाहर आई और बोली- बाबा हम बहुत गरीब हैं। हमारे पास देने को कुछ नहीं है ।

साधु संत बोले- बेटी, मना मत कर, कुछ नहीं है तो अपने आंगन की मिट्टी ही दे दे।

लड़की ने एक मुट्ठी मिट्टी उठाई और भिक्षा पात्र में डाल दी ।

शिष्य ने पूछा- गुरु जी, मिट्टी भी कोई भिक्षा है,

आपने उसे मिट्टी देने को क्यों कहा ?


साधु संत बोले- , अगर वह आज मिट्टी भी ना देती तो फिर वह कभी कुछ नहीं दे पाती ।

आज मिट्टी दी तो क्या हुआ,

देने का संस्कार तो पड़ गया ।

आज मिट्टी दी है,

उसमें देने की भावना तो जागी ।

अगर कल समर्थवान होगी तो फल-फूल, अन्न-धन, वस्त्र भी देगी ।

बस भावना होनी चाहिए।

मेरा इस कहानी के माध्यम से सभी से निवेदन है कि

दान करते समय दान हमेशा अपने परिवार के छोटे बच्चों के हाथों से दिलवाये ।

यदि आज उनके हृदय में दान का बीज अंकुरित होगा, तभी वो अंकुरित बीज बड़ा हो कर समाज सेवा का  वक्ष बनेगा व परहित सरिस धर्म नहिं भाई। पर पीड़ा सम नहिं अधमाई का भाव जागृत व पैदा होगा ।



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