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Priyanka Gupta

Drama Romance


4.5  

Priyanka Gupta

Drama Romance


छुपे रुस्तम

छुपे रुस्तम

7 mins 191 7 mins 191

कॉलेज लाइफ में कई प्रेम कहानियां बनती हैं और बिगड़ती हैं। जनम-जनम का साथ निभाने का वादा करने वाले प्रेमी भी ; कॉलेज ख़त्म होते ही तू तेरे ,मैं मेरे रास्ते की बातें करते हैं। नेहा के कॉलेज में भी ऐसी कई प्रेम कहानियां थी ;जिनके बारे में सबको लगता था कि ये दोनों लव बर्ड्स तो जरूर शादी करेंगे। लेकिन ऐसे में जब नेहा ने अपनी और ऋषभ की शादी की फोटोज फेसबुक पर डाले तो बधाई से ज्यादा उत्सुकता और सवालों भरे कमेंट आये।

कॉलेज के सभी साथियों का यही कहना था ,"यार तुम दोनों ,कॉलेज में तो कभी लगा ही नहीं कि तुम्हारे बीच कुछ चल भी रहा है। तुम तो दोनों ही छुपे रुस्तम निकले। लेकिन चलो कॉलेज की हमसे छुपी हुई ही सही ,कोई प्रेम कहानी तो शादी तक पहुंची। " नेहा और ऋषभ की कहानी थी भी अजीब ,उन दोनों को भी पता ही नहीं चल पाया था कि उनकी दोस्ती कब प्यार में बदल गयी थी।

नेहा ,पूजा और स्नेहा इन तीनो का कॉलेज में ग्रुप था ,तीनों में तगड़ी छनती थी। तीन की तिगड़ी के नाम से कॉलेज उन्हें जानता था। ऋषभ नेहा की सहेली पूजा को पसंद करता था। यह बात उनकी क्लास में सभी को पता थी , पूजा भी जानती थी। ऋषभ और उसके दोस्तों से इस तिगड़ी की अच्छी बातचीत थी और धीरे -धीरे तिगड़ी के ग्रुप में वे भी शामिल हो गए या तिगड़ी उनके ग्रुप में शामिल हो गयी।

पूजा ने ऋषभ के प्यार को न तो कभी स्वीकार किया था और न ही अस्वीकार किया था। उन दोनों की बातचीत भी होती थी। पूजा के इस व्यवहार के कारण ही शायद ऋषभ को अपने प्यार की स्वीकृति की उम्मीद थी। ऋषभ की नेहा से भी अच्छी बातचीत होती थी। कभी- कभी नेहा को पूजा पर गुस्सा भी आता था कि वह ऋषभ को साफ़ -साफ़ मना क्यों नहीं कर देती। बेचारे को त्रिशंकु बनाकर ;अधर झूल में लटका रखा है। लेकिन पूजा को इन सबसे कोई फर्क नहीं पड़ता था। ऋषभ उसके लिए नोट्स लाता ,उसकी कॉलेज के लेक्चर समझने में मदद करता ,जब भी पूजा को ज़रुरत होती ,ऋषभ एक टांग पर खड़ा मिलता। आज जब लड़के प्यार में,लड़की से सब कुछ पाने की चाह रखते हैं और न मिले तो रिश्ता ही ख़त्म कर लेते हैं ;वहाँ पता नहीं ऋषभ किस मिटटी का बना हुआ था ?

पूजा कभी कभी ऋषभ की बेइज्जती भी कर देती थी। कभी मन होता तो ठीक से बात करती और कभी -कभी उसके फ़ोन कॉल्स का जवाब तक नहीं देती। तब नेहा ऋषभ को सम्हालती थी। नेहा को ऋषभ से सहनुभूति होती थी। वह उसे समझाती थी कि,"तू और पूजा नदी के दो किनारे हो ,जो कभी मिल नहीं सकते। तुझे अपने प्यार के बदले में कभी प्यार नहीं मिलेगा। तेरी तकलीफें बढ़ेगी ही ,ख़त्म नहीं होगी। "

तब ऋषभ कहता ,"किनारे मिल नहीं सकते ,लेकिन समंदर आने तक साथ में तो चल ही सकते हैं। मैंने प्यार किया है ,यार व्यापार नहीं ,जो बदले में प्यार मिले तो ही प्यार करूँ। तकलीफों की तू परवाह मत कर ,तेरा दोस्त रांझा या मजनू नहीं है ;जिसे एक बार ही प्यार हो। लेकिन जब तक दोबारा ऐसा ही प्यार नहीं होगा ,तब तक तो दर्द रहेगा ही। "

ऋषभ की बात ने माहौल को हल्का बना दिया था। " तेरी दोस्त हूँ न ;इसलिए थोड़ी फ़िक्र तो होती है और तेरे लिए बुरा भी लगता है। काश पूजा तुझे और तेरे प्यार को समझ जाए। और अगर दूसरी वाली ने भी तुझे भाव नहीं दिया तो ? "नेहा ने मुस्कुराते हुए कहा।

" फिर तीसरी बार करेंगे प्यार ;और क्या ?", ऋषभ ने कहा और दोनों ठहाका मारकर हंस पड़े.

रोते को भी हंसा देने में माहिर था ऋषभ .Sense  of humor गजब था उसमें .अपने दर्द को बखूबी छुपाना जानता था . नेहा धीरे -धीरे ऋषभ के अंदर छुपे हुए अच्छे इंसान को जानती जा रही थी। ऋषभ हमेशा धैर्य बनाये रखता था। नेहा ने कभी भी ऋषभ को गुस्से में नहीं देखा। जब भी सभी दोस्त कहीं बाहर भी जाते ,ऋषभ रिक्शे वालों ,वेटर आदि सभी से बड़े प्यार से बात करता था।

ऋषभ की अच्छाइयाँ नेहा के दिल में घर बनाती जा रही थी। नेहा की ऋषभ के प्रति सहानुभूति कब प्यार में बदल गयी;उसे पता भी नहीं चला। लेकिन नेहा ने अपनी फीलिंग्स अपने तक ही रखी ,लेकिन अब वह ऋषभ का और भी ज्यादा ध्यान रखने लग गयी थी। ऋषभ को दुखी देखती तो अब वह भी दर्द महसूस करने लगी थी। वह ऋषभ को हर हाल में खुश देखना चाहती थी।

ऋषभ को अपने दिल की बात न बता पाने के कारण वह रातों को उठ उठ कर आंसू बहाती थी। उसे समझ नहीं आ रहा था ,उसे ऋषभ से प्यार कैjसे हो सकता है ?वह तो पूजा के प्रति ऋषभ की फीलिंग्स अच्छे से जानती थी। वह प्यार का यह त्रिकोण कैसे बना बैठी ?इंसान कितना ही समझदार हो ,लेकिन भावनाओं के सामने मजबूर हो जाता है। नेहा के दिल और दिमाग में जंग होना लाजिमी था ,लेकिन जीतता हमेशा दिल ही था।

नेहा अपनी भावनाओं को जितना शांत करने की कोशिश करती ,भावनाओं में उतनी ही तेज़ गति से उफान आता। पानी के बहाव को जितना रोकने की कोशिश करते हैं ,वह उतनी ही तेज़ गति से आता है। खुशमिज़ाज़ नेहा अब एक कृत्रिम मुस्कान चेहरे पर चिपकाकर घूमने लगी थी।

उन्ही दिनों सभी लोग कॉलेज की तरफ से पिकनिक पर गए ,ऋषभ और नेहा साथ -साथ ही बैठे थे। दोनों एक दूसरे से बातें कर रहे थे ;दोनों की बातें ख़त्म ही नहीं हो रही थी। पहुंचने के बाद सब लोग बोटिंग के लिए गए ,बोट पर चढ़ने के लिए ऋषभ ने अपना हाथ बढ़ाकर नेहा को सहारा दिया ,नेहा का दिल तो बस निकलकर बाहर ही आना चाह रहा था।

नेहा ऋषभ को कहना चाहती थी ," अभी के लिए ही नहीं ,पूरी ज़िन्दगी के लिए मेरा हाथ थाम लो। अब अगर खुदा भी हाज़िर हो जाए तो यह हाथ न छोड़ना। "लेकिन कह न सकी। अपनी फीलिंग्स बताकर वह ऋषभ को दुखी करना नहीं चाहती थी।

उधर नेहा में आये परिवर्तन ऋषभ से नहीं छुपे थे ,ऋषभ ने नेहा को कई बार कुरदने के कोशिश की ; लेकिन नेहा के मन की थाह नहीं पा सका। तब ऋषभ ने नेहा को अकेले बाहर ले जाने का प्लान किया ,ताकि कॉलेज के माहौल से दूर उससे बात कर सके।

"नेहा तू मेरी सबसे अच्छी दोस्त है । आज तक मुझे तुझसे अच्छा इंसान नहीं मिला। मैं अपनी दोस्त को ऐसे दुखी नहीं देख सकता। तुझे कोई परेशानी हो तो मुझे बता । "ऋषभ ने कहा।

"तू भी मेरे सबसे अच्छा दोस्त है । लेकिन कुछ बातें ऐसी होती हैं ,जो आप अपने दोस्त से तो क्या अपने आप से भी नहीं करना चाहते। परेशानी तो हमारे नज़रिये में होती है। गिलास को आधा खाली देखना या आधा भरा देखना हम पर निर्भर करता है। लेकिन तुने मुझसे पूछा तो, मुझे बहुत अच्छा लगा। "नेहा ने जबरदस्ती मुस्कुराने की कोशिश करते हुए कहा।

"नेहा , मैं जानता हूँ ;तू बहुत मजबूत हो। पर फिर भी अपने दिल की बात बताने से कई बार 'गिलास आधा खाली है या आधा भरा हुआ ' द्वंद्व ख़त्म हो जाता है। "ऋषभ ने अपने प्रयास जारी रखे।

"ऋषभ तू क्या ,कोई भी कुछ नहीं कर सकता। "नेहा ने टालने की भरसक कोशिश की।

"नेहा , I Like you . तुझे हमेशा खुश देखना चाहता हूँ। "ऋषभ ने कहा।

अब तक अपनी भावनाओं को दबाकर बैठी ,नेहा और अधिक उन्हें रोक नहीं सकी," ये क्या I Like you

,I Like you लगा रखा है। but ,I love you . तुझसे प्यार हो गया। क्या करूँ?बस हो गया। तू नहीं करता तो मत कर। " नेहा फूट- फूट कर रोने लगी।

ऋषभ ने नेहा को गले लगाते हुए कहा ," यार तू ही तो वह लड़की है। दूसरी बार प्यार हो जाए ,वो वाली। तू पूजा के लिए मेरी फीलिंग्स जानती थी ;इसलिए तुझे बताने से डर रहा था। तू सोचती कैसा छिछोरा लड़का है ?अभी तक बेस्ट फ्रेंड से प्यार की बातें कर रहा था और अब मुझ पर लाइन मार रहा है . मुझे डर था कि अगर तुझे मेरी तेरे प्रति फीलिंग का पता चला तो, कहीं तू मुझसे दोस्ती ही न तोड़ दे; तुझे खोना नहीं चाहता था . मेरी वजह से तू इतने दिनों परेशान रही मुझे माफ़ कर दे यार .I love you यार। "

नेहा ने मुस्कुराकर कहा ,"but ,i hate you ."

इधर नेहा और ऋषभ की प्रेम कहानी का आगाज हुआ और उधर उन लोगों के कॉलेज ख़त्म होने का टाइम आ गया . इसलिए नेहा और ऋषभ की लव स्टोरी कॉलेज के  साथियों से छुपी हुई रह गयी थी . 7 साल के लम्बे रिलेशनशिप के बाद ऋषभ और नेहा की शादी हो गयी और एक अनसुनी सी कॉलेज की प्रेमकहानी शादी की मंज़िल तक पहुंची।


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