V k Saboo

Drama Romance Tragedy


4.5  

V k Saboo

Drama Romance Tragedy


चाँद रहनुमा

चाँद रहनुमा

4 mins 85 4 mins 85

पड़ोस में रहती थी वो मेरे नाम था नीलिमा। आते जाते उसे दीवार की ओट से निहारना और उसके दिलकश हुस्न का दीदार करके उफ्फ उफ्फ करना यही रूटीन था मेरा क्योंकि उसे फेस कर सकूं इतनी कुव्वत नही जुटा पाया कभी । एक ही क्लास में पढ़ते थे सबको पता था। मेरी इस अनकही चाहत के बारे में बस खबर उसको ही नहीं थी या शायद खबर तो उसे भी थी पर पहल कैसे करती वैसे भी लड़के ही तो प्रोपोज़ करते है लड़कियां कहाँ पहल करती है। साल दर साल गुजर गए स्कूल कॉलेज सब खत्म पर मेरी हिम्मत कभी न हुई उसे अपने मन की बात कह पाने की । उसका कॉलेज खत्म होते ही उसके घरवालों ने उसकी शादी की दौड़ धूप शुरू कर दी ये खबर मुझे भी थी पर अभी भी मेरी हिम्मत का हाल वही का वही मेरे दोस्त भी अब डरपोक बिल्ला कहने लगे थे मुझे और गाहे बगाहे मजाक बनाने लगे थे मेरी इस एकतरफा चाहत का । 

गर्मियों की रातों में अक्सर हम छत पे सोते थे और कहते है ना महबूब को चांद में अपनी महबूबा का दीदार होता है वो मेरी मेहबूब तो न थी पर एकतरफा चाहत जरूर थी और मैं भी रात में सोते समय उसकी ही कल्पनाओ में खोया चांद में नीलिमा की सूरत देखा करता था और सोचता था कि काश वो ही आ जाये और कहदे मुझे की वो मुझे चाहती है। पर ये तो ख़्वाब खयाल भर थे कैसे पूरे होते। 

आखिर पता चला उसकी शादी तय हो गयी है और वो बस शादी करके विदेश चली जायेगी । उसे खो देने के एहसास ने मुझे विचलित तो बहुत किया पर हिम्मत अब भी नहीं हुई कि उसे कह सकू अपना हाल ए दिल और वो दिन भी आ गया जब वो शादी करके चली गयी और मैं अब भी उसकी एकतरफा चाहत में खोया पर हिम्मतविहीन उसे बस विदा होते देखता रहा।

उसकी शादी के 2 साल बाद जब मेरी नौकरी लग गई तो मेरे घरवाले भी रिश्ता देखने लगे और मेरी भी शादी हो ही गई । एकदिन मैं अपना सोशल मीडिया एकाउंट स्क्रॉल कर रहा था तो फ्रेंड्स सजेशन लिस्ट में नीलिमा को देखा अचानक उसकी वो सलोनी सूरत आगे आ गई । सोचने लगा इसे रिक्वेस्ट भेजू या नहीं उफ्फ ये हिचकिचाहट आखिर हिम्मत करके मैंने उसे रिक्वेस्ट भेज दी और धड़कते दिल से इंतज़ार करने लगा उसके रेस्पोंस का । 2 दिन बाद उसने मेरा न्यौता स्वीकार कर लिया और मैने देखा वो ऑनलाइन थी पर हाय रे मेरी झिझक मैं उसे हाय बोलने में भी हिचक रहा था, पता नही उसे मैं याद भी हूँ या ऐसे ही उसने फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार कर ली फाइनली मैंने कीबोर्ड पे हाय टाइप करके एंटर कर ही दीया और फिर वही इंतज़ार उसने 2 मिनिट बाद हेल्लो कहा

मैं - पहचाना ?

वो - हाँ रे तुम्हे कैसे भूल सकती हूं ?

मैं - अच्छा ! वो कैसे ? 

वो - मोहल्ले के इनफैक्ट मेरी लाइफ के सबसे शर्मीले लड़के हो तुम (बहुत तेज हसने वाला इमोजी )

मैं - अच्छा मतलब तुम नोटिस करती थी मुझे ?

वो - हां जी पर तुम कभी आये ही नही सामने अब आये जब कुछ हो नही सकता 

मैं - हम्म पर तुम्हे अगर फीलिंग्स थी तो तुम भी तो कह सकती थी न

वो - अच्छा जी लडकिया कभी करती है प्रोपोज़?

मैं - हम्म ऐसे तो लेडीज फर्स्ट लेडीज फर्स्ट और प्यार जताने में  

वो - हम्म ऐसा ही है खैर और बताओ कैसी है तुम्हारी लाइफ और वाइफ ?

मैं - सब ठीक है तुम कहो

वो - यहाँ भी सब ठीक है पर बहुत ज्यादा ठीक हो सकता था अगर सही वक्त पे हमने दिल की सुनी होती चलो बादमे बात करती हूं बाय

मैं कुछ कहता उससे पहले वो ऑफ़लाइन हो गई पर उसकी बातों से महसूस हुआ कि जैसे वो शिकायत कर रही थी शायद मुझसे या शायद खुद से

आज भी मैं छत पे सोया हूँ फिर से चांद में उसका दीदार करने पर बैरी चांद आज बादलों की ओट से निकल ही नहीं रहा। पता नहीं शर्मा रहा है या खफा है ?


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