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Suman Sachdeva

Abstract

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Suman Sachdeva

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*बुके बनाम शाल*

*बुके बनाम शाल*

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मिसेज सुधा कपूर आज शाम को डिनर पर घर आने वाले विशेष मेहमान के लिए बुके खरीदने काम वाली बाई बेला के साथ बाजार गयी। दो तीन दुकानों पर घूमने के बाद एक सुंदर सा बुके पसंद आया । महंगा होने के कारण बेला मोल भाव करने लगी तो सुधा बोल उठी कि कोई बात नही , पैसे की कोई बात नही, बुके सुंदर होना चाहिए।

  शाम को उस विशेष अतिथि को बहुत चाव से बुके भेंट किया गया व इन विशेष क्षणों को याद रखने के लिए मोबाइलों में खूब फोटो खींची गयी।। खाना खाने के बाद वे अतिथि उस सुंदर बुके को कमरे के एक कोने में लगे मेज पर ही छोड़ कर चले गये थे। 

  सुबह सफाई करते समय वही बुके बेला को ले जाने के लिए कह कर मिसेज कपूर तो अपने काम में मग्न हो गयी मगर ठंड में ठिठुरती बेला पोंछा लगाते समय सोच रही थी कि बुके खरीदने की बजाय इन्हीं रुपयों से मालकिन मुझे एक शाल ले कर दे देती तो मेरे कितना काम आती।


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