भूतों की चौपाल
भूतों की चौपाल
भूतों की चौपाल
(जब आत्माएँ मिल बैठें... गप्प लड़ाएँ!)
📍 स्थान: श्मशान के पीछे पीपल का पेड़
⏳ समय: आधी रात – जब इंसान खर्राटे मारते हैं और भूत चाय सुड़कते हैं।
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मुखिया भूत – भूतनाथ (गंभीर स्वर में):
"सुनो-सुनो! आज की चौपाल का महत्वपूर्ण मुद्दा है – इंसानों में डर की भारी कमी! अब कोई हमें देखकर चीखता नहीं, उल्टा कैमरा निकाल लेता है—‘ओ भूत अंकल, एक पोज़ और देना!’ यह हालात हमें बदलने होंगे!"
🔹 भूत #1 – पिशाच प्रसाद:
"भाई, मैं छत पर लटका था, सोचा किसी को डराऊँ। पर इंसान बोला—'अरे तेरे जैसे दो तो मेरे इंस्टा फॉलोअर्स में हैं!' और फिर रील बना ली!"
🔹 भूत #2 – चुड़ैल चंपा:
*"मुझे तो एक बच्ची ने कहा—'आंटी, आप हॉरर कॉमेडी की शूटिंग कर रही हैं क्या?'... मतलब इज़्ज़त का जनाज़ा निकल गया!"*
🔹 भूत #3 – मुर्दा माखन:
"मैं वॉशिंग मशीन में से आवाज़ निकाल रहा था – डराने के लिए। इंसान बोला—'लगी तो नहीं? स्पिन मोड में ध्यान रखा करो!'"
🔹 भूत #4 – जोगी जोगन:
"गलियारे में अकेले एक इंसान को देखा, सोचा उसे डराऊँ। वो बोला—'अरे वाह! हॉरर थीम वाला इवेंट चल रहा है क्या?' और सेल्फी लेने लगा!"
भूत #5 – ढोलक दादा:
"कब्रिस्तान में जब झूमते हुए आवाज़ें निकालता हूँ, तो लोग डरने की बजाय लाइव कंसर्ट समझ लेते हैं!"
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भूतनाथ (विचारशील स्वर में):
"अब हमें नए ज़माने का डर फैलाना होगा। डिजिटल टूल्स यूज़ करो!"
🔸 पिशाच प्रसाद:
"मतलब WhatsApp पर वो वाले मेसेज? ‘अगर तुमने ये 5 लोगों को नहीं भेजा तो रात 12:01 पर मैं तुम्हारे WiFi से कनेक्ट हो जाऊँगा!’"
🔸 चुड़ैल चंपा:*
*"या फिर Zoom मीटिंग में घुस जाना—वीडियो ऑन करके घूरो। क्या डरेंगे, सबके पसीने छूटेंगे!"*
🔸 मुर्दा माखन:
"Netflix पर शो बना दें—‘भूतों की चौपाल: डर नहीं, ठहाके हैं!’"
🔸 जोगी जोगन:
"या हॉरर व्लॉगर्स को पकड़ें। वे कैमरे लेकर हमारे इंटरव्यू लेंगे, फिर हमें ही इंटरनेट सेलिब्रिटी बना देंगे!"
चुड़ैल चंपा:
"अगर इंसान हमें मज़ाक बना सकते हैं, तो हम भी उन्हीं के ट्रेंड्स पर चल सकते हैं!"
और अगले ही दिन, "भूतों की चौपाल" नाम का *एक इंस्टाग्राम पेज बनता है—जहाँ भूत खुद अपने मज़ेदार किस्से डालते हैं!
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📢 भूतनाथ (घोषणा करता है):
"सुनो-सुनो! अगले हफ्ते पिकनिक है – कब्रिस्तान नं. 13 पर। चाय, पकौड़े और डरावनी दाढ़ी वाले DJ की व्यवस्था है। अब डराएंगे भी... और हँसाएंगे भी!"
(सभी भूत जोर-जोर से हँसते हैं!)
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🎭 सीख:
डराने का ज़माना गया, अब तो भूत भी रचनात्मक हो गए हैं! जब आत्माएँ गप्प लड़ाती हैं, तो डर नहीं... ठहाके सुनाई देते हैं।
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