भूतहा बस
भूतहा बस
दोनो के चीखते ही ,पूरे बस में बैठे पैसेंजर इसी तरह अपनी गर्दन घुमा कर उनकी ओर देखते है ,।
कंडक्टर कहता है ,"अरे भाई क्यों चीख रहे हो , तुम्हारा रामपुर आएगा तो उतर जाना ,संगीता तो बेहोश हो चुकी थी , रोहन की भी हालत खराब थी फिर भी वह हिम्मत करके कंडक्टर से पूछता है , "कंडक्टर साहब ये ये सब भूत हैं।"
उसके आगे वाला खड़ा होकर अपनी गर्दन से सर निकाल कर उसके सामने करता है , उसका धड़ अलग था और गर्दन के साथ सर अलग था , उसका सर कहता है "भाई भूत किसे कह रहे हो , मैं तुम्हे भूत नजर आ रहा हूं।"
रोहन की भी घबराहट इतनी बढ़ जाती है की वह भी चीख कर बेहोश हो जाता है।
संगीता और रोहन दोनो को ही कुछ समय में होश आता है , तो वह सभी को अपनी ओर देखते हुए देख घबराते हैं।
एक भूत कंडक्टर से पूछता है "तुमने इन दोनो को इस बस में क्यों बिठाया ,ये बस तो हम लोगो के लिए ही है।"
कंडक्टर कहता है ,"में खुद नही समझ पा रहा हूं की यह दोनो इस बस में कैसे आ गए इसमें तो सिर्फ और सिर्फ वही आत्माएं आती हैं जो इसके रेगुलर पैसेंजर हैं, इसका मतलब है ये लोग किसी खास प्रयोजन से इस बस में पहुंचे हैं।"
रोहन कहता है ,"नही नही हमारा कोई खास प्रयोजन नहीं है , हैं तो प्रेमी है ,और घर से भाग कर शादी करने के लिए इसके गांव रामपुर जा रहे हैं।"
सभी चौकते हैं , ड्राइवर गाड़ी रोक देता है।
संगीता घबरा कर कहती है ,"रोहन बस रुक गई है ,उतर जाते हैं।"
एक कहता है ,"अरे यार सभी प्रेमी इसी बस में क्यों चढ़ते हैं।"
संगीता चौंक कर कहती है , "सभी प्रेमी।"
संगीता की बात सुन हर सीट से एक एक जोड़े गर्दन ऊंची कर कहते हैं ,"हां हां हम सभी प्रेमी हैं, हम भी भागकर ही शादी करना चाहते थे पर अभी तक भटक ही रहे हैं इस बस में।"
रोहन चौक कर कहता है ,"अरे बापरे संगीता हम लोग गलत बस में चढ़ गए चलो उतरो जल्दी से वह खड़े होते हैं तो बस अपने आप चल पड़ती है ,*!!
दोनो फिर भी उठकर आगे बढ़ना चाहते हैं तो उनके पैर जैसे जम से गए थे , *"!!
इधर रात के तीन बजे नरेंद्र अपने आदमियों के साथ संगीता के घर पहुंचता है और उनका दरवाजा खटखटाता है।
संगीता के पिता रमेश दरवाजा खोलता है ,तो सामने इतने सारे लोगो को देख चौक उठता हैं ,उनकी पत्नी शोभा पूछती है ,"आप लोग कौन है ,क्या चाहिए।"
नरेंद्र कहता है ,"तुम्हारी बेटी संगीता कहां है।"
शोभा कहती है , "वह अपने सहेली के पास गई है।"
नरेंद्र कहता है "कौनसी सहेली कहां रहती है।"
रमेश कहता हैं ,"आप कौन हैं और इतनी इंक्वायरी क्यों कर रहे हैं ,*!?
एक आदमी जो उनके साथ था वह कहता है ,"अच्छा है की सर इंक्वायरी ही कर रहे हैं , वरना यह तो मरते पहले हैं पूछते बाद में हैं।"
रमेश कहता है "वह सब तो ठीक है ,पर आप लोग मेरी बेटी के बारे में क्यों पूछ रहे हैं।"?
नरेंद्र कहता है ,"रोहन को जानते हो।"?
रमेश और शोभा दोनो ही चौकते हैं ,!!
शोभा कहती हैं ,"हां वो संगीता के साथ कॉलेज में पढ़ता था ,एक दो बार घर पर आया था।"
वह इस मामले में थोड़ा झूठ बोल देती हैं , जबकि रोहन करीब करीब रोज ही आता था , *"!!
नरेंद्र गौर से उनकी ओर देखता है और कहता है ,"बहन जी जब झूठ बोलना न आए तो मत बोला करो , मेरे जानकारी के मुताबिक वह रोज ही आता था।"
वह आवाज देता है तो रोहन और संगीता का कॉमन फ्रेंड कमल था ,उसके चेहरे पर थप्पड़ों के निशान थे वह अंदर आता है , उसके साथ बहुत बुरी तरह से पिटाई की गई थी , वह रमेश और शोभा को देख रोने लगता है।"
रमेश कहता है ,"इस बेचारे को क्यों मारा , !?
नरेंद्र कहता है ,"इसे नही मारता तो , फिर तुम्हे मरना पड़ता इसलिए पहले इसे पकड़ा अगर मार खाने से पहले बकता तो मार नही खाता पर यह तो पक्की दोस्ती निभा रहा था।"
शोभा कहती हैं ,"बैठ बेटा कमल मैं तेरे लिए हल्दी वाला दूध गरम करती हूं।"
नरेंद्र कहता है ,"हमारे लिए चाय भी बना दो।"
शोभा कहती है ,"इतना दूध नहीं है दूध वाला सुबह पांच बजे आता है।"
दूसरा आदमी कहता है ,"साहब के लिए दूध वाला बना दो और हमारे लिए ब्लैक टी भी चलेगा ,इस कमल ने परेशान करके रख दिया।"
कमल अपने आंसु पोछता हैं ,उसे काफी मार लगी थी उसका चेहरा काला पड़ गया था।"
रमेश नरेंद्र से पूछता है ,"भाई साहब आप तो घर में घुसकर तो ऐसे बैठे हैं जैसे रिश्तेदार है ,अपना परिचय नही दिया अभी तक।"
एक आदमी कहता है ,"जिसको लेकर तुम्हारी बेटी भागी है ,उस रोहन के फादर है ,नरेंद्र तोमर ,यहां के सबसे बड़े आदमी नाम नही सुना है , *"!!
रमेश और शोभा चौकते हैं।"
शोभा कहती है ,"मेरी बेटी क्यों लेकर भागेगी ,?? वह रोहन ही उसके पीछे पड़ा रहता था।"
रमेश कहता है ,"शोभा ये सोचो बच्चे कहां गए होंगे , *"!!
कमल कहता है ,"वह दोनो आपके गांव रामपुर गए हैं ,वहां जा कर कोर्ट मैरेज करने वाले हैं।"
रमेश और शोभा चौकते है ,शोभा गांव की चाभी देखती है , और कहती है ,"हे भगवान ,गांव के घर की चाभी भी गायब है।"
नरेंद्र कहते हैं , "रमेश बाबू ,अब आप हमारे साथ चलेंगे अपने गांव।"
रमेश कहता है ,"चलना तो पड़ेगा पर समझ नही आ रहा है की इन बच्चो को इतनी भी क्या जल्दी थी भागने की अरे हमसे बात करनी थी हम बैठकर कोई रास्ता निकाल लेते।"
नरेंद्र कहता है ,"मेरे कारण भागे हैं , मैं ही विलेन हूं , आज के बच्चे मां बाप को ही विलेन समझते हैं।"
क्रमशः

