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Rashmi Mishra

Abstract

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Rashmi Mishra

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बहु की सोच

बहु की सोच

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एक बार एक पति-पत्नी ऐसे ही बैठे कुछ गप -शप कर रहे थे। पत्नी ने पति से कहा कि हमारे बच्चे कैसे बड़े हो गए, जीवन की आपाधापी में कुछ पता ही नहीं चला।अब तो उनके घर बसाने के दिन आ गए हैं।पति ने हामी भर दी और कहा,"तुम ठीक कहती हो'।

 ऐसा इसलिए कहा क्योंकि बड़ा बेटा नौकरी में उन्नति कर रहा था और छोटा भी बस नौकरी में लगने ही वाला था। किन्तु समस्या ये थी कि उनका शहर में अच्छा घर नहीं था। खैर,बड़े बेटे का विवाह उन्होंने अपने पुराने घर से ही करने का फैसला किया।

 बड़े बेटे का विवाह बड़े ही धूम-धाम से हुआ।सारे सगे-संबंधी बहुत खुश थे।बहु भी सर्वगुण संपन्न थी। सुन्दर, पढ़ी- लिखी, सभी कार्य में निपुण थी।उन दम्पति को बस एक ही चिंता थी कि उनका शहर में अच्छा घर नहीं है। बड़े बेटे को आफिस की ओर से बड़ा घर मिला तो उसमें रहने की बात आई। बेटे-बहु ने आपस में सलाह-मशविरा किया।बहु ने अपने माता-पिता तुल्य पूजनीय सास-ससुर को अपने इस घर में ही रहने का न सिर्फ आग्रह किया बल्कि अपने साथ ही रखा।वे सभी खुशी -खुशी वहां रहने लगे।बहु की सूझबूझ से मां भी चिंता मुक्त हो गईं।


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