भगवान और ख़ुदा की बातचीत
भगवान और ख़ुदा की बातचीत
एक ही गली में मंदिर और मस्जिद थे। गली में एक बोर्ड लगा था, जिस पर लिखा था..."धर्म ख़तरे में है।"
एक दोपहर कुछ हिंदू युवकों और मुस्लिम युवकों में किसी धार्मिक बात को लेकर झगड़ा हो गया। दोनों पक्ष लाठियाँ ले आये और एक दूसरे को लाठियों से पीटने लगे। बीच बचाव करने पर किसी तरह झगड़ा ख़त्म हो पाया।
आधी रात के सन्नाटे में मंदिर से भगवान ने मस्जिद के ख़ुदा को आवाज़ लगाई, "सुना ख़ुदा! गली में हमारे नाम पर लाठियाँ मारी जा रही हैं।"
ख़ुदा ने जवाब दिया, "हाँ भगवान! मैंने तो कहा था कि सभी में मुझे देखो।"
भगवान ने कहा, "मैंने भी कहा था कि सभी में मैं हूँ। यह बीच की दीवार इन्होंने कब बना ली?"
ख़ुदा हँसे और बोले, "आपकी प्रार्थना भी तो इनकी लड़ाई नहीं मिटा रही है और मेरी अज़ान भी इनके दिलों तक नहीं पहुँच रही है।"
भगवान दुखी होकर बोले, "हमने तो प्रेम सिखाया था।"
भगवान की बात सुनकर ख़ुदा उदास होकर ख़ामोश हो गये और फिर भगवान भी चुप हो गये।
अगली सुबह गली के एक पुराने मकान में आग़ लग गई। मकान के अंदर गली का एक अनाथ बच्चा फँसा हुआ था।
आग़ के बारे में जानकर मंदिर के पंडित जी चिल्लाते हुए सब लोगों को बुला लाये और मस्जिद के इमाम साहब सीढ़ी और पानी लेकर आये।
हिन्दू युवकों ने पानी डालकर आग़ बुझाने की कोशिश की और मुस्लिम युवकों ने सीढ़ी पर चढ़कर बच्चे को मकान से बाहर निकाला। क्योंकि वह बच्चा किसी एक का नहीं, वह तो पूरी गली का बच्चा था।
उस दिन पहली बार किसी ने बोर्ड नहीं पढ़ा। सबने सिर्फ़ इंसान देखा। भगवान और ख़ुदा यह सब देखकर मुस्कुरा रहे थे।
