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Anita Sharma

Tragedy Inspirational


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Anita Sharma

Tragedy Inspirational


बेटी ने तो नाम रोशन किया है।

बेटी ने तो नाम रोशन किया है।

4 mins 171 4 mins 171

" भाईसाहब अब तो आप अपनी बेटी की पढ़ाई लिखाई छोड़ हाथ पीले कर दीजिये जल्दी से, कहीं ऐसा न हो कि ये बात चारों तरफ फैल जाये और उसके विवाह में परेशानी होने लगे। अब अपनी बिटिया को अफसर बनाने के सपने छोड़ ही दो।"


अस्पताल में पीहू को देखने आई पीहू के पापा सुरेश की मुँह बोली बहन रज्जो ने उन्हें ताना मारते हुये कहा। 

बेड पर पड़ी पीहू को अर्धमूर्छित अवस्था में रज्जो बुआ की बातें कान में पिघले शीशे सी पड़ रहीं थी। वो उठकर उन्हें जबाव देना चाहती थी पर शरीर में इतनी भी शक्ति नहीं थी कि वो अपनी आँखें भी खोल सके। भले ही शरीर काम न कर रहा हो, पर उसका दिमाग पूरी तरह काम कर रहा था।


 उसे याद था उसके पापा ने मोहल्ले और रिश्तेदारों से बगावत करके उसे अपने शहर से दूर हॉस्टल में रहकर पढ़ाई पूरी करने भेजा था। भेजते भी क्यों नहीं पीहू के बचपन से ही उसके पापा ने उसे एक ही तो सपना दिखाया था बड़ी ऑफिसर बनने का। उसे पूरा करने के लिये पीहू को अच्छी पढ़ाई की जरूरत थी और वो जरूरत तो उसके छोटे से गाँव से दूर बड़े से शहर के बड़े कॉलेज में पढ़कर ही पूरा होना था। 


हॉस्टल में रहकर भी उसने ज्यादा दोस्त नहीं बनाये थे। वैसे सभी उसकी सुंदरता और स्मार्टनेस को देखकर उससे दोस्ती करना चाहते थे। पर वो सिर्फ अपनी पढ़ाई पर ही फोकस करती थी। 

उसका कॉलेज हॉस्टल से सिर्फ दस मिनिट की दूरी पर था। पर कुछ दिनों से उस रास्ते पर कुछ लड़कों का बहुत ही आना-जाना हो गया था। वो जब भी कॉलेज के लिये निकलती उसे यूँ एहसास होता कि कोई उसपर नजर रख रहा है। उसने कई बार कोशिश की देखने की कौन है पर उसे कोई नहीं दिखता। बिना सबूत वो किसी को कुछ बता भी तो नहीं सकती थी। 

पर अब वो पहले से कहीं ज्यादा चौकन्नी होकर चलती थी। उसके पापा ने उसकी परवरिश एक निडर लड़की की तरह की थी। उन्होंने माँ के लाख मना करने पर भी उसे जूडो कराटे सिखाकर अपनी रक्षा करना सिखाया था। इसलिये वो किसी भी मुसीबत के आने से डरती नहीं थी। बस थोड़ी सजग होकर चलती थी। 


उस दिन भी वो रोज की तरह ही हॉस्टल से कॉलेज के लिये निकली थी, कि तभी एक वैन उसके पास आकर रुकी और उसमें से दो लड़कों ने उतर कर पीहू को पकड़कर वैन में डालना चाहा। पर इससे पहले कि वो उसे छू भी पाते उसने पलट कर हवा में उछलते हुये उन दोनों के पेट में घूंसे धर दिये। 

उन लड़कों को एक लड़की से इसकी उम्मीद न थी इस अचानक हुये हमले से वो खुद को संभाल न सके और जब पेट पकड़ वही बैठ गये। तबतक पीहू उनके चेहरे पर दो चार घूंसे और धर के उसे लहू लुहान कर चुकी थी। उन लड़कों की यूँ पिटाई होता देख और आस-पास के लोगों के इकट्ठे होने से वैन में बैठे एक और लड़के ने उसपर गोली चला दी। जो सीधे उसके कंधे में धस गई। और वहाँ से खून का फव्वारा फूट पड़ा। 

फिर भी उसने हिम्मत नहीं हारी और उन भागते हुये दोनों लड़कों में से एक का पैर जब तक पकड़े रही जबतक आस पास के लोगों ने उसे अपनी गिरफ्त में नहीं ले लिया। उसके बाद वो बेहोश हो गई। और अभी-अभी रज्जो बुआ की आवाज से जैसे उसकी तंद्रा भंग हुई थी। 

तभी पीहू को अपने पापा की आवाज सुनाई दी.... 

" कैसी बातें कर रहीं है दीदी आप? मेरी बेटी ने कोई गलती नहीं की है। उसने तो अपनी बहादुरी से मेरा नाम रोशन कर दिया। बदनामी तो उन लड़कों की हुई है।

 आपको पता है दीदी मेरी बेटी ने अपनी बहादुरी से जिस लड़के को पकड़वाया था उसने पुलिस के सामने अपने सारे साथियों के बारे में बता दिया और पुलिस ने उन्हें पकड़ भी लिया। अब तो वो लड़के किसी को मुँह दिखाने के लायक भी नहीं बचे। 

मुझे तो उनके परिवार के लिए बहुत बुरा लग रहा है। उन्होंने सोचा होगा कि उनका बेटा उनका नाम रोशन करेगा पर वो तो हुआ नहीं उल्टा उनकी वर्षों से बनी बनाई इज्जत भी चली गई। 

दीदी टी.वी. खोल कर देखो चारों तरफ मेरी बेटी के बहादुरी के किस्से सुनाये जा रहे है। और उन लड़कों की बदनामी के। मेरी बेटी तो ऑफिसर जरूर बनेगी शादी का क्या है वो तो बिटिया के ऑफिसर बनने के बाद होती रहेगी। और जिसे मेरी बेटी से कोई परेशानी है तो बनी रहे ऐसे लोगों से मुझे कोई वास्ता नहीं रखना चाहे वो कोई भी हो। "

इतना बोलकर पीहू के पापा अपनी बहन का आश्चर्य से खुला मुँह छोड़कर पीहू के पास आ गये। और फक्र से अपनी बेटी के माथे पर अपना एक हाथ रख दिया और दूसरे हाथ से पीहू का हाथ पकड़कर उसके होश में आने की दुआ करने लगे। 


 तभी पीहू ने आँखें खोल कर अपने पापा का हाथ कसकर पकड़ लिया जैसे अपने पापा से दुबारा खड़े होने के लिये प्यार, विश्वास और हिम्मत ले रही हो।

 वही अपनी बेटी की पकड़ को महसूस कर पीहू के पापा ने डॉक्टर को आवाज लगा दी। 



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