बदली बदली सी तुम
बदली बदली सी तुम
प्रिया आज मेरी तबीयत कुछ ठीक नहीं लग रही, मुझे बुखार है शायद...रोहन ने कहा।
प्रिया ने टेम्परेचर चेक किया...नही रोहन नोर्मल है ।आप ठीक हो मौसम ही कुछ ऐसा है शायद इसलिए आपको बुखार जैसा फील हो रहा है
पिछले दो दिन से पेट मे भी दर्द है।
तो डॉक्टर को दिखा आओ ..
पर तुम यूँ तैयार होकर अकेले कहा चल दी आज तो संडे है।
हाँ, रोहन तुम सब के लिए लंच की तैयारी कर ली है मैने।और मै अपनी दोस्त रिया के यहाँ जा रही हूँ आज उसका जन्मदिन है तो हम सबने मिलकर उसके लिए सरप्राइज़ प्लान किया है।
पर मुझे इस हालत मे छोडकर..
प्लीज यार ,डोन्ट भी सीली ,ग्रो अप, छोटे बच्चों जैसे मत बिहेव करो।
प्रिया ,क्या तुम्हें नही लगता तुम आजकल बदल गई हो।
हाँ यार समय के साथ झुर्रियां, मोटापा ये सब कोमन है।अब तुम सोलह साल पहले ब्याह कर लाये थे वैसी की वैसी थोडे ही रहूंगी।उम्र का असर तो दिखना ही है।
मै तुम्हारे सट्रक्चर की नही, तुम्हारे नेचर की बात कर रहा हूँ। पहले तुम मेरी कितनी केयर करती थी। मुझे एक चींक भी आती तो तुम परेशान हो जाती।बर्थडे हो या एनिवर्सरी मेरे लिए सरप्राइज प्लान करती ।लेकिन पिछले कुछ समय से कितनी बदल गई हो तुम ।तुम्हें मेरी फिक्र ही नही है लगता है उम्र के साथ साथ प्यार कम हो रहा है।
पहली बात तो ये कि उम्र के साथ साथ प्यार घटता नही बढता है।हाँ लेकिन इंसान कि प्रायोरिटीज़ जरुर बदल जाती है।
चलो देर से ही सही आपको समझ मे तो आया कि मै केयरिंग थी। आज तुम्हें एहसास हुआ कि मै तुम्हारा ख्याल रखती थी। पर कुछ महिनों पहले आप ही कह रहे थे आजतक तुमनें मेरे लिए किया ही क्या है ।ना एक परफेक्ट माँ हो, ना बहू, ना बीवी। तब मैंने सोचा कि परफेक्ट बनकर इमपरफेक्ट लाईफ जीने से अच्छा है ,इमपरफेक्ट बनकर परफेक्ट लाइफ जिओ।
जब तुम्हें चींक आती तो मै परेशान हो जाती।पर जब मुझे सर्दी खांसी या बुखार होता तो तुम कहते... बाहर जाकर सो जाओ सबकी नींद मत खराब करो ।तो मैंने तो कभी उस बात का ये मतलब नही निकाला कि तुम मुझे प्यार नही करते।
मै तुम्हारे लिए सरप्राइज प्लान करती तो तुम्हें फालतू खर्चा लगता और तुमसे उम्मीद करती थी तो तुम्हें पागलपन लगता।
अच्छा तो तुम मुझ ताने मार रही हो अब
नहीं, मैं तो सिर्फ तुम्हें एक्सप्लेनेशन दे रही हूँ। अब तुम उसे कैसे लेते हो वो तुमपर डिपेंड करता है।
जब मै अपनी इच्छाओं का गला घोंटकर तुम सबके लिए जी रही थी तो भी तुम सबको मुझसे शिकायत थी । फिर चाहे मम्मीजी हो, तुम या बच्चे।तब भी मैने कभी एतराज नही जताया।तो अब अपने मन की करूं और आपको शिकायत है तो मुझे फर्क नही पडता।
और तुम तो हमेशा से चाहते थे ना मै बदल जाऊं ,सेल्फ डिपेंडेंट बन जाऊं।थोड़ी मोडर्न बन जाऊँ तो अब किस बात कि शिकायत।
अपने चेहरे पर ये जो मैंने झूठ का नकाब चढा रखा था ना सब को इमप्रेश करने का वो मैंने हटा दिया है।अब मै, "मै" हूँ वो मै जो अपने लिए सोचती है अपने लिये जीती है जिसे सबकी परवाह है पर अपने आत्मसम्मान की रक्षा करना भी जानती है।कहकर प्रिया चल दी।
तो दोस्तों कैसी लगी आपको मेरी कहानी।ये कहानी एक काल्पनिक मात्र है। पर हमे एक बात सिखाती है कि वक्त रहते अपनों की कद्र करना सीखा लो वरना बाद में पछतावा करने से कोई फायदा नहीं।
