साहित्यसेवी सत्येन्द्र सिंह

Tragedy


4.8  

साहित्यसेवी सत्येन्द्र सिंह

Tragedy


अपशकुनी

अपशकुनी

1 min 2.6K 1 min 2.6K


आंधी तेज़ थी।बारिश भी कहर ढा रही थी।सब घबराए हुए थे।उसकी प्रसव पीड़ा भी बढ़ रही थी।घर में जुड़वा बच्चे हुए थे;उसने एक लड़का और एक लड़की जना था।झोपड़ी की छत उड़ चुकी थी। दुधमुही लड़की पर अपशकुनी होने का ठप्पा लग चुका था।



Rate this content
Log in

More hindi story from साहित्यसेवी सत्येन्द्र सिंह

Similar hindi story from Tragedy