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कलमकार सत्येन्द्र सिंह

Tragedy

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कलमकार सत्येन्द्र सिंह

Tragedy

अपशकुनी

अपशकुनी

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आंधी तेज़ थी।बारिश भी कहर ढा रही थी।सब घबराए हुए थे।उसकी प्रसव पीड़ा भी बढ़ रही थी।घर में जुड़वा बच्चे हुए थे;उसने एक लड़का और एक लड़की जना था।झोपड़ी की छत उड़ चुकी थी। दुधमुही लड़की पर अपशकुनी होने का ठप्पा लग चुका था।



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