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अपर्णा गुप्ता

Drama

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अपर्णा गुप्ता

Drama

अनाड़ी

अनाड़ी

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ये निश्चल मन वैसे तो हमेशा से ही अकेला था l

अपनो के बीच छला जो जाता था हमेशा ।

"अरे तुम अपना फलसफा अपने पास रखो "जब भी सुनता चुपचाप हो जाता सबको अपने मन की करते ,बोलते देखता और चुप्पी साध लेता।

आज फिर वही तो हुआ , जब अपनो को ही अपना मजाक उड़ाते सुना "अरे वो बेवकूफ है भावुक मूर्ख उसे तो दूर ही रहने दो।"

भरे दिल से चल दिया था। खुली हवा में सांस लेने- "अच्छा हुआ नहीं तो पता नही क्या क्या सुनना पड़ता "

दूर कही गाना बज रहा थामन सुनकर झूम उठा "सच है दुनिया वालो के हम है अनाड़ी सब कुछ सीखा हमने न सीखी होशियारी।


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