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Sarita Kumar

Inspirational

4  

Sarita Kumar

Inspirational

अजनबी

अजनबी

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किसी को याद रखने के लिए उसका कोई नाम , काम , जात पात या सामाजिक और आर्थिक स्तर कोई मायने नहीं रखता । साधारण से साधारण व्यक्ति भी हमारे जेहन में अपना अमिट छाप छोड़ देता है जिससे दूर होकर भी हम याद करते हैं ।

आगर विश्व में प्रसिद्ध है ताजमहल और लाल किले की वजह से । दुनिया भर से लोग एक झलक देखने आतें हैं लाखों रुपए खर्च करके और मुझे 20 रूपए लगते थें ताजमहल पहुंचने के लिए । मगर ताजमहल से ज्यादा आकर्षित करता था आगरा कैंट का सदर बाजार । बृजवासी की दुकान , मामा फ्रैंकी रेस्टोरेंट , रविवार को लगने वाला मेला , जिसमें तरह-तरह के झूले लगाएं जाते थें और तरह-तरह के खेल खिलौने , गाना , बजाना , डांस हर तरह का आयोजन किया जाता था । खास तौर से यहां सैन्य परिवार के लोग आते थें । आगरा छावनी का सबसे खूबसूरत बाजार था । 

हर रविवार को मैं बच्चों को लेकर जाती थी । मेज़र साहब को फुर्सत नहीं होती तब भी तीनों बच्चों को लेकर जरूर जाती थी । कार पार्क करने के तुरंत बाद हम सभी की निगाहें उसे तलाशने लगती , जरा सा देरी होता तो हमारी धड़कनें बेकाबू हो जाती कुछ अनहोनी सोच कर तभी तो खर्र खर्र के आवाज़ से हमें सुचित कर देता और लगभग एक साथ हम सब बोल पड़ते "थैंक गॉड वो हैं अभी ।" गुब्बारे वाले का नाम , पता , ठिकाना कुछ भी मालूम नहीं था लेकिन हर रविवार की शाम वो यहीं मिलता था ।‌ शुरुआत में बच्चों ने तीन गुब्बारे लेकर अधिक पैसे देने की कोशिश की ... मदद के ख्याल से क्योंकि वो गुब्बारे वाले के दोनों पांव कटे हुए थें । लकड़ी के पटरी पर बैठ पर उसके पहियों के सहारे घूम घूम कर गुब्बारे बेचता था । पांव भले ही कटे थें लेकिन खुद्दारी अभी बाकी थी । इसलिए हराम के पैसे लेना नहीं चाहता था फिर इशू ने एक तरकीब निकाली उसके सारे के सारे गुब्बारे खरीद ली ती और वहां खेल रहे सभी बच्चों में बांट देती । इससे दो फायदे हुए उसका गुब्बारे वाले के आत्मसम्मान की रक्षा भी हुई और छोटे छोटे बच्चों को थोड़ी सी मुफ्त में खुशियां मिल गई ।

एक बार एक बच्ची की मम्मी ने पूछा "आज आपका बर्थ डे है ?" तो इशू ने कहा नहीं क्यों ? "तो गुब्बारे क्यों बांट रही हो ? " हंस कर बोल दिया था मेरी मॉम का बर्थ डे है फिर वहां खड़े सभी बच्चों से प्रार्थना करवाया था इशू की मॉम के लिए मतलब मेरे लिए । आज मुझे वो शहर, वो लोग और सबसे ज्यादा गुब्बारे वाला याद आ रहा है । चार साल हो गए आगरा से आएं हुए । पता नहीं वो गुब्बारे वाला कैसा होगा ? कोरोना का कहर उसके धंधे को बंद करवा दिया होगा तो वो कैसे खाता होगा ? क्या करता होगा ?

अभी तो बहुत रात हो चुकी है कल सुबह किसी को बोलूंगी सदर बाजार जा कर पता लगाएं उस गुब्बारे वाले की कोई खबर मिल जाए .... । ईश्वर उसकी रक्षा करना ।


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