Manjula Dusi

Comedy


5.0  

Manjula Dusi

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ऐजी ! हमें नहीं करनी शॉपिंग

ऐजी ! हमें नहीं करनी शॉपिंग

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"ए जी सुनते हो !" हमने बड़े प्यार से इनसे कहा।

"हाँ बोलो" इन्होने पेपर में मुँह घुसाए हुए ही कहा।

"वो ना हमने सोच लिया है इस बार हम जो हर महीने का सामान लेते हैं ना, उसमेेंं कोई फिजूल की शॉपिंग नहीं करेंगे। हर बार बहुत सा सामान रह जाता है, इस बार जो बच गया है, उसे ही यूज करेंगे और ड़बलू बबलू को भी समझा दिया है वो भी इस बार कोई जिद नहीं करेेंंगे, है ना डबलू बबलू?" "जी मम्मी" डबलू बबलू ने एक स्वर में कहा तो हमारे ए जी तो सोफे से कूद ही पड़े खुशी के मारे।

"क्या कह रही हो भागवान, क्या सचमुच? मुझे तो मेरे कानो में यकीन ही नहीं हो रहा" हमारे ए जी की आँखों में बाई गॉड खुशी के आँसू आ गए।

"हम तो इसबार एनवर्सरी की पार्टी भी नहीं देंगे, बेकार में कितना खर्चा हो जाता है आपका" हमने आगे कहा।

"अरे बस कर पगली, अब रुलाएगी क्या?" कहते हुए ये हमारी तरफ बढ़े, वो तो डबलू बबलू थे, वरना ये तो हमारी पप्पी ही ले लेते बाई गॉड।

अगले दिन रविवार था, तो हम सुबह से तैयार हो गए, डबलू बबलू को भी तैयार कर दिय।  हमारे ए जी ने पूछा "कहाँ की तैयारी है मैड़म? बिल्कुल कयामत लग रही हो" हमने कहा हमें तो शॉपिंग करनी नहीं है। लेकिन घर में बैठे बैठे भी क्या करें, इसलिए तैयार हो गए, चलो ना वो जो नया मॉल खुला है, वो घूम आते हैं और आटा, तेल और नमक लेना है वो भी ले लेंगे, बस और कुछ नहीं लेंगे।"

"अरे क्यों नहीं मैड़म, आपने हमारे इतने पैसे जो बचा लिए, चलिए हम आपको बढ़ियां लंच भी करवाएंगे।" हमारे ए जी नेे खुुुश होते हुुुए कहा।

तो ऐसा है जी हम पहुँच गए मॉल, अब हमें लेना तो कुछ था नहीं, मगर बाई गॉड क्या मॉल था। एक से बढ़कर एक चीजेंं, हर जगह सेल, सेल, सेल और 40℅, 50%, 60% तक की छूट थी। सामने साड़ी के शो रूम पर हमारी नज़र पड़ी, तो हमसे रहा नहीं गया, हमने कहा "ए जी हमें कुछ लेना तो है नहीं, पर क्या हम बस देख आएं इस बार क्या नया है, वो क्या है ना कि भले न लो लेकिन अपडेट रहना चाहिए"।

इन्होंने भी कह दिया "देखना भर है ना, देख लो, देखने में कोई बुराई नहीं है" इतना सुनना था कि हम तो कूद के पहुंच गए अंदर। बाइ गॉड जब नहीं लेना होता, तभी इतनी सुंदर साड़ियाँ आती हैं बाजार में। अब हमारा हाल तो ऐसा जैसे प्यासे को कुँए के पास बिठाकर कह दिया हो कि पानी ना पीना और यहाँ तो कहने वाले भी हम, हाय रे! फूटी किस्मत।

फिर दिखी वो वाइन कलर की बनारसी साड़ी जिसकी तलाश हमें जनम जनम से थी, उसे देखकर ऐसा लगा कि उसे सिर्फ और सिर्फ हमारे लिए ही बनाया गया है। हमने उसे हाथ में उठाया, प्यार से सहलाया, मानो पूछ रही हो "पगली, कहाँँ थी इतने दिनोंं तक?" और फिर कंधे पर डालकर आइने के सामने खड़े हो गए। उफ्फ वो फीलिंग हम बयान ही नहीं कर सकते, उसका कलर उसका डिजाइन, उसका फील, उस पल बस हम थे और वो बनारसी साड़ी। उसे पकड़े हुए हम खो गए,उस वाइन कलर की साड़ी को पहने हुए बर्फिली वादियों में फिल्मी हिरोइन की तरह डांस कर ही रहे थे कि शीशे में एक अक्स उभरा, शक्ल जानी पहचानी सी लगी। कौन है ये ? कहीं तो देख है इन्हें। ओह! ये तो हमारे ए जी थे, हम तो भूल ही गए थे। फिर याद आया कि हमें तो कुछ खरीदना ही नहीं था। लेकिन ये साड़ी कैसे छोड़ देंं, इसके बदले तो कोई हमारी जान ही माँग ले। हमारा बस चलता तो हम उसके लिए वहींं भूख हड़ताल पर बैठ जाते। लेकिन जो काम आँखो से हो सकता है उसके लिए पेट को क्यों कष्ट देना। तो जी हम आँखो में ढ़ेर सारा प्यार और उससे भी ज्यादा रिक्वेस्ट वाले मिश्रित भाव लेकर ए जी की तरफ पलटे। अजी वो तो ब्रम्हास्त्र था और कोई चारा नहीं था उनके पास। आखिर वो साड़ी दिलानी ही पड़ी।

हम खुशी खुशी बाहर आए, फिर हमारे अंदर की माँ जाग गई, हमने अपने लिए नई साड़ी ले ली और हमारे डबलू बबलू के लिए नए कपड़े ना लें ऐसा कैसे हो सकता है। फिर हमने हमारे दिमाग आए विचार को ठीक वैसे ही ए जी के सामने रखा। आखिर हम माँ हैं तो वो भी तो पापा हैंं, तो जी हमारे डबलू बबलू के नए कपड़े भी आ गए। अब हम हमारे प्यारे ए जी को कैसे छोड़ देते, एक अच्छी पत्नी का फर्ज निभाते हुए उनके लिऐ भी लिए।

फिर बच्चों को खिलौनों की दुकान दिख गई। वो भी बस देखने को गए कि इस बार कौन से नए खिलौने आए हैं मार्केट में। लेना तो हमें था नहीं, लेकिन क्या करते इसबार हर खिलौना नया सा लगा, नई तरह की कार, नए तरह का बैट, फुटबॉल भी नए तरह की। बच्चे भी क्या करते, उन्होंने ऐसे खिलौने कभी देखे ही न थे। तो जी हमारे बच्चे ना बाई गॉड हम पर ही गए हैं, उन्होंने भी आँखों की भाषा सीख ली थी। अरे वही प्यार और रिक्वेस्ट के मिक्स भाव वाली। बस फिर क्या खिलौने मिल ही गए।

फिर बस यूँ ही, वो कर्टेंस, कुशन कवर, शो पीस सबकुछ दिखते गए जो हमारी दीवार और घर से बिल्कुल मैच करते थे। बाई गॉड हमें लेना नहीं था, लेकिन क्या करते जी ऐसी चीज़ें बार बार तो नहीं मिलती ना। फिर हमने कहा अब एनिवर्सरी पार्टी का सामान भी ले ही लेते हैं, अब इतना कुछ लिया है, कोई तो आए देखने के लिए, वरना लेना बेकार नहीं हो जाएगा? तो जी ऐसा करते करते हमने आलमोस्ट पूरा मॉल खरीद लिया और रात का डिनर करके घर पहुँचे। और जैसे ही कार घर के सामने रुकी हम जोर से चिल्लाए "हे भगवान हम आटा, तेल और नमक लेना तो भूल ही गए। कोई बात नहीं जी, हम फिर चलेंगे आटा तेल और नमक लेने, है ना ए जी ?"

नहींईईई ! इस बार चिल्लाने की बारी हमारे ए जी की थी और कार के रेड़ियो में पुराना गाना बज रहा था "हम तो लुट गए बीच बाज़ार।"

ये ब्लॉग बस एक कोशिश है आपके चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान लाने की, वरना हम औरतें इतनी भी खर्चीली नहीं होती।


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