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Radha Gupta Patwari

Drama

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Radha Gupta Patwari

Drama

अब आया ऊँट पहाड़ के नीचे (6)

अब आया ऊँट पहाड़ के नीचे (6)

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प्रिय डायरी,

"उफ्फ!कब खत्म होगा ये लाकडाउन। घर में रह-रहकर बोर हो गया हूँ। "पानी का गिलास पकड़े हुए नीरज ने कहा। "बोर क्यों हो रहे हो?टीवी है,मोबाइल है,म्यूजिक सिस्टम है,इतने सारे इन्डोर गेम्स हैं और तो और बच्चे हैं,उनसे खेलो। "-पल्लवी ने धनिया तोड़ते हुए कहा। "कितना टीवी देखूं, कितना मोबाइल चलाऊँ और कितना खेल खेलूं बच्चों के साथ। हर चीज की एक लिमिट भी तो होती है। "-नीरज ने मुँह बनाते हुए कहा।

तभी नीरज के पापा बोले-"हाँ,अब तो घर में बैठे बैठे कभी कभी जी घबड़ाने लगता है। छत पर भी शाम एक-ढ़ेर घंटा से ज्यादा नहीं रुकने का मन नहीं करता है। पहले शाम को सामने वाले पार्क में निकल जाता था। हम जैसे बुजुर्ग ताश खेलते, समोसे खाते और गप्प करते हुए दिन कट जाता था। अब तो....लग रहा है जैसे कैदी हों। "

नीरज की मम्मी ममता बात काटते हुए बोली-"पोते को गणित के सवाल समझा दो। अभी टाइम है। उसे बहुत कंफ्यूजन रहता है। समय कट जायेगा और वह भी होशियार हो जायेगा। "तभी पोता बोला-"अरे दादी कितने मैथ्स के क्वैश्चन साल्व करूँ। अब तो मैं बोर हो गया हूँ। "

शाम को नीरज के पापा बोले-"क्या पता था ,यह दिन भी देखने पड़ेंगे। औरतौंं की तरह घर घुस के बैठे हैं। अब तो दम घुटने लगा है। "

यह सुनकर उनकी पत्नी ममता बोली-"अब आपको कैसा लग रहा है। घर में रहकर,दम घुट रहा है न। अब पता पड़ा आजादी क्या होती है। हमारी शादी को पैंंतालीस साल हो गए पर आपने कभी मेरा दर्द नहीं समझा। हम औरतों का क्या है,हमेंशा ही लोकडाउन रही हैं। हमें कुछ ज्यादा फर्क नहीं पड़ा इस लोकडाउन का। हमेशा ही घर में दबी-ढकी रहती थीं। चाहें कितनी गर्मी हो,सर्दी हो या बरसात। हमारे लिए घर की चारदीवारी सब कुछ थी। सिर से पाँव तक ढ़के कपड़े पहनना,संस्कार का नाम दे दिया। हमारे लिए क्या मनोरंजन के साधन थे?सोचा है कभी। हमारी जिन्दगी सिर्फ़ चूल्हे-चौके के बीच ही चलती थी। कभी कुछ बोलना भी चाहा तो बेहया का तमगा लगा दिया। अब पता पड़ा न क्या होता है अपने ही घर में कैद होना। "यह सुनकर पल्लवी अपनी सास ममता को सांत्वना देने लगे। उनके पति भी चुप हो गये सही तो कह यही थी ममता।

दोस्तों,फले ही हम लोकडाउन में हो पर यह हमें बहुत कुछ सिखा रहा है। आज कुछ दिन के लोकडाउन को पुरुष पचा नहीं पा रहे हैं पर सोचिए इन्ही पुरुषों ने महिलाओं को बेड़ियों में जकड़ा हुआ था इसकारण महिलाओं को कुछ ज्यादा फर्क नहीं पड़ रहा है पर वक्त की बात देखिए आज वही पुरूष लोकडाउन में हैं और छटपटा रहे हैं।


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