आता-जाता है: सात लाख का गुरूर और कल की
आता-जाता है: सात लाख का गुरूर और कल की
आता है, पैसा जाता है: गुरूर की उम्र आर्यन और रिया की जिंदगी का उसूल बहुत सीधा था। उनका घर बड़ा था, लेकिन उसमें दिखावा बिल्कुल नहीं था। आर्यन साल में सिर्फ कुछ महीने जमकर काम करता और बाकी समय अपने परिवार के साथ सुकून से बिताता। उसे इस बात की बहुत गहरी समझ थी कि जिंदगी में पैसा सिर्फ जरूरत पूरी करने के लिए होता है, सुकून छीनने के लिए नहीं। उसी मोहल्ले में रहने वाला जगत और उसका परिवार एक अलग ही दुनिया में जी रहा था। जगत और उसके घर वालों ने सालों तक खून-पसीना एक करके दिहाड़ी मजदूरी की थी। पाई-पाई जोड़कर, अपना पेट काटकर उन्होंने कुछ सात-आठ लाख रुपये जमा कर लिए थे। लेकिन जैसे ही उन्हें एहसास हुआ कि उनके पास इतना पैसा इकट्ठा हो गया है, उनकी नीयत और फितरत दोनों बदल गईं। अचानक से उनके अंदर एक अजीब सी खुजली होने लगी। उन्हें लगने लगा कि अब वे इलाके के सबसे रईस लोग बन गए हैं। वे भूल गए कि उन्होंने यह पैसा कितनी तकलीफों से जोड़ा था। अब जगत शराब पीकर आता और सीना तानकर मोहल्ले में धौंस जमाता। वह चीख-चीख कर कहता कि अब वो किसी को भी खरीद सकता है, किसी को भी बर्बाद कर सकता है। आर्यन अक्सर अपनी खिड़की से जगत को तमाशा करते हुए देखता। रिया आर्यन से कहती कि इसे समझाओ, यह अपने ही बुने जाल में फंस रहा है। एक रात जगत शराब के नशे में आर्यन के दरवाजे पर आ गया और गालियां देने लगा। वह आर्यन की शांति का मजाक उड़ाते हुए चीखा— "क्या औकात है तेरी आर्यन? मेरे पास आठ लाख कैश पड़ा है! मैं चाहूँ तो कल ही तेरे जैसे लोगों को खरीद कर नौकर रख लूँ। हम जो चाहें वो कर सकते हैं!" आर्यन ने दरवाजा खोला। उसके चेहरे पर न तो कोई गुस्सा था और न ही कोई डर। उसने बहुत ही गहरी और शांत नजरों से जगत को देखा। पूरी गली तमाशा देखने के लिए बाहर आ चुकी थी। आर्यन ने जगत के करीब जाकर बहुत ही ठहरी हुई आवाज में कहा— "जगत, पैसा आता है और पैसा चला जाता है। यह हाथ का मैल है। आज तुम्हारे पास है, कल किसी और की जेब में होगा। तुमने और तुम्हारे परिवार ने मजदूरी करके, अपना खून सुखाकर ये सात-आठ लाख जोड़े हैं। लेकिन जैसे ही तुम्हें पता चला कि पैसे जुड़ गए हैं, तुम्हारा दिमाग आसमान पर चढ़ गया।" आर्यन की आवाज में एक ऐसी चुभन थी जो सीधे जगत के दिल पर लग रही थी। आर्यन ने आगे कहा— "तुम्हें लगता है कि तुम दुनिया पलट दोगे? कभी ठंडे दिमाग से आने वाले कल के बारे में सोचा है? महंगाई किस रफ्तार से बढ़ रही है, दुनिया कितनी तेजी से बदल रही है, आने वाले समय में बीमारियां और खर्चे कितने बढ़ेंगे, इसका तुम्हें कोई होश नहीं है। तुम बस आज के गुरूर में अंधे होकर अपना कल बर्बाद कर रहे हो।" जगत की आंखें फटी की फटी रह गईं। आर्यन ने आखिरी बात कहते हुए उसे आईना दिखा दिया— "ये सात-आठ लाख रुपये किसी बड़ी बीमारी या बुरे वक्त में एक झटके में उड़ जाएंगे। तब ये गुरूर काम नहीं आएगा जगत, तब सिर्फ वो इज्जत और वो पड़ोसी काम आएंगे जिन्हें आज तुम गालियां दे रहे हो। पैसे से इंसान का भविष्य सुरक्षित नहीं होता, उसकी समझदारी से होता है।" गली में एकदम सन्नाटा छा गया। आर्यन की गहराई और सच्चाई ने जगत के उस खोखले गुरूर के टुकड़े-टुकड़े कर दिए थे। जो आदमी कुछ पल पहले खुद को दुनिया का राजा समझ रहा था, वह अब बिना एक शब्द कहे, सिर झुकाकर अपने घर की ओर लौट गया। उसे पहली बार एहसास हुआ था कि दिहाड़ी करके जोड़े गए चंद पैसों ने उसे रईस नहीं, बल्कि एक अंधा और बेवकूफ इंसान बना दिया था। आर्यन ने दरवाजा बंद किया और मुस्कुराते हुए रिया की तरफ देखा। जिंदगी की सबसे बड़ी दौलत बैंक में नहीं, उस समझ में छिपी थी जो आर्यन के पास थी। Sukhwinder की कलम से "इंसान की फितरत भी कितनी अजीब है। जब तक जेब खाली होती है, वह सिर झुकाकर चलता है, और जैसे ही चार पैसे आ जाते हैं, उसे लगता है कि अब आसमान उसके कदमों में है। पैसा आता है, पैसा चला जाता है, लेकिन जो गुरूर इंसान के अंदर घर कर जाता है, वह उसे कहीं का नहीं छोड़ता। भविष्य की चिंताओं और बढ़ती महंगाई को भूलकर जो इंसान आज के थोड़े से पैसों पर इतराता है, असल में उससे बड़ा गरीब और कोई नहीं। असली रईसी पैसों की गिनती में नहीं, सोच की गहराई में होती है।"
