Radha Gupta Patwari

Drama


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Radha Gupta Patwari

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आपकी बेटी की उम्र की हूँ

आपकी बेटी की उम्र की हूँ

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"यामिनी, थोड़ा जल्दी हाथ चला,बाहर सब खाने के लिए बैठे हैं।यामिनी की सास आशाजी ने कहा।"हाँ,मम्मीजी,गैस अभी चालू की है तो कढ़ाई अभी ठंडी है।जब तक कड़ाही गरम होती है तब तक मैं पूड़ियाँ बेल लेती हूँ।"-यह कहकर यामिनी पूड़ियाँ बेलने लगी।मेहमानबाजी करने के लिए आशा जी के भाई और भाई आये थे।एक एक पूड़ी बेलने-तलने में ही बहुत समय लगता है इसके बाद सब्जियों को गरम करना,थाली में परोसना फिर बाहर थाली पहुँचाना।फिर इसके बाद गरम गरम सब्जी पूड़ी तलकर बाहर पूछने में बहुत टाइम लग रहा था।ऊपर से गरमियाँ भी शुरू हो चुकी थीं।किचन में तर-बतर होकर काम करना यामिनी को मुश्किल लग रहा था।सास आशा भी अपने भाई भाभी के साथ बतिया रहीं थी और बीच बीच में किचन में हिदायत देकर चलींं जाती।जैसै तैसे करके यामिनी ने मेहमानों को खाना खिलाया।

मेहमानों के चले जाने के बाद यामिनी खुद खाने बैठी और फटाफट खाकर किचन की सफाई करके जैसे ही अपने कमरे में जाने तभी उसे सासूमां की आवाज सुनाई दी।फोन पर बात कर रहीं थी तभी उनकी आवाज़ सुनाई दी।यामिनी दो मिनट के लिए ठहर गई।किसी से कह रहीं थी-"थोड़ी सी भी तमीज नहीं है,मेहमान की आवभगत कैसे करनी है?कैसे नहीं करनी है? कुछ नहीं पता है।घर खानदान में इतनी बहू हुए हैं पर इस जैसी कोई नहीं।

"यामिनी को सब समझ आ गया था-"ओह!तो मम्मी जी नंद दीप्ति से बात कर रही हैं।जब तक माँ बेटी घर की रोज होने वाली छोटी-छोटी बात न बता दें तब तक चैन कहाँँ आता है।"यह देखकर वह अपने कमरे में आ गई।

शाम की चाय बनाने के लिए यामिनी कमरे से बाहर आयी तो तब भी नंद से बात चल रही थी।यामिनी ने नजरअंदाज करके चाय बनाने चली गई।चाय बनाकर मम्मी जी को दी और खुद चाय पीने लगी।शाम को संध्या बत्ती करने करने के बाद उसने सासूमाँ से पूछा-"सब्जी क्या बनाऊँ?"पर उन्होंने कोई जबाब नहीं दिया।यामिनी ने फिर पूछा तो आशाजी फट पड़ी-"जब भी बेटी का फोन आता है दिक्कत हो जाती है।थोड़ी देर बात कर लूँ तो बर्दाश्त नहीं होता है।"यामिनी ने कहा-"मम्मी जी आप बात करिए न।मैं तो केवल इतना पूछ रही थी खाना क्या बनेगा रात का।"

आशाजी ने मन की भड़ास निकालते हुए कहा-"सुबह जैसै खाना बनाया था कोई नहीं खाता।तुम्हारी उम्र में झटपट काम करते थे।जेठानी-देवरानी होने के बाबजूद पूरा चौका संभाल लिया था।अगर दादा ससुर होते तो खाना उठा के फेंक देते।17-18 लोगों का खाना अकेले बनाती थी।एक तुम हो चार आदमी का खाना नहीं बनता।"

यामिनी ने अब बोला-" मम्मीजी,आप दोपहर से दीदी से बात कर रही हैंं उनके यहाँ कोई काम नहीं है जो 10 घंटे फालतू बात करती हैं।उनकी सास क्या सोचती होगी। मम्मीजी मैंने आपसे केवल इतना ही तो पूछा था सब्जी क्या बनेगी।

अगर मैं अपने मन से बना देती तो आप कहती कि पूछा भी नहीं। मेरी गलती तो दोनों जगह से हो जाती है। मेहमानों को अकेले बनाना, खिलाना और परोसना कितना मुश्किल हो जाता है। अगर आप परोसने में हेल्प कर देतींं तो कितना अच्छा रहता। भाई तो आपके थे।रही बात आपने अपने समय में चौका संभाला या नहीं संभाला यह कौन जानता है? यह तो ताई जी और चाची जी से पूछने के बाद पता पड़ेगा। आपकी और मेरे में बहुत फर्क है। मैं आपकी उम्र की नहीं बल्कि आपकी बेटी की उम्र की हूं इसलिए अगर कंपटीशन करना ही है तो अपनी बेटी से कीजिए ना अपने से।वैसे भी आपकी बेटी दिन भर तो आपसे बात करती रहती है खुद पता पड़ जाता है वह काम क्या करती होगी। पहले अपनी बेटी को समझाइए फिर मेरे बारे में बोलिएगा, उसकी सास भी है।" यह कहकर यामिनी अपने अनुसार सब्जी काटने चली गई।दोस्तों, यह हर घर की कहानी है।सास को अपनी बहू अपनी उम्र की लगती है और अपनी बेटी बच्ची नजर आती है जो कि बहुत गलत है। आपकी बहू आपकी बेटी की बराबर की है ना कि आपकी उम्र जोकि वह काम परफेक्ट कर सकें।


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