(3)आखिर कब तक बाट जोहूँ?
(3)आखिर कब तक बाट जोहूँ?
प्रिय पाठकों,
इस कहानी के पिछले भाग में आपने पढ़ा कि....
कुमुद सुशांत की यादों से बाहर नहीं आ पा रही थी। और पहली मुलाकात से लेकर उसके साथ गुजरे हुए हर एक लम्हे की याद उसके जेहन में आज भी पहले की तरह ताजा थी।
ऐसे में कुमुद किसी भी अन्य पुरुष को अपने मन में जगह कैसे दे सकती थी...?जबकि अभी तक वह सुशांत की यादों से बाहर नहीं आ पाई थी।
उसके माता-पिता एक तरह से अपनी बेटी के मन की हालत भी समझते थे और अपनी जिम्मेदारी भी।वह जिम्मेदार माता-पिता थे और वह चाहते थे कि उनके जिंदा रहते कुमुद का घर बस जाए और वह अपनी गृहस्थी में सुखी संसार बसा ले।
इसलिए वह कुमुद के लिए सुयोग्य वर अमन को खोज कर लाए थे कि अगर कुमुद का मन अमन के साथ लग जाता है और दोनों दूसरे को पसंद कर लेते हैं तो वह कुमुद की शादी अमन से करवा देना चाहते थे।
उस रात तो कुमुद सुशांत की यादों में खोई थी। इसलिए अगली सुबह जब वह तो उसका सिर कुछ भारी था।
" उठ गई बेटा ! ले चाय पी ले और आज शाम को कुछ देर के लिए अमन तुझसे मिलने आएगा। वह तुझसे बातचीत करना चाहता है और तुम्हारे साथ कुछ वक्त गुजारना चाहता है !
" ओफोह मां ! मैंने कहा ना....मुझे किसी अमन वमन से नहीं मिलना और ना ही मुझे अभी कोई शादी की बात सोचनी है।आप तो सब जानती हो फिर भी मुझे क्यों जिद करती हो !"
बोलते हुए कुमुद कुछ चिढ़ सी गई। कुमुद के प्रत्युत्तर में माँ कुछ कहती...
इसके पहले ही उसके पिता बोल पड़े,
" बेटा ! अमन से एक बार मिलने में क्या हर्ज है...?
जो चला गया उसकी यादों में खुद को रखने का क्या फायदा...?
जो वर्तमान है उसे अगर बाहें फैलाकर अपनाओगी तो भविष्य भी अपनी स्वर्णिम आभा लेकर तुम्हारे जीवन को आलोकित कर देगा। और अगर तुम अतीत को चुनती हो तो...
उसका काला साया तुम्हारी पूरी जिंदगी को अंधकार से भर देगा !"
कुमुद के पिता गिरधारी जी एक अनुभवी व्यक्ति थे। उन्होंने दुनिया देखी थी और वह अपनी भावुक पुत्री के स्वाभाव और उसकी मनोदशा भी समझते थे।
साथ में... वह यह भी जानते थे कि....
अमन एक सुलझा हुआ इंसान है जो कुमुद का सच्चा और अच्छा जीवनसाथी साबित हो इसलिए.... वह चाहते थे कि कुमुद अमन से जरूर मिले। खैर.... उस दिन माता-पिता के जोर देने पर किसी तरह कुमुद अमन से मिलने को से तैयार हुई और जब अमन आया तो वह उसको देख कर चौंक गई।।
" तुम...? आ... आप....? यहाँ कैसे...? क्या आपको सुशांत ने मेरे घर का पता दिया था, बोलिए...?
आप मेरे घर तक कैसे आ गए ? "
कुमुद ने अमन को देखकर कई सवाल एक साथ धर दिए बदले में अमन ने बेहद शांत स्वर में कहा...
" बस... बस.... कुमुद भाभी ! सब बताता हूं। सारे सवालों के जवाब आप एक बार ही जान लेना चाहती हो क्या...?"
थोड़ा सांस तो ले लो, अभी मुझे भी याद करने दो कि तुमने एक साथ कितने सवाल पूछ लिए हैं !"
अमन के ऐसा कहने पर कुमुद के चेहरे पर एक दोस्ताना वाली मुस्कान आ गई।जिसे देखकर उसके माता-पिता दोनों चकित हो गए कि....क्या अमन और कुमुद एक दूसरे को पहले से जानते हैं....? इधर अमन कुमुद को देखकर जब मुस्कुराया तो कुमुद के चेहरे पर भी हंसी ठहर गई।
क्रमश,,,
क्या अमन कुमुद को पहले से जानता था...? क्या दोनों का कोई अतीत था....?
यह जानने के लिए कहानी का अगला भाग पढ़ें।
धन्यवाद
