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Pradeep Kumar

Abstract Inspirational

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Pradeep Kumar

Abstract Inspirational

22 साल बाद, 22 सेकंड की मुलाकात — और जीवन के 22 सू

22 साल बाद, 22 सेकंड की मुलाकात — और जीवन के 22 सू

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आजकल बरसात का मौसम है। मुझे यह मौसम हमेशा से बहुत सुहाना लगता है। वैसे तो मैं गाड़ी से कार्यालय जाता हूँ, लेकिन कार्यालय घर से मुश्किल से पंद्रह मिनट की पैदल दूरी पर है। मुझे पैदल चलना अच्छा लगता है, इसलिए कभी-कभी पैदल ही निकल पड़ता हूँ।

उस दिन भी मैं पैदल कार्यालय जा रहा था। कार्यालय के मुख्य द्वार के पास पहुँचा ही था कि सामने से एक व्यक्ति जॉगिंग करता हुआ आया। मेरे पास आकर मुस्कुराते हुए बोला, "हेलो सर, कैसे हैं आप?"

उसके स्वर में अपनापन था। चेहरा जाना-पहचाना लगा, लेकिन स्मृति साथ नहीं दे रही थी। उसने पूछा, "आप शर्मा जी हैं न?"

मैंने कहा, "हाँ।"

फिर उसने मुस्कुराते हुए पूछा, "सर, आपने मुझे पहचाना?"

अचानक स्मृति के बंद दरवाज़े खुल गए। लगभग बाईस वर्ष पहले एक युवक प्रभात ने मेरे साथ हमारी प्रयोगशाला में अपना प्रोजेक्ट किया था। प्रशिक्षण के बाद उसे वैज्ञानिक बनना था। मैंने तुरंत कहा, "तुम प्रभात हो न?"

उसके चेहरे पर मुस्कान फैल गई। "हाँ सर, आपने बिल्कुल सही पहचाना।"

मैंने पूछा, "उम्र कितनी हो गई?"

उसने कहा, "अड़तालीस वर्ष।"

मैंने फिर पूछा, "पोस्टिंग कहाँ है?"

उसने उत्तर दिया, "हैदराबाद।"

और वह उसी गति से जॉगिंग करता हुआ आगे बढ़ गया।

पूरी मुलाकात... मुश्किल से बाईस सेकंड की।

मैं उसे कुछ देर तक जाता हुआ देखता रहा। ऐसा लगा जैसे मेरे मन के बगीचे में ठंडी हवा का एक झोंका आया हो और फिर चुपचाप आगे बढ़ गया।

उसके जाने के बाद यादों की परतें खुलने लगीं।

प्रभात हिंदी माध्यम से पढ़कर आया था। प्रयोगशाला में पूरा काम और रिपोर्ट अंग्रेज़ी में होती थी। भाषा उसके लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई थी। कई बार वह इतना निराश हो जाता कि उसे लगता था शायद वह प्रशिक्षण पूरा ही नहीं कर पाएगा और वैज्ञानिक बनने का उसका सपना अधूरा रह जाएगा। वह मानसिक तनाव और अवसाद जैसी स्थिति से भी गुजर रहा था।

उस समय वह मेरे साथ प्रोजेक्ट कर रहा था। मैंने यथासंभव उसका मार्गदर्शन किया। उसकी थीसिस लिखने में मदद की, प्रोजेक्ट समझाया, उसका आत्मविश्वास बढ़ाया और हर संभव प्रयास किया कि वह हिम्मत न हारे। अंततः उसने सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूरा किया और वैज्ञानिक बन गया।

आज, पूरे बाईस वर्ष बाद, यह अप्रत्याशित मुलाकात हुई।

आमतौर पर इतने वर्षों बाद मिलने पर लोग परिवार, नौकरी, प्रमोशन, बच्चों और जीवन की उपलब्धियों की बातें करते हैं। लेकिन उसने न कुछ पूछा, न अपनी कोई उपलब्धि गिनाई। केवल कुछ शब्द बोले और आगे बढ़ गया।

पर जाने क्यों मुझे लगा कि उन बाईस सेकंडों में उसने मुझे जीवन के बाईस सूत्र दे दिए।

जीवन के 22 सूत्र

जीवन रुकने का नहीं, चलते रहने का नाम है।

शरीर को हमेशा गतिशील रखिए।

स्वास्थ्य सबसे बड़ी पूँजी है।

प्रसन्न रहना भी एक साधना है।

काम जीवन का हिस्सा है, पूरा जीवन नहीं।

हर दिन अपने लिए थोड़ा समय निकालिए।

उम्र केवल एक संख्या है।

मुस्कान सबसे सुंदर परिचय है।

पुराने संबंध कभी समाप्त नहीं होते।

कठिन समय हमेशा के लिए नहीं रहता।

संघर्ष के बाद भी जीवन मुस्कुरा सकता है।

सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण मन की शांति है।

लोगों की परवाह कम, अपने जीवन की अधिक कीजिए।

सादगी सबसे बड़ी सुंदरता है।

कम शब्द भी गहरे संदेश दे सकते हैं।

वर्तमान में जीना सीखिए।

यादें जीवन की अमूल्य धरोहर हैं।

कृतज्ञ रहिए।

विनम्रता सबसे बड़ा आभूषण है।

स्वयं का ध्यान रखना भी एक कर्तव्य है।

खुश रहना एक निर्णय है।

यदि आप स्वस्थ, प्रसन्न और गतिशील हैं, तो जीवन वास्तव में सफल है।

उस दिन मुझे लगा कि कभी-कभी जीवन के सबसे बड़े उपदेश लंबे भाषणों से नहीं, बल्कि कुछ सेकंड की मुलाकातों से मिलते हैं।

22 साल बाद की 22 सेकंड की मुलाकात ने मुझे जीवन के 22 सूत्र दे दिए। शायद वह कुछ कहने नहीं आया था, बल्कि बिना कहे बहुत कुछ सिखाकर चला गया। :::

"उस दिन मुझे यह भी समझ में आया कि जीवन में हम जिन लोगों की निस्वार्थ सहायता करते हैं, वे भले वर्षों तक न मिलें, लेकिन उनकी एक मुस्कान ही हमारे लिए सबसे बड़ा पुरस्कार बन जाती है।"


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